अंजन कर्मकार को साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार

Published by :Dashmat Soren
Published at :16 Jun 2024 12:42 AM (IST)
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साहित्य अकादमी नयी दिल्ली ने शनिवार को साहित्य अकादमी युवा- 2024 पुरस्कारों की घोषणा की. इसमें हिंदी और संताली समेत 24 भाषाओं के साहित्यकारों के नामों की घोषणा की गयी.

अंजन कर्मकार की तसवीर

साहित्य अकादमी नयी दिल्ली ने शनिवार को साहित्य अकादमी युवा- 2024 पुरस्कारों की घोषणा की. इसमें हिंदी और संताली समेत 24 भाषाओं के साहित्यकारों के नामों की घोषणा की गयी.

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जमशेदपुर:साहित्य अकादमी नयी दिल्ली ने शनिवार को साहित्य अकादमी युवा- 2024 पुरस्कारों की घोषणा की. इसमें हिंदी और संताली समेत 24 भाषाओं के साहित्यकारों के नामों की घोषणा की गयी. संताली भाषा के लिए पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले के हुड़ा प्रखंड के ढोलकाटा गांव निवासी 35 वर्षीय अंजन कर्मकार को साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार से सम्मानित किया गया. उन्हें उनकी कविता संग्रह ”जांगबाहा” के लिए यह पुरस्कार मिला है.

उम्मीद नहीं था कि पुरस्कार मिलेगा
अंजन कर्मकार ने बताया कि उसकी पुस्तक को साहित्य अकादमी नयी दिल्ली की ओर से पुरस्कृत किया जायेगा, इसकी उम्मीद नहीं थी. पुरस्कार मिलने की घोषणा के बाद उनके परिवार के सदस्य काफी गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि उनके पिताजी का नाम सागर कर्मकार और माता का नाम बालिका कर्मकार है.

बांकुड़ा यूनिवर्सिटी में संताली विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं अंजन
अंजन कर्मकार ने बताया कि वे वर्तमान में बांकुड़ा यूनिवर्सिटी में संताली विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं. वर्ष 2015 से बांकुड़ा यूनिवर्सिटी में संताली विभाग में अपनी सेवा दे रहे हैं. संताली उनकी मातृभाषा नहीं है, लेकिन उनके गांव में अधिकतर लोग संताली बोलते हैं, जिसकी वजह से संताली भाषा के प्रति उनका लगाव बढ़ा. जब कॉलेज में पहुंचे, तो संताली विषय को लेकर ही आगे बढ़ने की सोची. बीए में संताली विषय को ऑनर्स के रूप में चुना. उसके बाद संताली में ही एमए की पढ़ाई पूरी की. वे बर्द्धमान यूनिवर्सिटी के वर्ष 2012 के गोल्ड मेडलिस्ट हैं.

वर्ष 2009 में साहित्य सृजन की शुरुआत की
अंजन ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2009 में साहित्य सृजन की शुरुआत की. कई कहानियां और कविताएं लिखीं, जो पत्र-पत्रिकाओं में छपी. पत्र-पत्रिकाओं में कहानियां और कविताएं छपने से अभिरुचि बढ़ती चली गयी. फिर उन्होंने कहानियों और कविताओं को पुस्तक का रूप देना शुरू किया. अब तक उनकी चार पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिसमें जांगबाहा, रिंदी लोदोम, सांवहेद रेया हुनारतेतेद व सावंताली कवितार गति प्रगति प्रमुख है.

दुगाई टुडू को बाल साहित्य पुरस्कार
संताली भाषा के लिए पश्चिम बंगाल के बर्द्धमान टाउन निवासी 66 वर्षीय दुगाई टुडू को बाल साहित्य पुरस्कार से सम्मानित किया जायेगा. उन्हें यह पुरस्कार उनकी कविता संग्रह ”मिरू आडांग” के लिए मिला है. इस पुस्तक में 140 कविताएं हैं. दुगाई टुडू चितरंजन में रेलवे कर्मचारी थे. वर्ष 2018 में रेलवे से रिटायर हो चुके हैं. दुगाई टुडू ने बताया कि वे 1976 से साहित्य सृजन से जुड़े हुए हैं.अब तक 12 पुस्तकें लिखी हैं. जिसमें रोमोज रासा, सांवार, हूल सेंगेल, संगी माई, ऐंगा होपोना: नसीब, सिबिल सोड़ोम, दुलड़-दुपुलड़, रास्का रोमोज, हेंदे रिमिल, मिरू आडांग व दिशा रूवाड़ आदि प्रमुख हैं.

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