कोयलांचल में पानी की किल्लत, डेढ़ किलोमीटर दूर से पानी लाने को मजबूर लोग

Updated at : 22 May 2019 6:55 PM (IST)
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कोयलांचल में पानी की किल्लत, डेढ़ किलोमीटर दूर से पानी लाने को मजबूर लोग

।। संजय सागर ।। बड़कागांव : प्रखंड के कोयलांचल क्षेत्र स्थित डाड़ी कला एवं चेपा खुर्द में पानी की घोर किल्लत हो गई है . सुबह होते ही बच्चे और महिलाएं पानी की खोज में निकल पड़ते हैं. रमजान के दिनों एवं शादी विवाह में पानी की भारी किल्‍लत को लेकर परेशानी बढ़ गई है.डाड़ीकला […]

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।। संजय सागर ।।

बड़कागांव : प्रखंड के कोयलांचल क्षेत्र स्थित डाड़ी कला एवं चेपा खुर्द में पानी की घोर किल्लत हो गई है . सुबह होते ही बच्चे और महिलाएं पानी की खोज में निकल पड़ते हैं. रमजान के दिनों एवं शादी विवाह में पानी की भारी किल्‍लत को लेकर परेशानी बढ़ गई है.डाड़ीकला में जनसंख्या 3500 व चेपा खुर्द में 25 00 है.

चेपा खुर्द में ग्रामीणों ने बताया कि बड़ा आहार के पास बना जल मीनार निर्माण काल से ही बंद पड़ा हुआ है .जबकि 70 कुएं सूख चुके हैं. चार चापाकल खराब हैं. कुछ चापाकल हैं भी तो उससे पानी बहुत कम मात्रा में निकलता है. इन चापाकलों में पानी भरने को लेकर लोगों की लंबी लाइन लग जाती है. लाइन में अपनी बारी का इंतजार करने के लिए लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ता है.

* डेढ़ किलोमीटर दूर से पानी लाने को मजबूर है महिलाएं

डाड़ीकला गांव में चापाकल खराब हो जाने एवं कुएं सूख जाने के कारण महिलाएं व बच्चे डेढ़ किमी दूर सिंदुवारी गांव से हर दिन पानी लाने को मजबूर है.

* क्या कहना है महिलाओं का

डाड़ीकला के अंबा टोली तैबुन निसा,किताबुन ,आश्मीन ,अफसाना संजीदा ,साहिना, अंजुम, गुलसिता, नूरजहां ,किताब नून ,आशियाना ,तहारुण, रूबी प्रवीण, का कहना है कि हम सभी गांव के लोग पेयजल की समस्या और प्रदूषण से जूझ रहे हैं. इस क्षेत्र में कोलयरी खुलजाने के कारण कोयला खदान से रात दिन धुलकन उड़ते हैं.इस कारण धूलकन पानी में बैठ जाता है. जबकि हम लोग पानी डेढ़ किलोमीटर दूर से पानी लाते है. क्षेत्र की महिलाएं व पुरुषों ने प्रदूषण पर नियंत्रण करने डीप बोरिंग कराने एवं स्थानीय लोगों को रोजगार देने की मांग की है.

* ऊंट के मुंह में जीरा के समान पानी की आपूर्ति

पानी की समस्या डाड़ीकला ,चेपा खुर्द,मझली डाड़ी,कनकी डाड़ी,मंझली डाड़ी,उपरैली डाड़ में दिन पर दिन पानी की समस्या बढ़ती जा रही है. ग्रामीणों का कहना है कि एनटीपीसी द्वारा एक दिन छोड़कर एक दिन, एक-एक टैंकर से की जाती है. लेकिन वह घनी आबादी वाले क्षेत्रों में ऊंट के मुंह में जीरा के समान काम करता है.

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