36 वर्षों से बंद पड़ी है जलापूर्ति योजना
Updated at : 21 May 2019 2:08 AM (IST)
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33 लाख की जलमीनार भी निर्माण काल से है बंद बड़कागांव : बादम एक समय हर क्षेत्र में परिपूर्ण था. राजधानी होने के नाते यहां काफी चमक दमक थी. आज ऐसी परिस्थिति हो गयी है कि अब यह कर्णपुरा राज की राजधानी बादम पानी के लिए मोहताज है. यहां की अधिकांश लोग नदियों के सहारे […]
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33 लाख की जलमीनार भी निर्माण काल से है बंद
बड़कागांव : बादम एक समय हर क्षेत्र में परिपूर्ण था. राजधानी होने के नाते यहां काफी चमक दमक थी. आज ऐसी परिस्थिति हो गयी है कि अब यह कर्णपुरा राज की राजधानी बादम पानी के लिए मोहताज है. यहां की अधिकांश लोग नदियों के सहारे अपनी प्यास बुझाते है. बादम में पेयजलापूर्ति योजना 36 वर्षों से बंद पड़ी है. जहां एक ओर पेयजल आपूर्ति के लिए सरकार नित्य नयी योजनाएं बना रही है. इसे पूरा करने की हर तरह की कोशिश की जा रही है. प्रशासन व जनप्रतिनिधियों की लापरवाही से करोड़ों रुपये से बनी ग्रामीण जलापूर्ति योजना बादम का हाल जर्जर है. पीएचडी विभाग के तहत करोड़ों रुपये की लागत से बनी बादम-हरली पेयजल कूप व जलमीनार भी जर्जर है.
पेयजलापूर्ति लोगों का सपना बन कर रह गया: ग्रामीण पेयजलापूर्ति योजना 1983 में बनी थी. 1983 में बादम के बदमाही (हहारो) नदी तट पर राजा दलेल सिंह व मुकुंद सिंह के गढ़ परिसर में लाखों रुपये की लागत से पीएचइडी विभाग द्वारा पेयजल आपूर्ति योजना लेकर बहुत बड़ी पानी टंकी बनायी थी. इस योजना का शिलान्यास तत्कालीन विधायक रवींद्र कुमार ने किया था. तब क्षेत्र के लोगों में खुशी की लहर दौड़ी थी, जो खुशी हकीकत में 1986 ई0 में योजना पूर्ण होने के साथ बाद बदली. बादम गांव में पेयजल आपूर्ति शुरू की गयी, पर यह खुशी एक माह के अंदर समाप्त हो गयी. आम लोगों का सपना सपना ही रह गया.
इन गांवों को लाभ मिलता: इस योजना से बादम, बाबू पारा, राउत पारा, बाबू बलिया, अंबाजीत, महुंगाई कला, महुंगाईखुर्द, अंबाजीत, हरली गांव के लगभग 25 से 30 हजार ग्रामीणों तक पानी पहुंचाने की योजना थी. इसके तहत युक्त सभी गांवों के प्रत्येक गली मोहल्ले में लाखों रुपये खर्च कर पाइप बिछायी गयी थी. इसमें आज तक पानी घर तक पहुंचने का सपना अधूरा ही रह गया. पेयजलापूर्ति सिर्फ बादम में शुरू किया गया था. एक माह के अंदर जल आपूर्ति बंद कर दिया गया. इसके बाद मोटर तार ट्रांसफॉर्मर आदि एक-एक कर सभी सामान गायब हो गये. आज करोड़ों की योजना खंडहर में तब्दील हो गयी है.
क्या कहते है मुखिया: वर्तमान मुखिया दीपक दास ने बताया कि यह जलमीनार पूर्व मुखिया के कार्यकाल में बनी थी. जलमीनार के लिए अलग से ट्रांसफार्मर भी चाहिए था, जो नहीं मिला. पेटीदार लोगों को ₹40,000 बकाया है. ठेकेदार काम करवा कर भाग गया. जलमीनार का सबर फीवर मशीन भी गायब हो गयी है. ऐसी परिस्थिति में जलमीनार से पानी की आपूर्ति नहीं हो पायी. मुखिया ने बताया कि 36 साल से बंद पड़ी योजना दोबारा चालू हो सकती है. इसके लिए मैं विभाग को जानकारी दिया हूं.
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