गिरिधारी मंदिर प्रांगण में हरिनाम संकीर्तन व पाला कीर्तन संपन्न
Published by : BINAY KUMAR Updated At : 16 Mar 2025 10:41 PM
विभिन्न क्षेत्रों से भक्त वैष्णव भगवान की दौल उत्सव में हुए शामिल. विगत 55 साल से भी अधिक समय से मोहजोड़ी, खामार एवं हदलबांक गांव में यह अनुष्ठान होते आया है.
नाला. प्रखंड क्षेत्र के बंदरडीहा पंचायत के अंतर्गत मोहजोड़ी गांव स्थित गिरिधारी मंदिर प्रांगण में चार दिवसीय अखंड हरिनाम संकीर्तन एवं पाला कीर्तन हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ. विगत 55 साल से भी अधिक समय से मोहजोड़ी, खामार एवं हदलबांक गांव में यह अनुष्ठान होते आया है. होली के मौके पर कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल के नवद्वीप धाम के मशहूर दूरदर्शन ख्यात बांग्ला कीर्तन गायिका गौरी राय पंडित एवं लक्ष्मी प्रिया पाल ने भगवान श्रीकृष्ण एवं राधारानी के पूर्वराग लीला, मान भोजन लीला, उत्तर गोष्ठ लीला, भगवान श्रीकृष्ण के रूप का वर्णन किया. अंत में कुंजविलास लीला का वर्णन प्रस्तुत कर श्रोता भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया. मौके पर उन्होंने चंडीदास, विद्यापति, गोविंद दास, बासुदेव घोष आदि कवियों द्वारा रचित पदावली कीर्तन का वर्णन किया. लीला का वर्णन करते हुए कहा कि धर्मपरायण राजा परीक्षित को सम्यक मुनि के पुत्र द्वारा सात दिन के भीतर तक्षक नाग के दंशन से मृत्यु का श्राप दिया गया. श्रापित राजा परीक्षित मुक्ति के लिए भ्रमण के पश्चात शुकदेवजी ने कहा कि इस श्राप से मुक्ति का एकमात्र उपाय भागवत कथा श्रवण से ही संभव है. व्यास देव ने उन्हें भागवत कथा सुनायी, जिससे उनको मोक्ष प्राप्त हुई. मनुष्य जन्म में ऐसा कर्म करना चाहिए जिससे जगत कल्याण के साथ-साथ दुर्लभ मानव जीवन सार्थक हो. कहा कि सद्गुरु चरण आश्रय कर भगवत सेवा करने से मन की समस्त पीड़ा दूर हो जाती है. कलियुग में जीवों की अल्प आयु के कारण उद्धार का एकमात्र उपाय हरिनाम संकीर्तन है. मौके पर पहाड़गोड़ा अवस्थित श्री श्री गिरिराज गोवर्धन बाबा गिरिधारी मंदिर में दोल पूर्णिमा के शुभ अवसर पर चौबीस प्रहार अखंड हरिनाम संकीर्तन के दिव्य आयोजन के समापन के अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष रवींद्र नाथ महतो भी पहुंचे. उन्होंने कहा कि ऐसे आध्यात्मिक आयोजनों से समाज में संस्कार, सद्भाव और सशक्त सांस्कृतिक चेतना का संचार होता है. कथा से जुड़े सभी श्रद्धालुओं, आयोजन समिति और सहयोगियों का धन्यवाद किया है. मौके पर बड़वा सुंदरपुर, बाघमारा, पिंडारगड़िया, जगन्नाथपुर आदि गांवों के अलावा आसपास गांव का वातावरण भक्तिमय बना रहा.
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