सहिया दीदियों को छठ महापर्व में भी नहीं मिला मानदेय

सात माह से बकाया है मानदेय की राशि
चौपारण. लोक आस्था के महापर्व छठ में सहिया दीदियों को मानदेय की राशि नहीं मिली. जिससे उन्हें छठ करने में बड़ी परेशानी हो रही है. वहीं इससे स्वास्थ्य विभाग की बदहाली भी उजागर हो रही है. ग्रामीण क्षेत्रों में मातृ-शिशु स्वास्थ्य से लेकर टीकाकरण तक की जिम्मेदारी निभाने वाली सहिया दीदियों को सात माह से मानदेय नहीं मिला है. छठ जैसे बड़े पर्व में उन्हें सरकार से एक रुपये की सहायता तक नहीं मिली. बावजूद इसके वे अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी ईमानदारी से कर रही हैं.
26 पंचायत में 271 सहिया दीदी करतीं हैं काम
चौपारण के 26 पंचायतों में 271 सहिया दीदी स्वास्थ्य विभाग से जुड़कर आम आदमी तक स्वास्थ्य सेवा का लाभ पहुंचा रही हैं. सहिया मानदेय भुगतान के लिए सीएचसी से लेकर जिला प्रशासन के पास शिकायत कर चुकी हैं, लेकिन उन्हें हर बार यह कहकर टाल दिया जाता है कि फाइल प्रक्रिया में है. कई सहिया ने बताया कि वे गरीब परिवार से आती हैं. मानदेय से घर का खर्च चलाने में उन्हें सहूलियत मिलती है.
अप्रैल से बकाया है मानदेय की राशि
बीटीटी सबिता कुमारी ने बताया कि अप्रैल 2025 के बाद से सहिया दीदियों को मानदेय नहीं मिला है. छठ पर्व के दौरान भी सहिया को टीकाकरण, गर्भवती महिलाओं की देखभाल और स्वास्थ्य शिविरों में ड्यूटी करनी पड़ रही है. लेकिन शासन-प्रशासन की बेरुखी से उनमें आक्रोश है. एक सहिया दीदी ने कहा कि हम दिन-रात गांव में सेवा देते हैं, लेकिन सरकार हमारी मेहनत की कीमत तक नहीं दे पा रही है. सहिया स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ मानी जाती हैं, जिनके प्रयास से सुदूरवर्ती क्षेत्र तक स्वास्थ्य का लाभ पहुंच रहा है.
न मानदेय मिला, न ही बकाया भत्ता की राशि
छठ पर्व को लेकर सहिया दीदियों को पूर्ण विश्वास था कि बकाया मानदेय मिलेगा. सरकार द्वारा सहिया को प्रत्येक माह 2000 का मानदेय मिलता है. इसके अलावा उन्हें मामूली भत्ता मिलता है. लेकिन उन्हें न ही छठ में मानदेय मिला और न ही बकाया भत्ता की राशि मिली. इससे सहिया दीदियों में नाराजगी है.
क्या कहते हैं प्रभारी
सामुदायिक अस्पताल के चिकित्सा प्रभारी डीएन ठाकुर ने कहा कि उन्हें प्रभारी का पद संभाले हुए मात्र 10 दिन हुए हैं. उन्होंने आश्वस्त किया कि शीघ्र सहिया के बकाया मानदेय का भुगतान होगा.
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