अब मालाबार गोल्ड एंड डायमंड्स के लिए प्रचार करेंगे महेंद्र सिंह धोनी

एमएस धोनी
भारतीय क्रिकेट के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी अब मालाबार गोल्ड एंड डायमंड्स के नए ब्रांड एंबेसडर नियुक्त किए गए हैं. कंपनी ने धोनी की ईमानदारी और भरोसे को कंपनी के मूल्यों से जोड़ा है.
भारतीय क्रिकेट के कैप्टन कूल महेंद्र सिंह धोनी भले ही अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले चुके हों, लेकिन उनकी लोकप्रियता में कोई कमी नहीं आई है. इसका ताजा प्रमाण है मालाबार गोल्ड एंड डायमंड्स द्वारा उन्हें अपना ब्रांड एंबेसडर बनाया जाना. मालाबार गोल्ड एंड डायमंड्स, विविध कारोबार वाले भारतीय समूह मलाबार ग्रुप की प्रमुख कंपनी है.
इसकी शुरुआत 1993 में की गई थी. कंपनी के 14 देशों में 450 से अधिक शोरूम हैं. मालाबार समूह के चेयरमैन एमपी अहमद ने मंगलवार को जारी बयान में कहा आज उपभोक्ता जिस भी ब्रांड का चयन करता है उससे काफी अपेक्षाएं रखता है. उत्कृष्ट उत्पादों के साथ वे हर खरीदारी में पारदर्शिता, प्रामाणिकता और भरोसा भी चाहते हैं.
उन्होंने कहा कि धोनी ने अपनी ईमानदारी, अनुशासन और निरंतरता के दम पर करोड़ों लोगों का सम्मान और विश्वास अर्जित किया है. ये खूबियां कंपनी के मूल्यों से भी मेल खाते हैं. इसी वजह से उन्हें ब्रांड एम्बैसडर बनाया गया है.
धोनी ने कहा, अपने पूरे करियर में मेरा यही मानना रहा है कि काम और निरंतरता के दम पर ही भरोसा अर्जित किया जाता है. यही बात मालाबार गोल्ड एंड डायमंड्स के साथ मेरे इस जुड़ाव को सार्थक बनाती है. धोनी ने कहा कि वह लोगों को आभूषण खरीदने के बारे में सोच-समझकर फैसला लेने के लिए प्रोत्साहित करने में मालाबार गोल्ड एंड डायमंड्स का सहयोग करेंगे.
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By रजनीश आनंद
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रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.
आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.
रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.
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