नहीं खुल पाया सिविल कोर्ट में छह विशेष न्यायालय

Updated at : 31 Dec 2018 2:03 AM (IST)
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नहीं खुल पाया सिविल कोर्ट में छह विशेष न्यायालय

हजारीबाग : हजारीबाग सिविल कोर्ट में विभिन्न विशेष न्यायालयों, न्यायाधिकरण की स्थापना का आश्वासन मुख्यमंत्री रघुवर दास ने बार एसोसिएशन के शिष्टमंडल को दिया था, लेकिन 2018 में यह कार्य पूरा नहीं हुआ. हजारीबाग में उच्च न्यायालय का सर्किट बेंच स्थापित करने, सीबीआइ का विशेष न्यायालय, रेलवे का विशेष न्यायालय, कोल बियरिंग ट्रिब्यूनल, आयकर ट्रिब्यूनल […]

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हजारीबाग : हजारीबाग सिविल कोर्ट में विभिन्न विशेष न्यायालयों, न्यायाधिकरण की स्थापना का आश्वासन मुख्यमंत्री रघुवर दास ने बार एसोसिएशन के शिष्टमंडल को दिया था, लेकिन 2018 में यह कार्य पूरा नहीं हुआ. हजारीबाग में उच्च न्यायालय का सर्किट बेंच स्थापित करने, सीबीआइ का विशेष न्यायालय, रेलवे का विशेष न्यायालय, कोल बियरिंग ट्रिब्यूनल, आयकर ट्रिब्यूनल सरकार को स्थापित करना था.
बार एसोसिएशन के तत्कालीन महासचिव और वर्तमान में झारखंड बार काउंसिल के सदस्य अधिवक्ता राजकुमार राजू ने बताया कि हजारीबाग से रामगढ़ को अलग जिला बनाया गया. अधिवक्ताओं का आंदोलन हुआ. तब सरकार से विशेष न्यायालय गठन की मांग उठी थी. शिष्टमंडल ने मुख्यमंत्री और तत्कालीन विधि सचिव से मुलाकात कर मांगों को रखा था. तीन साल गुजरने के बाद भी आश्वासन पूरा नहीं हुआ.
बिजली लोड शेडिंग की स्थिति बरकरार
इस वर्ष भी हजारीबाग लोड शेडिंग से उबर नहीं पाया. हजारीबाग जिले को 210 मेगावाट बिजली की जरूरत है, जबकि इसकी विद्युत आपूर्ति 110 मेगावाट होती है. कमी को पाटने के लिए बिजली विभाग को ग्रामीण क्षेत्र में सुबह शाम परमानेंट लोड शेडिंग है. सरकार के द्वारा लोड शेडिंग को कम करने के लिए इस बार भी कोई ठोस पहल नहीं हुई.
पावर ग्रिड का काम चालू नहीं हो पाया
बिजली के लिए डीवीसी पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से सरकार ने पावर ग्रिड स्थापित करने की पहल शुरू की थी. तीन साल पहले डीवीसी के कमांड एरिया में रामगढ़, गिरिडीह, धनबाद, हजारीबाग, चतरा जिलों में सरकार से पावर ग्रिड बनाने की योजना है. हजारीबाग जिला में ग्रिड बनाने के लिए जमीन उपलब्ध करा दी गयी है, लेकिन ग्रिड बनाने का काम शुरू नहीं हो पाया.
अंडर केबल बिजली तार बिछाने का कार्य अधूरा
हजारीबाग शहर में पिछले एक साल से अंडर ग्राउंड केबलिंग का कार्य कई वर्ष पहले से प्रस्तावित है. आरएडीआरपी योजना के तहत शहर के व्यस्तम मार्गों में छह किमी अंडरग्राउंड केबल बिछाना है. यह काम शिवा प्रिंटर को दिया गया है. अगस्त में यह योजना शुरू हुई. डेढ़ से दो माह में इसे पूरा करने का लक्ष्य था. लेकिन कई जगहों पर सिर्फ गड्ढा खोद कर छोड़ दिया गया.
शहर में आरएडीआरपी योजना अधूरी
हजारीबाग में आरएडीआरपी योजना इस साल भी पूरी नहीं हुई. योजना के तहत जर्जर पोल, तार, ट्रांसफारमर और मीटर लगाने का काम होना था. संवेदकों ने मात्र पोल गाड़ कर और केबल झुला कर छोड़ दिया गया है. कनेक्शन बॉक्स से किसी भी उपभोक्ताओं को लाइन नहीं दी गयी. इस योजना को लागू होने से विभाग में होनेवाली लाइन लोस में कमी आती. वर्तमान समय में 40 से 45 प्रतिशत लाइन लोस है.
डीवीसी ग्रिड में नहीं लगा 50मवीएम का ट्रांसफार्मर
सिंदूर स्थित डीवीसी ग्रिड में 2018 में भी नहीं लग सका 50 एमवीए का अतिरिक्त पावर ट्रांसफारमर. यह ट्रांसफारमर दीनदयाल उपाध्याय योजना के तहत डीवीसी ग्रिड में लगना था. झारखंड विद्युत वितरण निगम के एमडी राहुल पुरवार ने भी अगस्त-2018 तक ट्रांसफार्मर लगाने का आश्वासन दिया था. ट्रांसफारमर लगने से हजारीबाग शहर, टाटीझरिया, दारू, इचाक, केरेडारी, बड़कागांव, टंडवा, प्रखंड में लोड शेडिंग की समस्याओं से निजात मिलता.
सिंदूर में पावर ट्रांसफार्मर के लिए टीआरडब्लू शुरू नहीं
पावर ट्रांसफारमर का रिपेयरिंग सेंटर नहीं चालू हुआ. हजारीबाग सिंदूर सब-स्टेशन परिसर में पावर ट्रांसफार्मर रिपेयरिंग सेंटर चालू करने की योजना थी. पिछले दो साल से यह योजना बिजली विभाग के प्राथमिकता सूची में है, 2018 में खत्म हो गया, लेकिन यह योजना चालू नहीं हो पायी. योजना के चालू हो जाने से पावर ट्रांसफार्मर का रिपेयरिंग हजारीबाग में संभव हो पाता.
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