गुलुडुमरिया सिंहवाहिनी मंदिर में मां के सिंहासन की होती है पूजा

बिंदापाथर. गुलुडुमरिया गांव में स्थापित सिंहवाहिनी मंदिर में दशहरा पर्व को लेकर खुशी का माहौल है.
प्रतिनिधि, बिंदापाथर. गुलुडुमरिया गांव में स्थापित सिंहवाहिनी मंदिर में दशहरा पर्व को लेकर खुशी का माहौल है. यहां का अति प्राचीन एवं क्षेत्र प्रसिद्ध मंदिर श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र है. यहां विराजमान मां सिंहवाहिनी की पूजा-अर्चना भक्ति भाव से की जाती है. मंदिर में मूर्ति की स्थापना नहीं होती है, केवल सिंहासन की ही पूजा भक्तिभाव से की जाती है. इस मंदिर का इतिहास काफी रोचक है. मंदिर की स्थापना लगभग 554 वर्ष पूर्व की गयी थी, जहान आज भी विधि पूर्वक पूजा-अर्चना की जाती है. मंदिर स्थापना के बारे में कृष्ण चंद्र मंडल, नेपाल चंद्र मंडल, विजय मंडल, बलराम मंडल, वासुदेव मंडल, काजल मंडल, फनीभूषण मंडल आदि ने बताया कि हमारे पूर्वज सोरुप खां एवं बेजु मंडल ने माता रानी की स्थापना की थी. मंदिर में मूर्ति की स्थापना नहीं कर केवल सिंहासन की ही पूजा होती है. यह परंपरा आज भी उनके वंशजों द्वारा विधि विधान के साथ निभाया जाता है. मान्यता है कि जो भी श्रद्धालु इस मंदिर में भक्तिभाव से पूजा करते हैं एवं मन्नत करते हैं उन्हें माता का आशीर्वाद अवश्य प्राप्त होता है. बताया कि प्राचीन काल में यह मंदिर मिट्टी से बनाया गया था. माता रानी की कृपा से ही मिट्टी के मंदिर के सामने भव्य मंदिर का निर्माण किया गया है. यहां षष्ठी तिथि को देवी कात्यायनी की पूजा होती है और बिल्वाभिमंत्रण किया जाता है. बंगाली समुदाय के लोगों में इस तिथि का खास महत्व है. इस दिन से मां दुर्गा की पूजा आरंभ होती है. दुर्गापूजा लेकर क्षेत्र में भक्ति व उत्साह का माहौल बना हुआ है.
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