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हजारीबाग : भारत में प्रथम टेस्ट ट्यूब बेबी के जनक थे, डॉ सुभाष मुखोपाध्याय को मिला सम्मान, प्रतिमा का हुआ अनावरण

Updated at : 10 Dec 2018 7:33 AM (IST)
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हजारीबाग : भारत में प्रथम टेस्ट ट्यूब बेबी के जनक थे, डॉ सुभाष मुखोपाध्याय को मिला सम्मान, प्रतिमा का हुआ अनावरण

हजारीबाग : भारत में प्रथम टेस्ट ट्यूब बेबी के जनक डॉ सुभाष मुखोपाध्याय को उनकी जन्मभूमि पर आदमकद प्रतिमा लगाकर शहरवासियों ने सम्मान दिया. हजारीबाग सदर अस्पताल परिसर में रविवार को डॉ सुभाष की प्रतिमा का अनावरण किया गया. अनावरण डॉ सुभाष के सहयोगी प्रो सुनित मुखर्जी, प्रथम टेस्ट ट्यूब बेबी दुर्गा के पिता प्रभात […]

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हजारीबाग : भारत में प्रथम टेस्ट ट्यूब बेबी के जनक डॉ सुभाष मुखोपाध्याय को उनकी जन्मभूमि पर आदमकद प्रतिमा लगाकर शहरवासियों ने सम्मान दिया. हजारीबाग सदर अस्पताल परिसर में रविवार को डॉ सुभाष की प्रतिमा का अनावरण किया गया.

अनावरण डॉ सुभाष के सहयोगी प्रो सुनित मुखर्जी, प्रथम टेस्ट ट्यूब बेबी दुर्गा के पिता प्रभात अग्रवाल, डीसी रविशंकर शुक्ला, जीजीएम पार्थो मजूमदार, प्रो सजल मुखर्जी व डॉ रजत चक्रवर्ती ने किया. इस मौके पर डॉ मुखोपाध्याय से जुड़ी दो पुस्तकों का विमाेचन भी किया गया.

इनमें प्रो सुनित मुखर्जी की बुक ए टेल ऑफ सुभाष नमिता सुनित और हजारीबाग जिला जनसंपर्क की ओर से डॉ मुखोपाध्याय की उपलब्धियों पर प्रकाशित हुआ है. अनावरण समारोह को संबोधित करते हुए प्रो सुनित मुखर्जी ने कहा कि डॉ सुभाष हमेशा नयी-नयी सोच के साथ लिखने, पढने और खोज करने में मगन रहते थे. वर्ष 1970 की बात है.

एक दिन कोलकाता के ही प्रभात अग्रवाल डॉ सुभाष से मिले और उन्होंने बताया कि उन्हें कोई संतान नहीं है. डॉ सुभाष ने उनकी समस्याएं गौर से सुनीं और कहा कि घबराओ मत, नयी विधि से मैं तुम्हारी पत्नी को मातृत्व सुख दिलाऊंगा. इसके बाद डॉ सुभाष ने मुझसे कहा कि एंब्रियो को फ्रीज करना है. इसमें तुम्हारी मदद की जरूरत पड़ सकती है.

दिन-रात शोध में जुड़े डॉ सुभाष की मेहनत रंग लायी. टेस्ट ट्यूब बेबी (आइवीएफ) के माध्यम से प्रभात अग्रवाल की पत्नी ने बच्ची दुर्गा को जन्म दिया. प्रो सुनित ने बताया कि सफलतापूर्वक टेस्ट ट्यूब बेबी को जन्म दिलाने के बाद डॉ सुभाष इस विधि की प्रमाणिकता विश्व भर में चाहते थे. लेकिन ऐसा उनके जीते जी नहीं हो पाया.

