हजारीबाग में ओवरएज तीन शिक्षकों की नियुक्ति, आरटीआई में खुलासे के बाद डीईओ ने की पुष्टि

हजारीबाग का हाई स्कूल.
Hazaribagh News: हजारीबाग के एक हाई स्कूल में ओवरएज तीन शिक्षकों की नियुक्ति का खुलासा सूचना के अधिकार से हुआ है. जिला शिक्षा पदाधिकारी प्रवीण रंजन ने नियम उल्लंघन की पुष्टि की है. मामला 1997 से 2006 के बीच की नियुक्तियों से जुड़ा है. कार्रवाई के लिए सक्षम प्राधिकारी को पत्र भेजा गया है. पूरी खबर नीचे पढ़ें.
हजारीबाग से आरिफ की रिपोर्ट
Hazaribagh News: झारखंड के हजारीबाग के एक हाई स्कूल में शिक्षकों की नियुक्ति में नियमों की अनदेखी का मामला सामने आया है. सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त दस्तावेजों से खुलासा हुआ कि 1997 से 2006 के बीच चार शिक्षकों की नियुक्ति में आयु सीमा सहित अन्य नियमों का उल्लंघन किया गया. इनमें तीन सहायक शिक्षक और एक खेल शिक्षक शामिल हैं. इन शिक्षकों के नाम शौकत अली, तमसिल अख्तर (अब सेवानिवृत्त), अबुल मुजाहिद आरिफ औ मो मंसूर आलम है.
शिकायत से शुरू हुई जांच
हजारीबाग शहरी क्षेत्र के सुलेमान कॉलोनी निवासी शाहिद अख्तर और सेंट्रल मार्केट, सुभाष मार्ग के सेवानिवृत्त शिक्षक सैयद नाजिर हुसैन ने वर्ष 2024 में झारखंड हाई कोर्ट में शिकायत दायर की. अदालत के आदेश के बावजूद जब शिक्षा विभाग ने कार्रवाई नहीं की, तो शिकायतकर्ताओं ने अवमानना याचिका दाखिल की. इसके बाद उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल के क्षेत्रीय शिक्षा संयुक्त निदेशक ने जांच कर रिपोर्ट माध्यमिक शिक्षा निदेशक को भेजी.
जिला शिक्षा पदाधिकारी के आदेश से पुष्टि
वर्ष 2025 में जिला शिक्षा पदाधिकारी ने आदेश पत्र जारी कर शिकायतकर्ताओं को सूचित किया कि आरोप सही पाए गए हैं. जिला शिक्षा पदाधिकारी प्रवीण रंजन ने माना कि नियुक्ति प्रक्रिया में निर्धारित अधिकतम आयु सीमा 35 वर्ष से अधिक उम्र के तीन शिक्षकों की नियुक्ति की गई. आदेश पत्र में स्पष्ट कहा गया कि चयन प्रक्रिया पारदर्शी नहीं रही और नियमों की अनदेखी हुई.
शौकत अली की नियुक्ति पर सवाल
जांच में पाया गया कि शौकत अली की नियुक्ति नागरिक शास्त्र विषय में की गई, जबकि उस समय इतिहास और नागरिक शास्त्र मिलाकर केवल एक पद स्वीकृत था और उस पद पर पहले से एक शिक्षक कार्यरत थे. साथ ही, शौकत अली कंपार्टमेंटल मैट्रिक पास थे. नियुक्ति के समय उनके पिता स्व अली मुनिरूल होदा विद्यालय के प्रधानाध्यापक थे. इससे हितों के टकराव और पारिवारिक प्रभाव की आशंका जताई गई.
तमसिल अख्तर की आयु सीमा से अधिक नियुक्ति
तमसिल अख्तर, जो अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं, की नियुक्ति 22 जनवरी 2003 को हुई थी. उनकी जन्मतिथि 19 जुलाई 1963 है. नियुक्ति के समय उनकी आयु 39 वर्ष छह महीने थी, जो निर्धारित सीमा से अधिक थी. इसके बावजूद उन्हें सहायक शिक्षक के रूप में नियुक्त किया गया.
अबुल मुजाहिद आरिफ का मामला
अबुल मुजाहिद आरिफ की नियुक्ति 26 सितंबर 2006 को की गई. उनकी जन्मतिथि 15 जनवरी 1969 है. नियुक्ति के समय उनकी आयु 37 वर्ष आठ महीने थी. जांच में यह भी सामने आया कि नियुक्ति के समय उनके पिता स्कूल प्रबंधन समिति के कार्यकारी अध्यक्ष थे. इससे चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर प्रश्न उठे.
मो मंसूर आलम की नियुक्ति भी विवादित
मो मंसूर आलम की नियुक्ति 2 मई 2001 को हुई. उनकी जन्मतिथि 2 अप्रैल 1966 है, यानी नियुक्ति के समय वे 35 वर्ष एक महीने के थे. जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि नियुक्ति के समय प्रबंधन समिति में उनके रिश्तेदार पद पर कार्यरत थे. इससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े हुए.
1959 में हुई थी विद्यालय की स्थापना
उक्त हाई स्कूल की स्थापना वर्ष 1959 में हुई थी और यह क्षेत्र का एक प्रमुख शिक्षण संस्थान माना जाता है. ऐसे संस्थान में नियमों की अनदेखी से हुई नियुक्तियां शिक्षा व्यवस्था की साख पर असर डालती हैं.
कार्रवाई की सिफारिश
जिला शिक्षा पदाधिकारी ने अपने आदेश पत्र में स्पष्ट किया है कि ओवरएज तीन शिक्षकों की नियुक्ति नियम विरुद्ध पाई गई है. एक शिक्षक सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जबकि अन्य मामलों में सक्षम प्राधिकारी को आवश्यक कार्रवाई के लिए पत्र भेजा गया है.
पारदर्शिता और जवाबदेही की जरूरत
इस पूरे मामले ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. सूचना के अधिकार के माध्यम से हुआ यह खुलासा दर्शाता है कि शिकायत और कानूनी प्रक्रिया के जरिए अनियमितताओं को सामने लाया जा सकता है. अब विभागीय कार्रवाई और जवाबदेही पर सबकी नजर है.
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क्या कहते हैं डीईओ
इस मामले में हजारीबाग के डीईओ प्रवीण रंजन ने कहा कि शिक्षकों की नियुक्ति में पारदर्शी नहीं दिखा है. वहीं, नियम विरूद्ध ओवरऐज के तीन लोगों को शिक्षक बनाया गया है. इसमें एक तमसिल अख्तर सेवानिवृत्त हो गए हैं. शौकत अली कंपार्टमेंटल मैट्रिक पास हैं. इनकी नियुक्ति के समय इनके पिता स्कूल में प्रधानाध्यापक के पद पर कार्यरत थे. सभी आरोपियों पर कार्रवाई करने के लिए सक्षम अधिकारी को पत्र दिया गया है.
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लेखक के बारे में
By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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