तीन दिवसीय मां चंचला महोत्सव हवन व कलश विसर्जन के साथ हुआ समापन

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तीन दिवसीय मां चंचला महोत्सव हवन व कलश विसर्जन के साथ हुआ समापन

जामताड़ा आस्था, भक्ति और अनुशासन का जीवंत उदाहरण बना रहा. ढोल-ढाक, वैदिक मंत्रोच्चार के साथ मुख्य कलश काे सरकार बांध में विसर्जित किया.

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जामताड़ा. जामताड़ा की कुल देवी, जगत जननी मां चंचला के पावन धाम में आयोजित 13वीं वार्षिक महोत्सव का समापन रविवार को भव्य कलश विसर्जन के साथ संपन्न हो गया. इस पूरे महोत्सव के मुख्य यजमान के रूप में वीरेंद्र मंडल ने प्रत्येक पूजा-अनुष्ठान का नेतृत्व करते हुए विधि-विधान के साथ सभी धार्मिक क्रियाएं संपन्न करायीं. तीन दिनों तक जामताड़ा आस्था, भक्ति और अनुशासन का जीवंत उदाहरण बना रहा. महोत्सव के पूर्णाहुति पर प्रातःकाल से ही मां चंचला मंदिर प्रांगण में धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत हुई. मुख्य यजमान वीरेंद्र मंडल ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पंचोपचार पूजा, षोडशोपचार विधान, महाहवन, गौ-माता पूजन, ब्राह्मण भोजन एवं कन्या भोजन को स्वयं संपन्न कराया. सभी अनुष्ठान शास्त्रोक्त विधि से संपन्न हुए, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु साक्षी बने. उन्होंने महोत्सव समिति की ओर से ब्राह्मणों एवं कन्याओं को वस्त्र, दक्षिणा एवं अन्य पूजन सामग्री का दान किया. कलश विसर्जन यात्रा से पूर्व मुख्य यजमान वीरेंद्र मंडल ने ढोल-ढाक, वैदिक मंत्रोच्चार एवं विधि-विधान के साथ मुख्य कलश का शहर स्थित सरकार बांध में विसर्जन किया. इस दौरान भी बड़ी संख्या में माताएं-बहनें एवं भक्तजन सम्मिलित रहे. इसके बाद निकाली गयी भव्य कलश विसर्जन यात्रा में हजारों महिलाओं, बहनों और श्रद्धालुओं ने सहभागिता की. जय माता दी के जयघोष से संपूर्ण नगर गुंजायमान हो उठा. इस विसर्जन यात्रा में उत्साह और उमंग व भक्ति का वातावरण रहा. सभी भक्त जन इस पूरी विसर्जन यात्रा के दौरान झूमते गाते नजर आए.

तीन दिनों तक धार्मिक नगरी बना रहा जामताड़ा :

पूरे महोत्सव काल में मां चंचला मंदिर में दिन-रात श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता रहा. दूर-दराज से पहुंचे भक्तों ने माता रानी के दर्शन कर सुख-समृद्धि और कल्याण का आशीर्वाद लिया. रात्रि में भक्ति जागरण का आयोजन किया गया. वीरेंद्र मंडल ने कहा कि इस वर्ष आयोजित मां चंचला 13वीं वार्षिक महोत्सव एवं कलश शोभा यात्रा ने भव्यता, अनुशासन और श्रद्धा के नए मानक स्थापित किए हैं. उन्होंने आयोजन को ऐतिहासिक रूप से सफल बनाने में सहयोग देने वाले जामताड़ा के सभी वर्गों, सामाजिक संस्थाओं, प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, स्वयंसेवकों, महिलाओं, बुजुर्गों व समस्त भक्तजनों के प्रति आभार प्रकट किया. तीन दिन तक पूरे जामताड़ा जिले सहित राज्य भर में इस भव्य ऐतिहासिक महोत्सव की धूम रही.

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Binay Kumar

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