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पड़हा पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था : कोटवार

Updated at : 21 Nov 2025 9:16 PM (IST)
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पड़हा पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था : कोटवार

गुमला में प्रखंड स्तरीय डाड़ा पड़हा का गठन

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गुमला. मूली पड़हा गुमला की बैठक में पारंपरिक पड़हा स्वशासन व्यवस्था का गठन सर्वसम्मति से किया गया. मूली पड़हा के कोटवार देवेंद्र लाल उरांव ने प्रस्तावना के तौर पर बताया कि पड़हा पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था है, जिसमें समाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक व न्यायिक रूप से गांव को संचालित और नियंत्रित करती है. हमारे समाज में चयन प्रक्रिया में चुनाव या वोटिंग मतदान की नहीं है. नाम के प्रस्ताव पर ही सर्वसम्मति से निर्णय लेने की परंपरा है. गांव स्तर से लेकर देश स्तर तक कार्तिक उरांव, भीखराम भगत और राम कुजूर ने 1962 में इसका सृजन किया और पद के अनुसार सभी को अपने कार्य को करने की जिम्मेदारी दी गयी. देवान चुंइया कुजूर ने कहा कि झारखंड जनजाति बहुल क्षेत्र है. उरांव जनजाति अपना शासन सामाजिक स्तर से करते आये हैं. पड़हा की मजबूती से समाज मजबूत होगी. राजू उरांव ने कहा कि भारतीय संविधान के अलावा जनजातियों का अपना संविधान है. पड़हा उरांव बहुल इलाके के लिए है. यह जनजातियों का पारंपरिक व्यवस्था चलायमान है. विश्वनाथ उरांव ने कहा कि समाज के बदलते परिवेश में उरांव के सामाजिक व्यवस्था धीरे-धीरे गौण हो रहे हैं. राजी पड़हा के पूर्व कोटवार सुशील उरांव ने कहा कि जनजाति बहुत इलाकों के लिए संविधान की पांचवीं अनुसूची में विशेष अधिकार प्राप्त है. डाड़ा पड़हा बेल अध्यक्ष राजा अजय कुमार उरांव, उप बेल छोटेलाल भगत, देवान (मंत्री) महावीर उरांव, उप देवान मनीष बाड़ा, कोटावार सावन उरांव, उप कोटवार सुरेंद्र उरांव, कहतो सुनील उरांव, उप कहतो महेश उरांव, रकम उर्वस गीता देवी, करटाहा सुकरू उरांव, परामर्शदात्री झाड़ी भगत, सुदर्शन भगत, लालो कुमारी उरांव, पंच विनोद उरांव, रजनी देवी, धरमनी देवी, चंद्रमनी देवी को बनाया गया. सभी पदधारियों को बेल देवराम भगत ने माला पहना शपथ दिलायी गयी. मौक पर मूली पड़हा के उप देवान सीनो मिंज, रकम उर्वस गौरी किंडो, उप कोटवार फूलमनी उरांव, उप कहतो पुष्पा उरांव, परामर्शदात्री शांति मिंज, शांति देवी, सिनगी देई की रकम उर्वस सीता देवी, अरमई, मुरकुंडा, फसिया, टुकुटोली, वृंदा, पुग्गु, सरनाटोली, चंदाली, टोटांबी, कोटाम, बड़ा खटंगा, कुराग, सोसो, जिलिंगा, फोरी, नवाटोली, सरहुल नगर, डाड़ूटोली गांव के अलावा रजनी देवी, चंद्रमुनी खाखा, जयराम उरांव, सुशील भगत, वीरा उरांव, चरवा उरांव, चंद्रमनी उरांव, महेंद्र उरांव, विनोद उरांव, प्रेमलता देवी, शंकुतला कुमारी, लुलिया उरांव, बीरबल एक्का मौजूद थे.

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