गांव की गर्भवतियों का डाटा बनायेगा स्वास्थ्य विभाग

Updated at : 07 Nov 2019 8:16 AM (IST)
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गांव की गर्भवतियों का डाटा बनायेगा स्वास्थ्य विभाग

जमशेदपुर : स्वास्थ्य विभाग हर गांव की गर्भवती का डाटा भी सुरक्षित रखेगा. इस तरह प्रसव के दौरान गर्भवती और नवजात की होने वाली मौतों को रोकने के लिए प्रभावी उपाय किये जायेंगे. शहर के अस्पतालों में प्रसव के दौरान, प्रसव के पहले या बाद में गर्भवती की मौत की जानकारी स्वास्थ्य विभाग को सहज […]

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जमशेदपुर : स्वास्थ्य विभाग हर गांव की गर्भवती का डाटा भी सुरक्षित रखेगा. इस तरह प्रसव के दौरान गर्भवती और नवजात की होने वाली मौतों को रोकने के लिए प्रभावी उपाय किये जायेंगे.

शहर के अस्पतालों में प्रसव के दौरान, प्रसव के पहले या बाद में गर्भवती की मौत की जानकारी स्वास्थ्य विभाग को सहज रूप से प्राप्त हो जाती है लेकिन गांव में गर्भवती की प्रसव के दौरान घर या अन्य स्थानों पर होने वाली मौत का डाटा विभाग को नहीं मिल पाता. इससे गर्भवती की मौत के कारणों का भी पता नहीं चल पाता है. इसे ध्यान में रखकर केंद्र व राज्य सरकारें वरबल ऑटोप्सी चला कर ग्रामीण क्षेत्रों में मरने वाली गर्भवती की जानकारी लेंगी.
एमजीएम मेडिकल कॉलेज में बुधवार को आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में कॉलेज के प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर, ट्यूटरों को रांची रिम्स मेडिकल कॉलेज से आये ट्रेनर डॉ देवेश व एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डॉ रणधीर ने वरबल ऑटोप्सी से अवगत कराया.
डॉक्टरों को बताया कि दूसरे राज्यों की तुलना में झारखंड में गर्भवती व प्रसव के बाद नवजात के मौत के मामले अधिक हैं जो चिंता का विषय है. इसे रोकने की जिम्मेदारी केंद्र सरकार ने दिल्ली एम्स के चिकित्सकों को सौंपी है. यहां के डॉक्टर उन मौतों का कारण जानने का प्रयास कर रहे हैं.
एमजीएम कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ एसी अखौरी ने कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए बताया कि मातृ मृत्यु दर पर अंकुश लगाने के लिए केंद्र सरकार ने वरबल ऑटोप्सी योजना की शुरूआत की है. वरबल ऑटोप्सी के तहत मृतक व्यक्ति के देखभाल कर्ता अथवा परिवार के सदस्यों से विस्तार पूर्वक जानकारी लेना का काम किया जायेगा. उसकी मौत के बारे में जानकारी ली जाएगी, उसकी रिपोर्ट दिल्ली एम्स को भेजी जायेगी.
योजना को सफल बनाने के लिए लिए रांची रिम्स, एमजीएम सहित अन्य मेडिकल कॉलेजों का सहयोग लिया जा रहा है ताकि मौत का सही कारण जानकर उसका ऑनलाइन डाटा तैयार किया जा सके. इस अवसर पर डॉ आरके मंधान, डॉ एनके सिन्हा, डॉ नीलम चौधरी, डॉ एसके चौहान, डॉ वनिता सहाय, डॉ प्याली गुप्ता, डॉ रतन कुमार सहित अन्य डॉक्टर उपस्थित थे.
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