रिंकू सिंह बने केकेआर के संकटमोचक, कहा-मैं बस टीम को मुश्किल से निकालने के लिए खेलता हूं

Published by : Rajneesh Anand Updated At : 27 Apr 2026 4:15 PM

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केकेआर की जीत के हीरो रिंकू सिंह

KKR vs LSG : आईपीएल सीजन 19 में रविवार को केकेआर और लखनऊ के बीच पहला सुपर ओवर मैच खेला गया. सुपर ओवर में जीत केकेआर को मिली. केकेआर ने पहले खेलते हुए 20 ओवर में 7 विकेट के नुकसान पर 155 रन बनाए थे, जिसके जवाब में लखनऊ की टीम 20 ओवर में 8 विकेट के नुकसान पर 155 रन बना पाई और मैच टाई हो गया.

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KKR vs LSG : लखनऊ के इकाना स्टेडियम में रविवार को खेले गए मैच में लखनऊ की टीम सुपर ओवर में फेल हो गई, जिसकी वजह से उन्हें उन्हें टाई हो चुके मैच को खोना पड़ा. इस मैच के हीरो रहे केकेआर के रिंकू सिंह. रिंकू ने 83 नाॅट आउट खेला और टीम को जीत तक लेकर गए. रिंकू ने सुपर ओवर में एक बेहतरीन कैच लिया और टीम के लिए विनिंग शाॅट भी लगाया.

केकेआर की जीत के हीरो रिंकू सिंह

लखनऊ सुपर जायंट्‌स के खिलाफ रिंकू सिंह केकेआर के लिए संकटमोचक बनकर आए. इस लो स्कोरिंग मैच के सुपर ओवर में जाने के बाद रिंकू ने टीम को जीत दिलाई. मैच के बाद जब उनसे पूछा गया कि क्या उनका नाम रिंकू सिंह के बजाय रिंकू संकटमोचक कर देना चाहिए, तो रिंकू ने जवाब दिया-नहीं रिंकू ठीक है. मैं जब भी मुश्किल हालात में बैटिंग के लिए जाता हूं तो मेरा फोकस इस बात पर रहता है कि सिचुएशन को कैसे कंट्रोल किया जाए. मैंने अपनी टीम के लिए बस वही किया.खेलते वक्त मैं सोचता हूं कि स्ट्राइक कैसे रोटेट करनी है? सिंगल्स और डबल्स कैसे लेने हैं और मैं कहां बाउंड्रीज लगा सकता हूं. मेरा मकसद हमेशा गेम को आखिर तक ले जाना होता है.

सुपर ओवर में रिंकू ने लिया सुपर कैच

सुपर ओवर में लिए गए शानदार कैच के बारे में बात करते हुए प्लेयर ऑफ द मैच रिंकू सिंह ने कहा कि मुझे बचपन से ही फील्डिंग पसंद रही है. मैं नैचुरली फिट हूं, इसलिए मैं तेज दौड़ सकता हूं और ग्राउंड को अच्छे से कवर कर सकता हूं. मुझे बस फील्डिंग बहुत पसंद है. सच कहूं तो, मैं उस कैच के लिए तैयार नहीं था. मुझे लगा कि बॉल कहीं और जाएगी, लेकिन अचानक वह मेरी तरफ आई और मैं उसे कैच कर पाया और टीम को इसका फायदा मिला.

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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