सुपर स्पेशलिटी चिकित्सा के नियमों में बदलाव, अब दो साल की जगह छह माह में मिलेगी इलाज की सुविधा
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :06 Nov 2018 6:58 AM (IST)
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आदित्यपुर : कर्मचारी राज्य बीमा निगम (इएसआइसी) ने प्रावधानों में कुछ परिवर्तन करते हुए बीमित कामगारों को छूट दी है. अब कामगारों को छह माह (अर्थात 78 कार्य दिवस) के योगदान के बाद ही सुपर स्पेशलिटी चिकित्सा की सुविधा मिलेगी. पहले दो साल काम पूरा करते हुए बीमा राशि में योगदान करने वाले कामगारों की […]
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आदित्यपुर : कर्मचारी राज्य बीमा निगम (इएसआइसी) ने प्रावधानों में कुछ परिवर्तन करते हुए बीमित कामगारों को छूट दी है. अब कामगारों को छह माह (अर्थात 78 कार्य दिवस) के योगदान के बाद ही सुपर स्पेशलिटी चिकित्सा की सुविधा मिलेगी. पहले दो साल काम पूरा करते हुए बीमा राशि में योगदान करने वाले कामगारों की ही यह सुविधा मिलती थी.
नये प्रावधान में बीमित कामगारों के परिवार को एक साल (अर्थात 156 कार्य दिवस) के योगदान पर ही सुपर स्पेशलिटी चिकित्सा सुविधा मिलेगी. यह जानकारी इएसआइसी अस्पताल के अधीक्षक डॉ निरोज कुजूर के हवाले से प्रवक्ता डॉ एएम अखौरी ने दी.
टीएमएच व टाटा मोटर्स अस्पताल से होगा टाइअप : डॉ कुजूर ने बताया कि कामगार यूनियनों के दबाव के कारण इएसआइसी प्रबंधन ने निर्णय लिया है कि बीमित कामगारों के इलाज के लिए टीएमएच व टाटा मोटर्स अस्पताल के साथ टाइअप करने का प्रयास किया जाये. इस क्रम में डॉ कुजूर व डॉ अखौरी मुख्यमंत्री रघुवर दास व टाटा स्टील के एमडी टीवी नरेंद्रन से मुलाकात कर टाइअप की दिशा में पहल करने का अनुरोध करेंगे.
अधिकांश बीमित कामगार प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से टाटा स्टील व टाटा मोटर्स कंपनी से जुड़े हुए हैं. इसलिए उनका हक बनता है कि उन्हें टीएमएच व टाटा मोटर्स अस्पताल में चिकित्सा की सुविधा मिले. शहर में बड़े व सब सुविधा से सम्पन्न अस्पताल की कमी है. बार-बार निविदा निकाले जाने के बावजूद इएसआइसी से टाइअप के लिए निजी अस्पताल आगे नहीं आ रहे हैं. फिर भी इसके लिए पहल करते हुए निविदा निकाली जायेगी.
सौ बेड का अस्पताल होगा : डॉ अखौरी
डॉ एएम अखौरी ने बताया कि वर्तमान में यहां 1.8 लाख बीमित कामगार हैं. उनके आश्रितों का शामिल कर लिया जाय, तो यह संख्या बढ़कर 10 लाख हो जाती है. इनके इलाज के लिए इएसआइसी अस्पताल में सिर्फ 50 बेड हैं, जबकि जरूरत 250 से 300 बेड की है. अगले साल से यह अस्पताल सौ बेड का हो जायेगा. इसका काम चल रहा है.
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