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खाट पर शव लेकर पांच किमी पैदल चल गांव पहुंचे परिजन

Updated at : 04 Aug 2025 11:07 PM (IST)
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खाट पर शव लेकर पांच किमी पैदल चल गांव पहुंचे परिजन

गिधनिया गांव पहुंचने के लिए सड़क ही नहीं

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विष्णुगढ़. आज जब सरकारें अंतिम गांव तक विकास पहुंचाने का दावे कर रही हैं, वहीं हजारीबाग जिले के विष्णुगढ़ प्रखंड के गोविंदपुर पंचायत का गिधनिया गांव उन दावों की सच्चाई बयां कर रहा है. यह गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं सड़क, स्वास्थ्य सेवा और यातायात से वंचित है. बीमार, गर्भवती महिला या मृत व्यक्ति को गांव तक लाने का एकमात्र विकल्प खटिया ही है.तीन अगस्त को एक बार फिर गिधनिया गांव की बदहाली सामने आयी जब गांव के शनिचर मरांडी की मृत्यु के बाद उनके परिजनों को शव लाने के लिए खटिया का सहारा लेना पड़ा. ग्रामीणों ने बताया कि शव को करीब पांच किमी पैदल रास्ता तय कर खटिया पर लादकर गांव लाया गया. चार लोग बारी-बारी से खटिया ढोते रहे. परिवार और ग्रामीणों के चेहरे पर दुख के साथ-साथ सिस्टम के प्रति नाराजगी भी साफ झलक रही थी. शनिचर मरांडी की मौत कर्नाटक में काम करने के दौरान दो अगस्त को हो गयी थी. शव तीन अगस्त की शाम चार बजे एंबुलेंस से विष्णुगढ़ के चितरामो पहुंचा था.

न सड़क, न वाहन की सुविधा :

गिधनिया गांव मुख्य सड़क से कई किमी अंदर जंगल में बसा है. चितरामो, परसातरी गांव की वार्ड सदस्य हेमंती देवी ने बताया कि गांव तक पहुंचने के लिए पगडंडियों, कच्चे रास्तों व नदी से होकर गुजरना पड़ता है. बरसात के दिनों में यह रास्ता और भी दुर्गम हो जाता है. वाहन तो दूर, पैदल चलना भी जोखिम भरा हो जाता है. ग्रामीणों का कहना है कि आपात स्थिति में भी एंबुलेंस नहीं पहुंच पाती है.

हर बार वादा, पर कोई काम नहीं :

वार्ड सदस्य ने बताया कि हर चुनाव में नेता गांव तक सड़क लाने का वादा करते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही वे फिर कभी दिखायी नहीं देते. पिछले दिनों गांव के लोगों ने उपायुक्त से मिलकर सड़क निर्माण की मांग की थी. उपायुक्त ने इसे गंभीरता से लेते हुए सड़क निर्माण के लिए सर्वे को लेकर कुछ तकनीकी कर्मचारियों को गांव भेजा, लेकिन आगे कोई पहल नहीं हुई. गांव में किसी की तबीयत बिगड़ जाये, तो अस्पताल तक पहुंचने में ही जान जोखिम में पड़ जाती है. ग्रामीणों का कहना है कि कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को गांव की स्थिति से अवगत कराया गया, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं हुआ. आज भी लोग मूलभूत सुविधा के लिए संघर्ष कर रहे हैं.

क्या कहते हैं बीडीओ

बीडीओ अखिलेश कुमार ने कहा कि उन्हें इस तरह की घटना की जानकारी नहीं है. यदि ऐसा हुआ है, तो गांव के विकास के लिए सकारात्मक पहल की जायेगी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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SUNIL PRASAD

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By SUNIL PRASAD

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