जमशेदपुर : ओड़िया में फाइनल पीएचडी वाइवा का इंतजार कर रहे उम्मीदवारों को राहत
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :19 Jan 2019 7:47 AM (IST)
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जमशेदपुर : कोल्हान विवि से ओड़िया विषय में पीएचडी के लिए वर्ष 2013 में पंजीकृत किये गये उम्मीदवारों को बड़ी राहत मिलने जा रही है. विवि के लीगल सेल ने इन उम्मीदवारों के पीएचडी के फाइनल वाइवा कराने को लेकर सहमति व्यक्त की है. विवि की ओर से पीएचडी जांच के बाद ओड़िया विभाग के […]
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जमशेदपुर : कोल्हान विवि से ओड़िया विषय में पीएचडी के लिए वर्ष 2013 में पंजीकृत किये गये उम्मीदवारों को बड़ी राहत मिलने जा रही है. विवि के लीगल सेल ने इन उम्मीदवारों के पीएचडी के फाइनल वाइवा कराने को लेकर सहमति व्यक्त की है.
विवि की ओर से पीएचडी जांच के बाद ओड़िया विभाग के उम्मीदवारों की फाइल रुक गयी थी. इस मामले में राजभवन में शिकायत की गयी थी, जिसके बाद राजभवन के निर्देश पर विवि ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए यूजीसी की नियमावली, टाटा कॉलेज में संचालित होने वाले ओड़िया विभाग को सुप्रीम कोर्ट से मिली अनुमति के साथ पीएचडी जांच रिपोर्ट को लीगल सेल को रेफर किया. लीगल सेल ने इस मामले में सभी कागजातों को देखते हुए प्रक्रिया आगे बढ़ाने में किसी तरह की तकनीकी अड़चन नहीं होने की बात कही है.
हालांकि विवि की तरफ से अब तक इस मामले में स्पष्ट तौर पर कुछ नहीं कहा गया है. विवि सूत्रों की मानें, तो पूरे मामले पर लीगल सेल की राय विवि को प्राप्त हो गयी है. वर्तमान में ओडिया भाषा की पांच फाइलें लंबित थीं. लीगल सेल की ओपिनियन के बाद इसे मंजूरी के लिए अगली सिंडिकेट में रखा जायेगा.
पुराने मामले के निस्तारण के साथ ही वर्ष 2016 बैच के शोध प्रवेश परीक्षा पास छात्र-छात्राओं को जल्द राहत मिलने जा रही है. विभागाध्यक्ष डॉ एससी दास की ओर से डिपार्टमेंटल रिसर्च काउंसिल के गठन की फाइल बढ़ा दी गयी. डीआरसी गठन के साथ ही नये उम्मीदवारों के शोध पंजीकरण की प्रक्रिया प्रारंभ हो जायेगा.
विवि के सिंडिकेट में रखा जायेगा प्रस्ताव, सुप्रीम कोर्ट के आदेश से चल रहा था विभाग
वर्ष 2016 बैच के शोध प्रवेश परीक्षा पास छात्र-छात्राओं को भी जल्द होगी डीआरसी
हां, यह सही है कि वर्ष 2013 में पंजीकृत पांच उम्मीदवार प्री-सबमिशन के बाद फाइनल वाइवा का इंतजार कर रहे थे. इसमें से दो उम्मीदवार व्याख्याता तथा तीन सामान्य छात्र रहे. पूरे मामले को बेवजह विवाद में घसीटा गया.
घोटाला शब्द का इस्तेमाल कर छवि खराब की गयी. टाटा कॉलेज में ओडिया विभाग सुप्रीम कोर्ट के आदेश से संचालित हो रहा था. इससे संबंधित सभी कागजात व यूजीसी की नियमावली प्रस्तुत की गयी.
डॉ एससी दास, विभागाध्यक्ष, ओडिया सह पूर्व रजिस्ट्रार, केयू
पूरे मामले में कोई टिप्पणी नहीं कर सकता. पिछले दो दिनों से मुख्यालय में मौजूद नहीं था. लिहाजा इस मामले में प्रक्रिया से अनभिज्ञ हूं.
डॉ एके झा, प्रवक्ता, केयू
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