JPSC-JSSC आंदोलन थमा, लेकिन छात्रों की लड़ाई नहीं! 25 दिन बाद आभार यात्रा, अब PGT और नगरपालिका परीक्षा पर सवाल

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JPSC-JSSC : आभार यात्रा

राज्य सरकार ने जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षाओं को रद्द करने की अधिसूचना जारी की, जिससे 25 दिनों से चल रहा छात्र आंदोलन स्थगित हो गया. छात्रों ने सरकार का आभार व्यक्त किया लेकिन PGT और नगरपालिका परीक्षाओं पर सवाल उठाए हैं.

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रांची: राज्य सरकार ने जेपीएससी द्वारा ली गयी 21 और जेएसएससी सीजीएल की एक परीक्षा को रद्द करने की अधिसूचना देर रात जारी कर दी. वहीं, 23 परीक्षाओं की जांच के आदेश भी जारी हो गए. सरकार की अधिसूचना के बाद जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच ने पिछले 25 दिनों से चल रहा अपना आंदोलन बुधवार को स्थगित कर दिया और रांची के जयपाल सिंह स्टेडियम में जमे छात्र लौट गए. इससे पहले छात्रों ने राज्य सरकार का आभार जताया. बुधवार की देर शाम छात्रों ने जयपाल सिंह स्टेडियम से अल्बर्ट एक्का चौक तक आभार यात्रा निकाली और आतिशबाजी कर खुशियां मनायीं.

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छात्रों ने कहा कि परीक्षाओं में अनियमितता को लेकर वे आंदोलनरत थे. छात्रों का कहना है कि सरकार कोर्ट में भी छात्रों का पक्ष और परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को मजबूती से रखे. यदि ऐसा नहीं किया गया, तो इसे छात्रों के साथ धोखा माना जाएगा. जांच की प्रक्रिया न्यायिक और पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए. छात्र आंदोलन से जुड़े कुणाल ने कहा कि जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच को रजिस्टर्ड कराया जायेगा. यह मंच छात्रों की आवाज बनेगा. उन्होंने कहा कि भविष्य में राज्य में छात्रों से जुड़ा कोई भी महत्वपूर्ण मुद्दा सामने आने पर मंच उसकी आवाज मजबूती से उठायेगा. छात्रों ने सरकार से आंदोलन के दौरान छात्रों पर दर्ज किये गये सभी केस वापस लेने की मांग की है. छात्रों ने पीजीटी परीक्षा को भी रद्द करने की मांग की है. नगरपालिका परीक्षा पर भी छात्रों ने सवाल उठाये हैं.

सभी छात्रों के साथ न्याय की पक्षधर है सरकार: उच्च शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू

JPSC-JSSC परीक्षाओं के संबंध में लिए गए निर्णय के बाद राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा है कि सरकार सभी छात्रों के साथ न्याय की पक्षधर है. जिन परीक्षाओं में गड़बड़ी की बातें सामने आयीं, वे परीक्षाएं रद्द हुईं या संदिग्ध परीक्षाओं की जांच के निर्देश दिए गये हैं. पर सरकार उन परीक्षार्थियों के साथ पूरी सहानुभूति रखती है, जिनकी नौकरियां सरकार के निर्णय से प्रभावित हुई हैं.

उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों के बीच पारदर्शिता बनाये रखने के लिए कृतसंकल्प है. जांच अभी चल रही है. कुछ लोगों को अगर ऐसा लगता है कि उनके साथ न्याय नहीं हुआ, तो न्यायालय का रास्ता उनके लिए खुला है. सरकार किसी के साथ अन्याय नहीं चाहती है. मंत्री ने प्रभात खबर के साथ बातचीत में कहा कि मौजूदा स्थितियां विपरीत हैं. पर सरकार प्रयासरत है कि स्थितियां अनुकूल हों और जल्द से जल्द नियुक्ति प्रक्रियाओं को चालू किया जा सके. बड़ी संख्या में अब परीक्षाओं की जांच होनी है. कई परीक्षाएं, जो रद्द की गयीं, उनकी जांच अभी चल रही है. ऐसे में जांच पूरी होने पर ही नयी नियुक्तियां होंगी या सरकार जांच के बीच ही नयी नियुक्तियों के लिए कार्रवाई शुरू करेगी, इस संबंध में अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है.

परीक्षा रद्द होने से नियुक्त अधिकारी सीधे सेवा से नहीं होंगे बाहर

वहीं सर्विस मामलों के जानकार झारखंड हाइकोर्ट के अधिवक्ता भवेश कुमार ने हमारे साथ जानकारी साझा करते हुए कहा कि प्रतियोगिता परीक्षा से चयन होने के बाद सेवा में नियुक्त हो चुके अधिकारियों को हटाने की कार्रवाई नियोक्ता विभाग ही कर सकता है. राज्य सरकार द्वारा सीआइडी जांच में मिले तथ्यों के आधार पर प्रतियोगिता परीक्षा को रद्द कर देने मात्र से नियुक्त अधिकारी नहीं हटाये जा सकते. नियोक्ता विभाग राज्य सरकार की अधिसूचना के आधार पर नौकरी कर रहे अधिकारियों को सेवा मुक्त कर सकता है. इसके लिए अलग से आदेश जारी करना होगा.


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