पिता की बीमारी, आंखों में आंसू और एक वादा... ऐसे टीम इंडिया तक पहुंचे सारांश जैन

Updated:
विज्ञापन

सारांश जैन (फोटो- सोशल मीडिया)

WhatsApp चैनल से जुड़ेंगूगल पर प्रभात खबर चुनें

मध्य प्रदेश के ऑलराउंडर सारांश जैन का भारतीय टेस्ट टीम में चयन एक भावुक संघर्ष की कहानी है. कैंसर से जूझ रहे पिता के वादे और प्रेरणा ने उन्हें यहां तक पहुंचाया है. यह सिर्फ एक खिलाड़ी की जीत नहीं, बल्कि अटूट हौसले की मिसाल है.

विज्ञापन

भारतीय टेस्ट टीम में पहली बार जगह बनाने वाले मध्य प्रदेश के ऑलराउंडर सारांश जैन की सफलता के पीछे संघर्ष, धैर्य और पिता की प्रेरणा की एक भावुक कहानी छिपी है. करीब 12 साल पहले कैंसर से जूझ रहे उनके पिता सुबोध जैन ने एक कागज पर लिखा एक संदेश ही सारांश के लिए सबसे बड़ी ताकत बन गया था.

विज्ञापन

यह कहानी 2014 की है, जब 21 वर्षीय सारांश जैन इंदौर के एक क्लब की टीम के साथ ऑस्ट्रेलिया दौरे पर थे. उस दौरान वह जब भी घर फोन कर अपने पिता के बारे में पूछते, तो मां या बड़े भाई यही कहते कि वह व्यस्त हैं. दरअसल, उनके पिता मुंह के कैंसर से जूझ रहे थे और परिवार ने यह बात उनसे छिपाकर रखी थी.

कागज पर लिखे एक मैसेज ने बदल दी जिंदगी

जब सारांश घर लौटे, तब उन्हें पिता की बीमारी का पता चला. सर्जरी के बाद सुबोध जैन बोल भी नहीं पा रहे थे. बेटे को सामने देखकर उन्होंने कागज पर सिर्फ एक लाइन लिखी, "बेटा, तू जितना अच्छा करेगा, मैं उतनी जल्दी ठीक हो जाऊंगा." यही संदेश सारांश की जिंदगी का सबसे बड़ा प्रेरणास्रोत बन गया.

हनुमान मंदिर में मिली टीम इंडिया की खुशखबरी

मंगलवार को जब भारतीय चयनकर्ताओं ने टेस्ट टीम का ऐलान किया, उस समय सारांश हमेशा की तरह हनुमान मंदिर में पूजा कर रहे थे. मंदिर से बाहर आने के बाद उन्हें अपने चयन की खबर मिली. दूसरी ओर, उनके पिता ने कहा कि आज उनका अधूरा सपना बेटे ने पूरा कर दिया.

मैं मध्य प्रदेश के लिए रणजी ट्रॉफी खेला, लेकिन भारत के लिए खेलने का सपना पूरा नहीं कर सका. आज मेरे बेटे ने वह सपना साकार कर दिया.

पिता ही थे पहले कोच

मध्य प्रदेश के पूर्व ऑफ स्पिनर सुबोध जैन ने ही सारांश को क्रिकेट की शुरुआती ट्रेनिंग दी. बाद में सारांश ने रविचंद्रन अश्विन के वीडियो देखकर अपनी गेंदबाजी को और निखारा, लेकिन उनके पहले गुरु हमेशा उनके पिता ही रहे. सुबोध ने बताया कि उन्हें अंडर-12 स्तर से ही महसूस हो गया था कि सारांश में कुछ अलग बात है. उन्होंने कहा कि रजत पाटीदार और सारांश 11 साल की उम्र से साथ क्रिकेट खेलते आए हैं और तभी से लोग सारांश की प्रतिभा की तारीफ करते थे.

आसान नहीं रहा टीम इंडिया तक का सफर

सारांश ने रणजी ट्रॉफी के पदार्पण मैच में तमिलनाडु के खिलाफ पांच विकेट लेकर शानदार शुरुआत की थी, लेकिन इसके बाद उन्हें टीम से बाहर भी होना पड़ा. हालांकि तत्कालीन मध्य प्रदेश कोच चंद्रकांत पंडित ने उनकी प्रतिभा पर भरोसा बनाए रखा.

इसके बाद सारांश ने रणजी ट्रॉफी में मध्य प्रदेश को चैंपियन बनाने में बल्ले और गेंद दोनों से अहम योगदान दिया. दलीप ट्रॉफी के दो मैचों में उन्होंने 16 विकेट लिए और ईरानी कप में भी शानदार प्रदर्शन किया. लगातार बेहतरीन प्रदर्शन का इनाम उन्हें अब भारतीय टेस्ट टीम में चयन के रूप में मिला है.

पिता की आखिरी सलाह

सुबोध जैन ने बेटे को सिर्फ एक सलाह दी है, "अगर मौका मिले तो बिंदास खेलना, किसी तरह का दबाव मत लेना." अब जब सारांश जैन भारतीय टेस्ट टीम का हिस्सा बन चुके हैं, तो उनके सामने सिर्फ अपना सपना ही नहीं, बल्कि अपने पिता के उस भरोसे को भी कायम रखने की चुनौती होगी, जिसने मुश्किल दौर में उन्हें कभी हार नहीं मानने दी.

ये भी पढ़ें: आखिर कौन हैं सारांश जैन, जिन्हें पहली बार टीम इंडिया में मौका मिला ?


विज्ञापन

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola