पवित्र रमज़ान शुरू, बरसने लगी फजीलत

Updated at : 02 Mar 2025 7:37 PM (IST)
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पवित्र रमज़ान शुरू, बरसने लगी फजीलत

इबादतवाला रमजान का महीना शुरू हो गया. मुस्लिम अकीदतमंदों ने रविवार को पहला रोजा रखा व शाम को इफ्तार किया

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02बरही 1 मोल्लाना मौसरर्फूल कादरी 02बरही 2 कारी अब्दुल क़ैयुम 02 बरही 3 हाफ़िज़ कलीमुद्दीन बरही. इबादतवाला रमजान का महीना शुरू हो गया. मुस्लिम अकीदतमंदों ने रविवार को पहला रोजा रखा व शाम को इफ्तार किया. मस्जिदों में चांद दिखने के दिन से ही तरावीह की नमाज़ पढ़ी जाने लगी है. रमजान की फ़जीलतों के बारे में क्या कहते है बरही के मस्जिदों के इमाम. रोजा हमें गरीबों की भूख का अहसास दिलाता है – मौलाना मौसरर्फुल कादरी बरही जामा मस्जिद के इमाम मौलाना मोसर्रफुल कादरी ने बताया कि रमजान महीने में पवित्र कुरआन उतरा था. इस महीने में रोज़ा रखना व इबादत करना हर मोमिन के लिए फ़र्ज़ है. रोजा के कई फ़ज़ीलत है. पर सबसे बड़ी फ़ज़ीलत यह है कि रोज़ा हम सब को भूख का मतलब समझाता है. गरीबों की भूख क्या होती है, इसका अहसास दिलाता है. इससे रोजेदार अल्लाह की इबादत के साथ नेकी करने, गरीबों की भलाई करने के लिए प्रेरित होते हैं. रोजा झूठ, फरेब मक्कारी से बचाता है. भलाई के रास्ते पर ले जाता है. आदमी को बेहतर इंसान बनाता है. रमजान में ख़ुदा एक नेकी का 70 गुणा बदला देता है : कारी अब्दुल क़ैयुम बरही मक्का मस्जिद के इमाम कारी अब्दुल क़ैयूम ने बताया कि रमजान के मौके पर अल्लाह बेहद मेहरबान होता है. कोई रोजेदार इस माह में जब गरीबों की भलाई करता है, तो अल्लाह उसकी एक भलाई के बदले 70 गुणा ज्यादा सवाब देता है. अल्लाह फरमाता है कि जब बंदा रोजा रखता है तो उसका बदला मैं खुद हो जाया करता हूं. यानि रोजा रखकर बंदा अल्लाह की रज़ामंदी हासिल कर लेता है. नेकी यानी भलाई करके अल्लाह की बेहिसाब मेहरबानियां प्राप्त कर लेता है. रमजान का महीना मेहमान होता है : हाफ़िज़ कलीमुद्दीन कादरी बरही मदीना मस्जिद के इमाम हाफ़िज़ मो कलीमुद्दीन कादरी ने बताया कि रमज़ान का महीना मेहमान होता है. साल में एक बार आता है व ईद के चांद दिखते ही चला जाता है. इस मेहमान महीने का स्वागत इबादत व नेकियों से किया जाता है. इस महीने में रोजा के साथ साथ 30 दिन तक हर रोज बीस रकत तरावीह की नमाज़ पढ़ी जाती है. यह विशेष नमाज़ है जो रमजान महीने में ही पढ़ी जाती है, बाकी के ग्यारह महीनो में नहीं. यह कठिन नमाज़ जो इबादत के साथ साथ कसरत भी है. इबादत रूह को रोशन करता है और कसरत जिस्म को फायदा पहुंचता है. यह महीना हर तरह से फायदे वाला है.

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