हाथी का सामना होने पर सीधे नहीं, तिरछा भागें
Author Vikash nath
Updated:
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जंगली हाथियों की लगातार आवाजाही को देखते हुए पूर्वी वन प्रमंडल के पदाधिकारी विकास कुमार उज्ज्वल ने ग्रामीणों से सतर्क रहने की अपील की है.
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हजारीबाग. जंगली हाथियों की लगातार आवाजाही को देखते हुए पूर्वी वन प्रमंडल के पदाधिकारी विकास कुमार उज्ज्वल ने ग्रामीणों से सतर्क रहने की अपील की है. उन्होंने कहा कि हाथी आने की सूचना मिलते ही तत्काल निकटवर्ती वन विभाग के कर्मचारियों को दें, ताकि समय रहते बचाव दल सक्रिय हो सके. जारी सुझाव में बताया है कि यदि अचानक हाथी से सामना हो जाये तो तुरंत उसे रास्ता छोड़ दें. पहाड़ी इलाके में सामना होने पर सीधे नहीं, बल्कि तिरछी दिशा में दौड़ें. दौड़ते समय कुछ दूरी पर गमछा, पगड़ी, टोपी या कोई वस्त्र फेंक देने से हाथी का ध्यान भटक सकता है. यदि हाथी गांव में प्रवेश कर जाए तो कम से कम आठ-दस लोग एकजुट होकर सुरक्षित दूरी बनाते हुए ढोल-नगाड़ा या टीन पीटकर उसे भगाने का प्रयास करें. लेकिन कभी भी हाथी के अत्यंत निकट न जायें. घरों के बाहर लकड़ी की आग में मिर्च जलाकर धुआं करना भी कारगर हो सकता है. वन विभाग ने चेताया है कि हाथी कान खड़ा कर सूंड ऊपर उठाकर आवाज करे तो यह हमले का संकेत है. ऐसे में तुरंत सुरक्षित स्थान पर चले जायें. हाथियों को पत्थर, जला टायर या मसाला फेंककर उकसाने से बचें. साथ ही क्षेत्र में हांड़ी या देसी शराब न बनाएं और न ही उसका भंडारण करें. जंगल में हाथी दिखने पर उस क्षेत्र में जलावन संग्रह के लिए न जाएं. श्रद्धा के नाम पर भी हाथी के पास जाने से परहेज करने की सलाह दी गयी है.
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