जमशेदपुर : दलमा में चार जंगली सूअर, दो हिरण व खरगोश का सेंदरा
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 07 May 2019 9:34 AM
लोकतंत्र के महापर्व व दो सेंदरा समिति के बीच विवाद के कारण दलमा में कम दिखे सेंदरा वीर जमशेदपुर : प्रशासन की सतर्कता और वन विभाग की सख्ती के बीच आदिवासी परंपरा का निर्वाह करते हुए सेंदरा वीरों ने दलमा में शिकार किया. सेंदरा वीरों ने चार जंगली सूअर, दो हिरण, दो खरगोश व एक […]
लोकतंत्र के महापर्व व दो सेंदरा समिति के बीच विवाद के कारण दलमा में कम दिखे सेंदरा वीर
जमशेदपुर : प्रशासन की सतर्कता और वन विभाग की सख्ती के बीच आदिवासी परंपरा का निर्वाह करते हुए सेंदरा वीरों ने दलमा में शिकार किया. सेंदरा वीरों ने चार जंगली सूअर, दो हिरण, दो खरगोश व एक लाल गिलहरी का सेंदरा किया. वन विभाग से बचते-बचाते सेंदरा वीर शिकार को शाम में घने जंगल से उतार कर ले गये. हालांकि भीषण गर्मी में कई सेंदरा वीर एक भी वन्य प्राणी का शिकार नहीं कर सके. उन्हें बैरंग ही लौटना पड़ा. इसके बावजूद सेंदरा वीरों में उत्साह व जोश में कमी नहीं दिखी. जिस जोश व उत्साह के साथ सेंदरा वीर दलमा की चढ़ाई शुरू कर थी, दिन भर घने जंगलों की खाक छानने के बाद उसी उत्साह से तलहटी में लौटे.
दलमा बुरू सेंदरा समिति के आह्वान पर सोमवार को आदिवासियों ने परंपरागत शिकार पर्व मनाया. पिछले साल की तुलना में इस बार सेंदरा वीरों संख्या कम रही. सेंदरा समिति की माने, तो करीब तीन हजार सेंदरा वीर इसमें शामिल हुए. सेंदरा समिति के दो गुट में बंटने व लोकसभा चुनाव के कारण सेंदरा पर्व में वीरों की संख्या कम रही. हर साल ओड़िशा व बंगाल से सैकड़ों की संख्या में सेंदरा वीर यहां आते हैं. इस साल ओड़िशा व बंगाल के सेंदरा वीर नगण्य दिखे. वन विभाग की सख्ती भी इसका एक कारण रही.
समाज के असामाजिक तत्वों का सेंदरा जरूरी
सेंदरा पर्व के मौके पर आयोजित लॉ बीर दोरबार में जुगसलाई तोरोफ परगना दसमत हांसदा ने कहा कि अगर कोई जंगली पशु मनुष्य पर आक्रमण कर उसे हानि पहुंचाता है तो अपनी रक्षा में उसका सेंदरा करना बाध्यता होती है. समाज के अंदर भी कई असामाजिक तत्व छुपे हुए हैं, जो गलत कार्य करते हैं. समाज की बहु-बेटियों पर गलत नजर रखते हैं. बलात्कार जैसी घटना को अंजाम देते हैं, उनका सेंदरा जरूरी है. उन्हाेंने कहा कि समाज का अस्तित्व बचाने का दायित्व युवा पीढ़ी पर है. युवा पीढ़ी को मातृभाषा, संस्कृति व समाज के बारे में बताने और उन्हें उनकी जबावदेही से रूबरू कराने की जरूरत है. आदिवासी व्यवस्था में हर व्यक्ति को समान न्याय मिलता है.
स्वशासन व्यवस्था की वेबसाइट लांच
फदलोगोड़ा में लो बीर दोरबार के दौरान सामाजिक, पारंपरिक, धार्मिक, सांस्कृतिक व शैक्षणिक समेत वर्तमान के ज्वलंत मुद्दों पर विचार मंथन किया गया. दलमा राजा राकेश हेंब्रम की अगुवाई में विचार आखड़ा में कई प्रस्ताव पारित किये गये. इसमें समाज के लोगों को पारंपरिक हथियार तीर-धनुष आवश्यक रूप से अपने घरों में रखने, सेंदरा की परंपरा को बचाने के लिए हर घर से उपस्थिति दर्ज करने, सामाजिक व्यवस्था ग्रामसभा को सशक्त बनाने के लिए गांव की सभी गतिविधियों व लेखा-जोखा को लिखित रूप से रजिस्टर में दर्ज करने का निर्णय लिया गया. लो बीर दोरबार में आदिवासी पारंपरिक व्यवस्था की वेबसाइट भी लांच की गयी.
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