..अब महिलाएं भी नाइट शिफ्ट करेंगी
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जमशेदपुर : टाटा स्टील में नाइट शिफ्ट में भी महिलाकर्मियों की सेवा ली जायेगी. इसके लिए कंपनी की ओर से राज्य सरकार को झारखंड श्रम कानून में संशोधन करने का प्रस्ताव दिया जायेगा. यह बात टाटा स्टील के एमडी टीवी नरेंद्रन ने कही. वे रविवार को सेंटर फॉर एक्सीलेंस में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान […]
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जमशेदपुर : टाटा स्टील में नाइट शिफ्ट में भी महिलाकर्मियों की सेवा ली जायेगी. इसके लिए कंपनी की ओर से राज्य सरकार को झारखंड श्रम कानून में संशोधन करने का प्रस्ताव दिया जायेगा. यह बात टाटा स्टील के एमडी टीवी नरेंद्रन ने कही. वे रविवार को सेंटर फॉर एक्सीलेंस में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बात कर रहे थे.
श्री नरेंद्रन ने कहा कि कंपनी में महिला कर्मियों की संख्या बढ़ायी जायेगी. वर्तमान में टाटा स्टील में करीब 6 से 7 फीसदी महिलाएं कार्यरत हैं. इस स्थिति को सुधारने का प्रयास टाटा स्टील प्रबंधन की ओर से किया जायेगा. इसके लिए आने वाले दिनों में महिलाकर्मियों की बहाली होगी. उन्हें भी कंपनी के अंदर काम में लगाया जायेगा. एमडी नरेंद्रन ने कहा कि कंपनी में कई डिपार्टमेंट में महिलाओं की अच्छी खासी संख्या है, लेकिन ओवरऑल महिलाओं की संख्या में काफी कमी है. इसके लिए टाटा स्टील प्रबंधन आने वाले दिनों में एक नोटिफिकेशन भी जारी करेगी. लेकिन इससे पहले महिलाओं के काम-काज को लेकर कानूनी पहलुओं की समीक्षा की जा रही है.
श्रम कानून में संशोधन का प्रस्ताव : श्री नरेंद्रन ने कहा कि वे कंपनी में महिलाओं की संख्या में इजाफा करने की दिशा में गंभीर हैं. लेकिन इसमें कुछ कानूनी अड़चन आ रही है. यह नियम है कि भारी उद्योग में शाम 6 बजे के बाद महिलाओं को काम पर नहीं लगाया जा ,सकता. लेकिन गुजरात समेत कई अन्य राज्यों ने इस कानून में संशोधन किया गया है, जिसके बाद इन राज्यों में यहां महिलाएं भी लेट नाइट काम कर रही हैं. इसके लिए झारखंड सरकार के पास श्रम कानून में संशोधन का प्रस्ताव भेजा गया है. यह होने के बाद महिलाओं की संख्या में बढ़ोतरी हो सकेगी.
एयरपोर्ट के प्रति गंभीर : टाटा स्टील के एमडी टीवी नरेंद्रन ने कहा कि जमशेदपुर में एयरपोर्ट की जरूरत है. इस जरूरत को पूरा करने के लिए सरकार के साथ ही टाटा स्टील भी गंभीर है. लेकिन जमीन मुख्य समस्या है. मुख्यमंत्री के साथ इस मसले पर बात हुई है. लेकिन अगर जमीन मिल भी जाये, तो उसे तैयार करने में चार से पांच साल लग जायेंगे. फिलहाल सड़कों को दुरुस्त करने का प्रयास किया जा रहा है.
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