छठ जोड़ता है संस्कार और मिट्टी से नाता
Published by : SUNIL PRASAD Updated At : 25 Oct 2025 9:57 PM
महापर्व में शामिल होने के लिए महानगरों से घर लौटे प्रवासियों ने कहा
हजारीबाग. महापर्व छठ को लेकर महानगरों में रह रहे प्रवासी भी अपने घर हजारीबाग लौट आये हैं. कार्यालयों की व्यस्त दिनचर्या के बीच व्रत की कठिन साधना निभाने का संकल्प लेकर अपनी जन्मभूमि लौटे हैं. लोगों ने कहा कि भले हम कहीं भी रहे, छठ हमें अपनी मिट्टी से जोड़ देता है. छठ अब सिर्फ धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि घर-परिवार, संस्कृति और समाज को जोड़ने वाला लोकपर्व है, जो हर साल प्रवासियों को अपनी मिट्टी की ओर लौटने को प्रेरित करता है.
छठ सिर्फ पूजा नहीं, परिवार से जुड़ने का अवसर भी
एलआइसी में एडीएम के पद पर कार्यरत रानी गुप्ता पश्चिम बंगाल के आसनसोल में पदस्थापित हैं. बताती हैं कि उनके पति भी आयकर विभाग में कार्यरत हैं. छठ का पर्व हमारे लिए सिर्फ पूजा नहीं, बल्कि परिवार से जुड़ने का अवसर है. इस मौके पर हम सब घर लौटते हैं. बचपन की यादें ताजा होती है. ठेकुआ बनाना, छठी माई के गीत गाना और अहले सुबह सूर्य देव को अर्घ देना आत्मिक शांति देता है. महानगरीय जीवन में फुर्सत नहीं मिलती, लेकिन छठ हमें अपनी जड़ों से जोड़ देता है.संस्कृति की ओर लौटने की प्रेरणा देता है महापर्व छठ
कांति मिश्रा और उनके पति रंजीत उपाध्याय हर वर्ष छठ के लिए अपनी मां के घर जयप्रकाश मार्ग, हजारीबाग आते हैं. बताते हैं कि यह पर्व हमें हमारी संस्कृति की ओर लौटने की प्रेरणा देता है. कांति मिश्रा कहती हैं कि छठ समाज को जोड़ने वाला पर्व है. इसमें ऊंच-नीच या जाति का कोई भेद नहीं रहता. सब मिलकर घाटों की सफाई करते हैं. प्रसाद बनाते हैं और एक-दूसरे के घर जाकर शुभकामनाएं देते हैं. यह पर्व स्वच्छता, पवित्रता और एकता का संदेश देता है.पूरा परिवार साथ हो, तो जीवन की थकावट मिट जाती है
नवाबगंज निवासी मुरारी मोहन गृह मंत्रालय में सहायक निदेशक के पद पर कार्यरत हैं. वह बताते हैं कि सालभर देश के विभिन्न हिस्सों में रहने के बावजूद छठ पर घर लौटना उनके लिए अनिवार्य है. वे कहते हैं कि यह पर्व सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि पारिवारिक मिलन का अवसर भी है. जब पूरा परिवार साथ होता है, तब जीवन की थकान मिट जाती है.महापर्व पर गांव लौटने से भर जाता है मन का खालीपन
रश्मि और उनके पति विश्वजीत भारतीय स्टेट बैंक में डीजीएम के पद पर मुंबई में कार्यरत हैं. फिर भी दीपावली और छठ पर हजारीबाग लौटना नहीं भूलते. वे कहते हैं कि बड़े शहरों की आधुनिकता में जो खालीपन है, वह छठ में गांव लौटने पर भर जाता है. यहां लौटकर परिवार, मित्रों और मोहल्ले के लोगों के साथ रहना एक अनोखा अनुभव है.
डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










