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गुमला जिले में उज्ज्वला योजना की देखिए हकीकत, कोने में रखा है सिलिंडर, महिलाएं लकड़ी के चूल्हे पर बना रही खाना

Jharkhand News (गुमला) : झारखंड के गुमला जिले में उज्ज्वला योजना अब बीते कल की कहानी हो गयी है. जबतक फ्री था, महिलाओं ने रसोई गैस से खाना पकाया, लेकिन अब चूल्हा फूंक रही है. रसोई गैस सिलिंडर घर के कोने में रखा हुआ है. सिलिंडर का उपयोग चावल की बोरी, सूप, टोकरी या घर की अन्य जरूरत का समान रखने में आ रहा है. चूल्हा जंग खा रहा है. अब, महिलाएं मिट्टी से बने चूल्हा में खाना पका रही है. लकड़ी जलाने के लिए चूल्हा फूंक रही है. यह, हकीकत उज्ज्वला योजना की है. योजना के तहत गरीब परिवारों को गैस सिलिंडर व चूल्हा मिला था.

Jharkhand News (दुर्जय पासवान, गुमला) : झारखंड के गुमला जिले में उज्ज्वला योजना अब बीते कल की कहानी हो गयी है. जबतक फ्री था, महिलाओं ने रसोई गैस से खाना पकाया, लेकिन अब चूल्हा फूंक रही है. रसोई गैस सिलिंडर घर के कोने में रखा हुआ है. सिलिंडर का उपयोग चावल की बोरी, सूप, टोकरी या घर की अन्य जरूरत का समान रखने में आ रहा है. चूल्हा जंग खा रहा है. अब, महिलाएं मिट्टी से बने चूल्हा में खाना पका रही है. लकड़ी जलाने के लिए चूल्हा फूंक रही है. यह, हकीकत उज्ज्वला योजना की है. योजना के तहत गरीब परिवारों को गैस सिलिंडर व चूल्हा मिला था.

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गुमला जिले में उज्ज्वला योजना की देखिए हकीकत, कोने में रखा है सिलिंडर, महिलाएं लकड़ी के चूल्हे पर बना रही खाना 3

आपूर्ति विभाग के अनुसार, गुमला जिले में उज्ज्वला योजना के करीब 86 हजार लाभुक हैं, लेकिन वर्तमान में 90 प्रतिशत लोगों ने उज्ज्वला योजना के सिलिंडर का उपयोग करना बंद कर दिया है. मात्र 10 प्रतिशत ही लोग रसोई गैस का उपयोग कर रहे हैं. उसमें भी जिनके पास पैसा है. वे ही रसोई गैस खरीद रहे हैं. गरीबों ने तो सिलिंडर व चूल्हा को घर के कोने या फिर कबाड़ खाने में रख दिया है. प्रभात खबर ने उज्ज्वला योजना के तहत मिले रसोई गैस सिलिंडर के उपयोग की पड़ताल की. गांवों में तो अब रसोई गैस की जगह लकड़ी के चूल्हा का उपयोग हो रहा है.

सिसई : पेड़ की सूखी पत्ती व टहनी को जला कर बनाते हैं खाना

सिसई प्रखंड के सकरौली गांव निवासी गायत्री देवी ने कहा कि उसे सरकार द्वारा रसोई गैस सिलिंडर मिला है. उसके पति मजदूरी का काम कर घर चलाते हैं. योजना का लाभ मिलने के बाद एक बार गैस भराये थे. महंगाई के कारण गैस नहीं भरा पाते हैं. अब पेड़ की सूखी पत्ती और टहनियाों को जमा कर चूल्हा जलाते हैं. तब घर का खाना बनता है.

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भरनो प्रखंड के डोम्बा गांव की फुलमनी देवी ने कहा कि उज्जवला योजना के तहत निःशुल्क गैस चूल्हा मिला था. उसके बाद दो बार गैस भरवाये थे, लेकिन अब गैस का दाम बढ़ने से गैस भरना बंद कर दिये. लकड़ी में ही खाना बनाने में सस्ता पड़ता है. हमारे पास इतना पैसा नहीं है कि हर महीने रसोईगैस खरीद सके.

