पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन के डिवीजन कार्यालय में सन्नाटा, संवेदकों के पास काम नहीं, परेशान

Published at :20 Jul 2017 12:10 PM (IST)
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पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन के डिवीजन कार्यालय में सन्नाटा, संवेदकों के पास काम नहीं, परेशान

हजारीबाग: आरक्षी स्कूल स्थित झारखंड पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड डिवीजन कार्यालय इन दिनों वीरान है. इसका कारण वित्तीय वर्ष 2017-18 के लिए अब-तक कार्यालय को फंड उपलब्ध नहीं कराना बताया जाता है. फंड नहीं मिलने के कारण यहां 15 से 20 की संख्या में रजिस्टर्ड संवेदकों को काम नहीं मिल पाया. स्थिति यह है कि […]

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हजारीबाग: आरक्षी स्कूल स्थित झारखंड पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड डिवीजन कार्यालय इन दिनों वीरान है. इसका कारण वित्तीय वर्ष 2017-18 के लिए अब-तक कार्यालय को फंड उपलब्ध नहीं कराना बताया जाता है. फंड नहीं मिलने के कारण यहां 15 से 20 की संख्या में रजिस्टर्ड संवेदकों को काम नहीं मिल पाया. स्थिति यह है कि संवेदकों को काम नहीं मिलने के कारण उनकी आर्थिक स्थिति खराब होती चली जा रही है.
पुलिस विभाग से जुड़ा कार्य होता है: झारखंड पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड डिवीजन कार्यालय से मुख्य रूप से पुलिस विभाग से संबंधित विकास का कार्य होता है. प्रमंडल के सभी सात जिलों में नया थाना भवन निर्माण कार्य, पुलिस के लिए क्वार्टर का निर्माण, आरक्षी स्कूल, रोड, सामुदायिक भवन, पुलिस केंद्र का निर्माण सहित पुलिस विभाग के पुराने क्वार्टर, कार्यालय आदि का रिपेयरिंग का काम कराया जाता है. इसके लिए डिवीजन कार्यालय से निविदा निकाली जाती है.
डिवीजन कार्यालय के अधीन सात जिला : हजारीबाग में 01 जुलाई 2002 से झारखंड पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड डिवीजन कार्यालय कार्य कर रहा है. इसके अधीन प्रमंडल के सभी सात जिले हजारीबाग, चतरा, कोडरमा, गिरिडीह, बोकारो, धनबाद एवं रामगढ़ को रखा गया है. यहां बैठे कार्यापालक अभियंता सभी जिले के कार्य को संचालित करते हैं. विकास कार्य की देखरेख के लिए सरकार ने अभियंताओं व कर्मियों को नियुक्त किया है.
केस स्टडी एक : पदमा प्रखंड निवासी संवेदक किशोरी प्रसाद मेहता ने बताया कि लंबे समय से उन्हें ठेका का कार्य नहीं मिला है. विभाग में रजिस्टर्ड रहने के लिए संवेदक को सरकार से निर्धारित कई मापदंडों का पालन करना होता है. इसके लिए सरकार को तरह-तरह का शुल्क देना पड़ता है. इस वित्तीय वर्ष में अब-तक कार्यालय ने कोई निविदा नहीं निकाला है. ठेका नहीं मिलने से आर्थिक स्थिति बिगड़ गयी है.
सरकार एवं विभाग के दिशा-निर्देश पर कार्य किया जा रहा है. राज्य स्तर पर 100 से अधिक संवेदक विभाग में रजिस्टर्ड हैं.
हांसदा सुशील कुमार, कार्यपालक अभियंता
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