प्रो सुनीत ने अपने दोस्त डॉ सुभाष को सम्मान दिलाने का संकल्प के बारे में भी बताया. उन्होंने कहा कि वर्ष 1997 में कोलकाता में अधिकारिक रूप से प्रथम टेस्ट ट्यूब बेबी के जनक डॉ टीसी आनंद कुमार को व्याख्यान देने के लिए बुलाया. इस मौके पर डॉ टीसी आनंद को हम लोगों ने डॉ सुभाष द्वारा प्रथम टेस्ट ट्यूब बेबी दुर्गा के जन्म के बारे में बताया, उन्हें शोध पत्र दिखाया . डॉ आनंद देखकर आश्चर्यचकित रह गये. उन्होंने स्वीकार किया कि मैं नहीं डॉ सुभाष ही प्रथम टेस्ट ट्यूब बेबी के जनक हैं.

अनावरण समारोह में आइएमए के अध्यक्ष डॉ रजत चक्रवर्ती, अधिवक्ता विक्रम सेन, पूर्व प्राचार्य अजीत बनर्जी समेत काफी संख्या में शहरवासी व प्रबुद्ध लोग उपस्थित थे.

ईमानदारी से करें काम, सम्मान जरूर मिलेगा : डीसी रविशंकर शुक्ला ने कहा कि डॉ सुभाष मुखोपाध्याय की प्रतिमा को देखकर हजारीबागवासियों को सीखने का मौका मिलेगा. हर लोग ईमानदारी से काम करें, उनके कार्यों का सम्मान जरूर मिलेगा.

हजारीबाग की धरती ने दिया सम्मान : प्रो सजल मुखर्जी ने कहा कि डॉ सुभाष के साथ उस समय के चिकित्सकों ने ही सबसे बड़ा अन्याय किया. लेकिन आज हजारीबाग की धरती में उन्हें पूरा सम्मान मिल रहा है.

डॉ सुभाष मुखोपाध्याय के नाम पर हो हजारीबाग मेडिकल कॉलेज का नाम

प्रभात खबर के कार्यकारी संपादक अनुज कुमार सिन्हा ने कहा कि हजारीबाग मेडिकल कॉलेज का नाम डॉ सुभाष मुखोपाध्याय के नाम पर किया जाये.

हर नि:संतान के लिए है वरदान : एनटीपीसी के जीजीएम पार्थों मजूमदार ने कहा कि जिस घर में बच्चे की किलकारी सुनायी नहीं देती है, उस घर में भी डॉ सुभाष की विधि से अब बच्चे का जन्म हो रहा है. नि:संतान परिवार का सपना अब पूरा हो रहा है.

प्रभात खबर की मुहिम रंग लायी

डॉ सुभाष के कारण मैं और मेरी पत्नी जिंदा हैं : प्रभात

भारत में प्रथम टेस्ट ट्यूब बेबी दुर्गा के पिता प्रभात अग्रवाल ने कहा: जब मैंने डॉ सुभाष से मिल कर पत्नी का गर्भ नहीं ठहरने की बात बतायी, तब डॉ सुभाष ने कहा कि मैं तुम्हें एक बच्चा वैज्ञानिक विधि से दूंगा.

तुम पिता बन सकते हो, लेकिन एक परेशानी यह है कि शोध नया है. बच्चा नि:शक्त भी हो सकता है. हमने डॉ सुभाष से कहा: हमारे पास कुछ नहीं है. जो होगा ठीक होगा. आज मैं डॉ सुभाष के कारण पिता बना और जीवित हूं.

उन्होंने कहा कि डॉ सुभाष के शोध से कई महिलाओं को मां बनने का सुख मिला. डॉ सुभाष हमारे घर आकर दुर्गा को देखा करते थे. मेरी पत्नी शीला अग्रवाल को उन्होंने नया जीवन दिया. डॉ सुभाष की पत्नी नमिता पेशे से शिक्षिका थीं. डॉ सुभाष को सम्मान मिले, इसके लिए वह जीवन भर प्रत्यनशील रहीं.

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