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कोयला खदान खुलने से इतिज गांव के ग्रामीणों को क्यों सता रहा डर, किसके उजड़ने की है आशंका, पढ़ें

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
Jharkhand news : कोयला खदान के लिए बड़कागांव का इतिज गांव हुआ अधिग्रहित. विशाल बरगद के पेड़ के उजड़ने को लेकर ग्रामीणों को सता रहा डर.
Jharkhand news : कोयला खदान के लिए बड़कागांव का इतिज गांव हुआ अधिग्रहित. विशाल बरगद के पेड़ के उजड़ने को लेकर ग्रामीणों को सता रहा डर.
प्रभात खबर.

Jharkhand news, Hazaribagh news : बड़कागांव (संजय सागर) : हजारीबाग जिला अंतर्गत बड़कागांव प्रखंड का एक गांव है इतिज. इस गांव में विशाल बरगद का पेड़ है. यह बरगद का पेड़ जंगल की तरह बड़े क्षेत्र में फैला है. पारंपरिक रूप से ग्रामीण यहां गवांट बाबा की पूजा भी करते हैं. लेकिन, क्षेत्र में कोयला खदान खुलने से ग्रामीणों को इसकी पहचान मिटने का डर सताने लगा है.

बड़कागांव से 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है इतीज गांव. 5 पीढ़ियों को गुजार देने वाला बरगद का पेड़ बड़कागांव प्रखंड का सबसे पुराना बरगद का पेड़ है. इसकी जड़ और तने कई हैं. मोटे तने पर क्षेत्र के बच्चे और महिलाएं झूला झूलती हैं. वहीं, इस विशाल बरगद पेड़ के नीचे ग्रामीण गवांट बाबा की पूजा अर्चना भी करते हैं. इस पेड़ की विशालता देखिए कि इस बरगद का पेड़ डाड़ी कला गांव में भी फैला हुआ है. वैसे बड़कागांव क्षेत्र में हर गांव में सैकड़ों बरगद का पेड़ है. इसलिए इस प्रखंड को बरगद का गांव भी कहा जाता है.

मालूम हो कि एनटीपीसी की त्रिवेणी सैनिक लिमिटेड द्वारा बड़कागांव प्रखंड स्थित चिरुडीह बरवाहीह गांव में कोयला खदान खोला गया है. इस खदान को लेकर इतिज गांव भी अधिग्रहित है. यहां कभी भी कोयला खदान खुल सकता है, जो कोयला खदान के आगोश में यहां का ऐतिहासिक बरगद का पेड़ समा जा सकता है. इसी बात का डर क्षेत्र के ग्रामीणों को हमेशा सता रही है.

इधर, कोयला खदान के कारण बरगद के पेड़ पर छाये संकट से ग्रामीण परेशान हैं. इटिज के ग्रामीण गणेश गंझू एवं राजू भोक्ता का कहना है कि इस बरगद का पेड़ के बारे में दादा-परदादा से भी सुनने को मिलती थी. यहां पारंपरिक रूप से गवांट बाबा की पूजा भी होती है. लेकिन, अफसोस है कि यहां कोयला खदान खुलने वाला है, जिससे इसकी पहचान मिट जायेगी.

ग्रामीणों ने इस ऐतिहासिक बरगद के पेड़ को बचाने की अपील सभी से कही है. ग्रामीणों के मुताबिक, गवांट पूजा होने से गांव में मुसीबत बहुत कम आती है. ग्रामीणों ने आशंका जतायी कि अगर कोयला खदान के कारण इस बरगद के पेड़ को काट दिया जाता है, तो गांव में किसी अनहोनी से इनकार नहीं किया जा सकता है और यही डर ग्रामीणों को हमेशा सता रही है.

Posted By : Samir Ranjan.

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