श्रीमद्भागवत मनुष्य को कर्मयोगी बनाती है : कथावाचक

Updated at : 19 Mar 2026 6:47 PM (IST)
विज्ञापन
श्रीमद्भागवत मनुष्य को कर्मयोगी बनाती है :  कथावाचक

बिंदापाथर. मंझलाडीह गांव में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा जारी है.

विज्ञापन

बिंदापाथर. मंझलाडीह गांव में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा जारी है. इसके द्वितीय दिन वृंदावन धाम के कथावाचक कुलदीप कृष्णा जी महाराज ने राजा परीक्षित प्रसंग का वर्णन किया. कहा कि श्रीमद्भागवत मनुष्य को कर्मयोग की राह पर चलने की प्रेरणा देती है. उन्होंने बताया कि वन में आखेट के दौरान प्यास से व्याकुल राजा परीक्षित ऋषि शमीक के आश्रम पहुंचे, जहां ध्यानमग्न ऋषि द्वारा कोई उत्तर न मिलने पर उन्होंने क्रोधवश मृत सर्प को उनके गले में डाल दिया. इस घटना से क्रोधित होकर ऋषि के पुत्र ऋंगी ने राजा को सातवें दिन तक्षक सर्प के डंसने का श्राप दे दिया. बाद में शमीक ऋषि ने इसे अनुचित बताते हुए अपने पुत्र को फटकार लगाई और कहा कि राजा परीक्षित एक धर्मनिष्ठ शासक है. वहीं श्राप की जानकारी मिलने पर राजा परीक्षित ने इसे दंड नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि का अवसर माना और शेष जीवन भगवत भक्ति व ज्ञान अर्जन में लगाने का संकल्प लिया.

विज्ञापन
JIYARAM MURMU

लेखक के बारे में

By JIYARAM MURMU

JIYARAM MURMU is a contributor at Prabhat Khabar.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola