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गुमला में 485 हेक्टेयर भूमि पर होगा पौधरोपण, वन प्रमंडल ने स्थल चयन किया

Updated at : 27 Mar 2023 11:45 PM (IST)
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गुमला में 485 हेक्टेयर भूमि पर होगा पौधरोपण, वन प्रमंडल ने स्थल चयन किया

जिला अंतर्गत अधिसूचित वन भूमि पर वृक्षारोपण कराने की तैयारी चल रही है. पौधारोपण का कार्य वन प्रमंडल गुमला से होगा. इसके तहत वन प्रमंडल ने जिले भर के अधिसूचित वन भूमि पर स्थलों का चयन कर लिया है.

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गुमला जिला अंतर्गत अधिसूचित वन भूमि पर वृक्षारोपण कराने की तैयारी चल रही है. पौधारोपण का कार्य वन प्रमंडल गुमला से होगा. वन प्रमंडल द्वारा अवकृष्ट वनों का पुनर्वास, वन भूमि पर वृक्षारोपण योजना, जल संरक्षण सह वृक्षारोपण आदि योजनाओं के माध्यम से वृक्षारोपण कराया जाना है. इसके तहत वन प्रमंडल ने जिले भर के अधिसूचित वन भूमि पर स्थलों का चयन कर लिया है.

वृक्षारोपण से कुल 485 हेक्टेयर भूमि को अच्छादित किया जायेगा. जिसमें लगभग 4.65 लाख पौधरोपण किया जायेगा. अवकृष्ट वनों का पुनर्वास योजना के तहत गुमला वन क्षेत्र के भुरसो जंगल में 30 हेक्टेयर भूमि पर 30 हजार वृक्षारोपण, सेमरा में हेक्टेयर भूमि पर 30 हजार, मुर्गू जंगल में 20 हेक्टेयर भूमि पर 20 हजार, खेर्रा जंगल में 50 हेक्टेयर भूमि पर 50 हजार व कुरूमगढ़ वन क्षेत्र के उपरजोरी जंगल में 20 हेक्टेयर भूमि पर 20 हजार वृक्षारोपण कराया जायेगा.

वन भूमि पर वृक्षारोपण योजना के तहत गुमला वनक्षेत्र के पतगच्छा जंगल में 30 हजार हेक्टेयर में 50 हजार वृक्षारोपण, सिल्वीकल्चर के तहत कीता जंगल में 50 हेक्टेयर भूमि पर 10 हजार, कुरूमगढ़ वन क्षेत्र अंतर्गत उंचडीह में 50 हेक्टेयर भूमि पर 10 हजार, सिकोई में 50 हेक्टेयर भूमि पर 10 हजार व गुमला वन क्षेत्र अंतर्गत जिलिंगा में 50 हेक्टेयर भूमि पर 10 हजार वृक्षारोपण कराने की योजना है.

वहीं कैंपा मद से अवकृष्ट वनों का पुनर्वास योजना के तहत गुमला वन क्षेत्र के तिर्रा में 30 हेक्टेयर भूमि पर 30 हजार, बकरनी में 20 हेक्टेयर भूमि पर 20 हजार, जल संरक्षण सह वृक्षारोपण योजना के तहत कुरूमगढ़ वन क्षेत्र के लोहड़ा में 50 हेक्टेयर भूमि पर 50 हजार व वन्यजीव कॉरीडोर बिशुनपुर वन क्षेत्र में गैर वनभूमि पर ब्लॉक वृक्षारोपण के तहत बदरी, पुटो इलाके में 25 हेक्टेयर भूमि पर 25 हजार वृक्षारोपण कराने की योजना है.

पेड़ों की कटाई की भरपाई होगी : वन विभाग के अनुसार वृक्षारोपण से कई कारणों से पेड़ों की हो रही कटाई का भरपाई होगी. कहीं विकास के नाम पर पेड़ काटे जा रहे हैं तो कहीं अवैध रूप से जंगलों से पेड़ों का काटा जा रहा है. कई लोग अपने घर-आंगन के पेड़ों को काट रहे हैं. वृक्षारोपण के बाद आने वाले पांच सालों तक पौधा का देखरेख किया जायेगा. पांच साल आते-आते छोटे-छोटे पौधे बड़े होकर वृक्ष का रूप लेने लगेंगे. तब उन्हें देखरेख की जरूरत नहीं पड़ेगी.

लोगों को मिल रहा रोजगार

वन प्रमंडल द्वारा वृक्षारोपण के लिए चिन्हित कई स्थलों पर कार्य शुरू करा दिया है. इसके तहत गड्ढा खुदाई का कार्य चल रहा है. जिसमें स्थानीय लोगों को रोजगार दिया जा रहा है. जैसे-जैसे चिन्हित स्थलों पर गड्ढा खुदाई का कार्य पूर्ण होगा. वैसे-वैसे उक्त स्थलों पर वृक्षारोपण कराया जायेगा. वृक्षारोपण का कार्य भी स्थानीय लोगों द्वारा ही कराया जायेगा.

जंगल और जंगल से सटे हुए खाली पड़ी अधिसूचित वनभूमि को वृक्षारोपण के लिए चिन्हित किया गया है. वृक्षारोपण कराने के लिए कार्य चल रहा है. फलदार और काष्ट प्रजाति के वृक्षों का वृक्षारोपण कराया जायेगा. वृक्षारोपण के बाद उसके बड़े होने तक उसकी देखरेख करेंगे. आने वाले समय में स्थानीय लोगों को ही उन पेड़ों से लाभ मिलेगा.

अनवर बेलाल अहमद, डीएफओ, गुमला

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