बंद जलापूर्ति की गलत रिपोर्ट बेवसाइट पर डाली, बताया पीने योग्य पानी की सप्लाई

Updated at : 04 Sep 2024 5:10 PM (IST)
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बंद जलापूर्ति की गलत रिपोर्ट बेवसाइट पर डाली, बताया पीने योग्य पानी की सप्लाई

चुरचू जमडीहा जलमीनार से पिछले दो सालों से जलापूर्ति बंद है. जबकि पीएचइडी विभाग के जल जीवन मिशन पोर्टल पर जलापूर्ति की जांच लगातार दिखाई जा रही है.

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चुरचू जमडीहा जलमीनार से पिछले दो सालों से जलापूर्ति बंद

प्रतिनिधि, हजारीबाग

चुरचू जमडीहा जलमीनार से पिछले दो सालों से जलापूर्ति बंद है. जबकि पीएचइडी विभाग के जल जीवन मिशन पोर्टल पर जलापूर्ति की जांच लगातार दिखाई जा रही है. वेबसाइट के अनुसार उत्क्रमित मवि बोदरा में लगे नल की जांच 11 जून 2024 को की गयी है. इसी तरह बोदरा आंगनबाड़ी केंद्र में लगे नल से दस जुलाई 2024 को की गयी. जमडीहा प्राइमरी स्कूल में दस जुलाई को और मानसी देवी के घर का पानी 30 जून, आंगनबाड़ी केंद्र खुरंडी में 15 जून और गुड्डी के घर से दस अप्रैल को पानी की जांच की गयी. पोर्टल में इसकी रिपोर्ट सुरक्षित और पीने योग्य बताया है. जमडीहा के विश्वेवर करमाली ने बताया कि इस जलमीनार से पिछले दो सालों से पानी नहीं मिल रहा है. हमलोग चापानल और कुएं के पानी पर निर्भर हैं. विजय यादव ने कहा कि गर्मी के दिनों में इस क्षेत्र में पानी के लिए हाहाकार मच जाता है. दो साल से अधिक समय से जलमीनार बंद है.

आधी-अधूरी योजना के बाद भी दिया एनओसी

चुरचू जमडीहा जलमीनार आठ साल बाद भी लोगों की प्यास बुझाने में असफल है. इस योजना पर राज्य सरकार ने 6.26 करोड़ रुपये खर्च किया है. चुरचू पंचायत के छह गांवों तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने की योजना थी. इसमें बोदरा, चुरचू, जमडीहा, जोरदाग, खुरंडी और लासोढ़ गांव के लोग लाभान्वित होंगे. 959 घरों में शुद्ध पानी पहुंचाने का लक्ष्य थी. जबकि संवेदक ने 770 घरों को नल से जोड़ा है, लेकिन पानी दो साल से नहीं मिल रहा है. करीब 30 प्रतिशत घरों तक पानी का नल नहीं पहुंचा है. इसके बावजूद विभाग ने ऑपरेशन एंड मेंटनेंस की राशि खर्च कर संवेदक को एनओसी दे दिया है.

छह जले मोटर की मरम्मत के लिए नहीं है रुपये

मुखिया पूनम बेसरा और सहदेव किस्कू ने बताया कि पानी समिति गठित है. लोगों ने पानी समिति के पास जल शुल्क भी जमा किया है, लेकिन यह राशि जलमीनार का संचालन कर रहे मुंशी करीब 90 हजार रुपये लेकर भाग गया है. पानी समिति के पास 30 से 35 हजार रुपये बचे हैं. जलमीनार के छह मोटर जले हुए हैं. इतनी राशि से मोटर की मरम्मत नहीं हो पा रही है. पीएचइडी विभाग के सहायक अभियंता ने कहा कि योजना की पूरी जानकारी हमें नहीं है. बिना पानी चले जल की जांच रिपोर्ट पोर्टल पर कैसे डाला जा रहा है इसकी जांच की जायेगी.

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