अगला आंदोलन बलथरवा कोल डंप को बंद कराने को लेकर होगा
डकरा : बलथरवा कोल डंप में चार लोग मिल कर लगभग 400 लोगों का हक व अधिकार मारने का काम कर रहे हैं. लोग पूरे संवैधानिक तरीके से जिम्मेवार और जवाबदेह पर बैठे प्रशासन और प्रबंधन के पास घूम-घूम कर अपना हक मांग रहे हैं. कोई भी उनकी सुनने को तैयार नहीं है. उक्त बातें गुलजारबाग जन कल्याण समिति के अध्यक्ष युगेश्वर राम ने सोमवार को डकरा के एनके महाप्रबंधक कार्यालय के समक्ष आयोजित एकदिवसीय धरना में कही. कहा कि झामुमो के बड़े आंदोलन के बाद रोहिणी से विस्थापित हुए रैयत, विस्थापित और प्रभावितों के लिए 80 के दशक में रोजगार की खातिर डंप चालू किया गया था. लेकिन मात्र चार लोग राजकिशोर राम पासवान, सागर गोप, मदन साव और सी कुजूर मिल कर डंप पर कब्जा कर लिया. सी कुजूर छत्तीसगढ़ का रहनेवाला है.
उनकी पत्नी सीसीएल में नौकरी करते थी. लेकिन कुजूर डंप कमेटी से जुड़ कर स्थानीय लोगों का हक मार रहा है. ये झारखंड आंदोलन को भी बदनाम कर रहे हैं. मामले में 19 फरवरी, छह अप्रैल को एनके महाप्रबंधक को पत्र लिखा गया. जिसकी प्रतिलिपि खलारी सीओ, थाना और डीसी को भी भेजा गया. कुछ निष्कर्ष नहीं निकला, तब 11 अप्रैल को रोहिणी पीओ ऑफिस के समक्ष धरना दिया गया. यहां प्रबंधन के लोगों ने वार्ता की. लेकिन इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई. तब 25 अप्रैल को पत्र देकर आठ मई तक का समय दिया गया था. इसके बाद भी कुछ नहीं हुआ तब सोमवार को धरना दिया गया है. इसके बाद अब डंप में ही लोग अनिश्चितकाल के लिए बैठेंगे. धरना के बाद महाप्रबंधक को ज्ञापन सौंपा गया. इस अवसर पर बिनोद राम, गुलाम मोहम्मद, खड़क सिंह, सुरेश लोहरा, सूरज लोहरा, अमित लोहरा, दीपक राय, दिलीप उरांव, छोटू पाहन, संगीता देवी, राजकुमारी देवी, सन्नी देवी, आशा देवी, विमला देवी, सावित्री देवी, रंधी देवी, सुनीता देवी, तारा देवी आदि मौजूद थे.
पंचायत प्रतिनिधियों ने धरना का समर्थन किया
खलारी प्रखंड प्रमुख सोनी तिग्गा, मुखिया वीणा देवी, जिप सदस्य रतिया गंझू ने भी धरना कार्यक्रम को अपना समर्थन दिया. सोनी तिग्गा और वीणा देवी धरना पर भी बैठी.
क्या है आठ सूत्री मांग
हुटाप, जी टाइप, बलथरवा, गुलजारबाग, लाल धौड़ा, नया बस्ती के ग्रामीणों को रोजगार देने, झारखंड आंदोलन में ताम्र पत्र से सम्मानित लोगों को सहयोग राशि देने, डंप खोलवाने और आंदोलन में शामिल रहे मृत लोगों के परिवार को मदद देने, उनके बच्चों को शिक्षा देने में मदद करने, आंदोलनकारी अशरफ खान के परिवार को मदद करने व डंप को बलथरवा में ही चलाने की मांग शामिल है.
