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संघर्षशील व्यक्ति को ही मिलती है मंजिल : बिशप लीनुस

Updated at : 04 Aug 2024 9:19 PM (IST)
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संघर्षशील व्यक्ति को ही मिलती है मंजिल : बिशप लीनुस

गुमला धर्मप्रांत के 39 चर्चों में मनाया गया संत जॉन मेरी वियानी का पर्व

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गुमला.

गुमला धर्मप्रांत के पुरोहितों ने रविवार को पुरोहितों के संरक्षक संत जॉन मेरी वियानी का पर्व मनाया. संत जॉन मेरी वियानी पर्व को लेकर गुमला धर्मप्रांत के सभी 39 चर्चों में कार्यक्रम हुआ. संत पात्रिक महागिरजाघर सिसई रोड गुमला में मुख्य समारोह हुआ. मुख्य अनुष्ठाता गुमला धर्मप्रांत के बिशप डॉ लीनुस पिंगल एक्का ने मिस्सा पूजा करायी. बिशप लीनुस ने कहा कि संत जॉन मेरी वियानी का जीवन संघर्षों भरा रहा है. उन्होंने संघर्ष कर बेमिसाल सफलता हासिल की. वे हम सभी के प्रेरणास्रोत हैं. उनका जन्म 1784 ईस्वी में आठ मई को फ्रांस के अर्स गांव में हुआ था. उस समय अर्स गांव में बुराई चरम पर था. वहीं संत जॉन मेरी वियानी अपनी मां की प्रार्थनामय जीवन में बड़ा हो रहा था. बड़े होने के बाद उन्होंने बुराई के खिलाफ लड़ाई लड़ी. वे किसी से डरे नहीं और आगे बढ़ते रहे. उन्होंने लोगों की सेवा और ईश्वर की भक्ति की. अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति व धार्मिक लोगों की मदद से उन्होंने पूरे अर्स गांव की तस्वीर बदल दी. इस गांव में लोग पापमय जीवन जी रहे थे. उस गांव के लोगों ने धार्मिकता का जीवन अपनाया. आगे चल कर वे एक महान संत बने. बिशप लीनुस ने कहा कि संत जॉन मेरी वियानी का जीवन हम सभी के लिए प्रेरणादायी है. मन में यदि दृढ़ इच्छाशक्ति हो, तो कठिनाइयां चाहे जितनी भी हो, सफलता जरूर मिलती है. पल्ली पुरोहित फादर जेरोम एक्का ने कहा है कि संत जोन मेरी वियानी सभी पुरोहितों के आदर्श व पल्ली पुरोहितों के संरक्षक संत हैं. उनके माता-पिता धार्मिक इंसान थे. माता-पिता का गुण संत जोन मेरी वियानी में भी था. माता-पिता की धार्मिकता से संत जोन मेरी वियानी इतना प्रभावित हुए कि उन्होंने न केवल बुराई से जकड़े अर्स गांव में धार्मिकता की नदी बहा दी. बल्कि उन्होंने भी अपना जीवन ईश्वर के चरणों में समर्पित कर दिया. वे स्वयं पल्ली पुरोहित थे. वे रोजाना 18 से 20 घंटे तक काम करते थे, जिससे वे एक महान संत बने. कार्यक्रम में फादर इमानुवेल कुजूर, फादर जेफ्रेनियुस तिर्की, फादर जेरोम एक्का, फादर सिप्रियन एक्का, फादर नीलम एक्का, फादर कुलदीप खलखो, फादर नवीन कुल्लू, फादर अरविंद कुजूर, फादर मुनसून बिलुंग, फादर सिमोन कुजूर, फादर प्रभु दास लकड़ा, फादर सिप्रियन टोप्पो, फादर जोर्ज लकड़ा, फादर इग्नासियुस खलखो, फादर अविनाश लकड़ा, फादर पंखरासियुस केरकेटटा, फादर अमृत तिर्की, फादर खुशमन एक्का, फादर रंजीत खलखो, फादर नबोर मिंज, फादर निकोलस टेटे, फादर सुमन, फादर जयवंत सोरेंग, फादर कुलदीप लिंडा, फादर जोर्ज आदि मौजूद थे.

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