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बीमारी से लाचार, लेकिन हौसले बुलंद, बिस्तर पर लेटे-लेटे लिख दीं 5 किताबें

Updated at : 09 Jun 2025 3:09 PM (IST)
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Anant Kumar Soren

Anant Kumar Soren

Motivational Story : अगर आपके हौसले बुलंद हो, तो बड़ी से बड़ी मुसीबत आपको ऊंची उड़ान भरने से नहीं रोक सकती है. कहते हैं न "मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता हौसलों से उड़ान होती है". कुछ ऐसा ही कर दिखाया है 57 वर्षीय अनंत कुमार सोरेन ने. उन्होंने बिस्तर पर लेटे-लेटे 5 संताली पुस्तकें लिख दीं.

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Motivational Story : जमशेदपुर जिले के 57 वर्षीय अनंत कुमार सोरेन पिछले 29 सालों से से एंकिलॉजिंग स्पॉन्डिलाइटिस नामक बीमारी से जूझ रहे हैं. इस बीमारी के कारण वे अपने बिस्तर से भी नहीं उठ सकते, लेकिन उन्होंने बीमारी के आगे अपने हौसलों को झुकने नहीं दिया. अनंत कुमार सोरेन ने बिस्तर पर लेटे-लेटे 5 संताली पुस्तकें लिखी. उनकी लिखी सभी पांच पुस्तकें झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, बिहार, असम समेत अन्य आदिवासी मूलवासी बहुल राज्यों में खूब धूम मचा रही हैं.

ओलचिकी और बांग्ला लिपि में लिखी किताबें

अनंत कुमार सोरेन ने जो 5 किताबें लिखी हैं उनमें मिद आंजले रास्का रास्का, दुलाड़ डालिच, गायान गाछि, ओंतोर ताला सोज और सोहाग उमुल शामिल हैं. ये सभी संताली किताबें ओलचिकी और बांग्ला लिपि में लिखी गयी हैं. इसके अलावा भी उन्होंने 3 पुस्तकें लिखी है, जो कि प्रकाशन के लिए तैयार है.

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पश्चिम बंगाल के रहने वाले हैं अनंत

अनंत मूल रूप से पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा जिले के रानीबांध प्रखंड अंतर्गत जताडुमुर गांव के रहने वाले हैं. वे ऑल इंडिया संताली राइटर्स एसोसिएशन, जमशेदपुर के सदस्य हैं. उनका झारखंड में जमशेदपुर के अलावा दुमका, पाकुड़, धनबाद से गहरा लगाव रहा है. जब तक वे स्वस्थ थे, तो साहित्यिक और व्यक्तिगत कारणों से जमशेदपुर आना-जाना लगा रहता था. उनके कई रिश्तेदार जमशेदपुर में रहते हैं. बीमारी के बाद से आना-जाना बंद हो गया.

बहन और जीजा ने दिया अनंत का साथ

अनंत कुमार सोरेन ने अपनी किताबों की छपाई के लिए किसी से कोई आर्थिक सहायता नहीं ली. वे किसान परिवार से हैं. उन्होंने घर में रखे धान और सब्जियों की बिक्री से हुई आमदनी से किताबों को छपवाया. बीमारी के कारण वे बिस्तर से उठने में सक्षम नहीं है. इस कारण घर का सारा कामकाज और खेतीबाड़ी उनकी बहन और जीजा करते हैं. वे दोनों ही अनंत के सपनों को आकार देने में मदद करते हैं.

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Dipali Kumari

लेखक के बारे में

By Dipali Kumari

नमस्कार! मैं दीपाली कुमारी, एक समर्पित पत्रकार हूं और पिछले 3 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं. वर्तमान में प्रभात खबर में कार्यरत हूं, जहां झारखंड राज्य से जुड़े महत्वपूर्ण सामाजिक, राजनीतिक और जन सरोकार के मुद्दों पर आधारित खबरें लिखती हूं. इससे पूर्व दैनिक जागरण आई-नेक्स्ट सहित अन्य प्रतिष्ठित समाचार माध्यमों के साथ भी कार्य करने का अनुभव है.

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