घाघरा : कोने में रखा हुआ है गैस सिलिंडर

घाघरा प्रखंड के चमरा लोहरा के घर के कोने में सिलिंडर रखा हुआ है. उसपर चावल का बोरा रखने का काम आ रहा है. चमरा ने कहा कि जब से सिलिंडर मिला है. तब से सिर्फ एक बार गैस भराये थे. पैसे की अभाव में नहीं भरा रहे हैं. लकड़ी के चूल्हे में खाना बनाते हैं.

पालकोट : सिलिंडर फांक रहा धूल, लकड़ी से बनाते हैं खाना

पालकोट प्रखंड के डहूडांड़ नवाटोली गांव के पोढ़ा उरांव ने बताया कि उज्ज्वला योजना के तहत नि:शुल्क गैस कनेक्शन मिला था. मिलने के बाद दो बार रिफिल करायें. लेकिन, अभी तो गैस का दाम भी बढ़ गया है. गरीब होने के कारण रसोई गैस भराने का पैसा जुगाड़ नहीं हो पा रहा है. यही कारण है कि सिलिंडर घर में धूल फांक रहा है और लकड़ी से खाना बनाने को मजबूर हैं.

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जारी गांव की बिछनी देवी ने कहा कि जब से हमें उज्ज्वला योजना से निःशुल्क गैस मिला था. उस समय भरा गैस का प्रयोग किये. फिर दोबारा गैस नहीं भराये हैं. उन्होंने कहा गैस का दाम अधिक है. जितना गैस का दाम है. उससे तो मैं महीना भर का घर का खर्चा निकल जायेगा. इसलिए मैं जंगल से लकड़ी लाकर खाना बनाने का काम करती हूं.

डुमरी : घर का खर्चा पूरा नहीं होता, गैस कहां से भराये

डुमरी की मीना देवी ने बताया कि उज्ज्वल योजना के तहत गैस सिलिंडर मिला है. परिवार में 6 लोग हैं. पति कमाते थे तो सिलिंडर भरवाते थे, लेकिन लॉकडाउन में काम-धाम बंद हो गया है. घर खर्चा के लिए पैसा नहीं मिल रहा है. इसलिए सिलिंडर नहीं भरवा रहे हैं. गैस सिलिंडर बेकार पड़ा हुआ है.

बिशुनपुर : सरकार सब्सिडी में सिलिंडर उपलब्ध कराये

बिशुनपुर की सुमिता उरांव कहती है कि मेरे घर में 8 लोग हैं. हमलोग गरीब हैं. सरकार ने गैस सिलिंडर तो दिया, लेकिन महंगाई इतनी बढ़ गयी है कि हम सिलिंडर का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं. क्योंकि जितने में हम सिलिंडर लेंगे. उतने पैसों में 15 दिन हम लोगों का घर का सारा खर्च निकल जायेगा. सरकार हम लोगों के सिलिंडर सब्सिडी में दे. ताकि हम लोग सिलिंडर का प्रयोग कर सके.

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भारत गैस एजेंसी के सुजीत कुमार ने कहा कि हमारे एजेंसी से 6000 उज्ज्वला योजना के लाभुक जुड़े हैं. जबतक रसोई गैस फ्री मिला. लोगों ने रसोई गैस उपयोग किया. अब मात्र डेढ़-दो सौ लोग ही महीने में रसोई गैस लेने आते हैं. वहीं, मां शेरावाली इंडेन गैस एजेंसी के संचालक अशोक आनंद ने कहा कि हमारे एजेंसी से करीब 4000 लाभुक जुड़े हुए थे. जिसमें एक से डेढ़ सौ लोग ही महीने में रसोई गैस ले रहे हैं. बाकी लोगों ने महंगाई के कारण रसोई गैस भराना बंद कर दिया है.

Posted By : Samir Ranjan.

Prabhat Khabar Digital Desk
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