पिंजरापोल गौशाला में संसाधनों की कमी, क्षमता 350 की, गायें हैं 590

Published at :12 Oct 2017 12:29 PM (IST)
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पिंजरापोल गौशाला में संसाधनों की कमी, क्षमता 350 की, गायें हैं 590

हजारीबाग: झारखंड में सबसे पुराना गौशाला में हजारीबाग के जुलजुल स्थित पिंजरापोल गौशाला का भी नाम है. यहां पर क्षमता से 65 प्रतिशत अधिक गाय को रखा गया है, जबकि संसाधनों की कमी है. गौशाला में 350 गाय रखने की क्षमता है. गौ रक्षा अभियान चलने के बाद यहां वर्तमान में यहां 590 गायें हैं. […]

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हजारीबाग: झारखंड में सबसे पुराना गौशाला में हजारीबाग के जुलजुल स्थित पिंजरापोल गौशाला का भी नाम है. यहां पर क्षमता से 65 प्रतिशत अधिक गाय को रखा गया है, जबकि संसाधनों की कमी है. गौशाला में 350 गाय रखने की क्षमता है. गौ रक्षा अभियान चलने के बाद यहां वर्तमान में यहां 590 गायें हैं. इन गायों को खिलाने के लिए सरकार से मिलनेवाला अनुदान अपर्याप्त है.
गायों को पर्याप्त पौष्टिक आहार नहीं मिल पा रहा है. झारखंड गौसेवा आयोग के नियमानुसार सरकार की ओर से 50 रुपया प्रतिदिन प्रति गाय पर खर्च किया जाना है, लेकिन 2015 के लंबित अनुदान की राशि 2017 में मिली है. दो साल के गौशाला विकास और निर्माण की राशि सरकार की फाइलों में ही बंद है. ऐसी स्थिति में गौशाला संचालन में परेशानी हो रही है, जबकि इन गायों की बेहतर व्यवस्था के लिए गौ सेवा आयोग का गठन किया गया. चिंता की बात यह है कि आयोग गठन के बाद एक साल की ही राशि मिली है.
चिकित्सा की पर्याप्त व्यवस्था नहीं: पिंजरापोल गौशाला में 590 गायों के स्वास्थ्य चिकित्सा की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है. गौशाला संचालन समिति अपने खर्च पर गायों का इलाज करवाती है. पशुपालन विभाग की ओर से गौशाला में चिकित्सा केंद्र बनाया गया है, लेकिन जांच के लिए चिकित्सक नहीं जाते. सप्ताह में मात्र दो दिन दो-दो घंटे के लिए जाते हैं.
चंदे की राशि से गौशाला संचालित
सचिव चंद्रप्रकाश जैन ने बताया कि पिंजरापोल गौशाला का संचालन शहर के व्यापारियों, गौरक्षकों एवं समाजसेवियों द्वारा दिये जानेवाले चंदे से होता है. गौशाला में 90 प्रतिशत गाय बूढ़ी हो गयी हैं. इससे दुग्ध उत्पादन भी नहीं होता है. जिला प्रशासन की ओर से जब्त मवेशियों को भी यहीं रखवाया जाता है.
जनप्रतिनिधियों का ध्यान नहीं
गौशाला के अध्यक्ष सुमेर सेठी ने बताया कि हजारीबाग के जनप्रतिनिधि भी गौशाला के प्रति ध्यान नहीं देते हैं. इसका कारण यह है कि गाय उन्हें वोट नहीं देती है. पड़ोसी जिला गिरिडीह एवं तिलैया गौशाला में वहां के प्रतिनिधि गायों के चारे व अन्य सुविधाओं की व्यवस्था करते हैं. अपने मद से सहयोग करते हैं.
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