संस्कृति, एकता और प्रकृति संरक्षण का दिया संदेश

Updated at : 07 Apr 2026 10:02 PM (IST)
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संस्कृति, एकता और प्रकृति संरक्षण का दिया संदेश

घाघरा प्रखंड में धूमधाम से मनाया गया सरहुल पर्व, पारंपरिक नृत्य-गीत से गूंजा इलाका

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घाघरा. प्रखंड में मंगलवार को प्रकृति का महापर्व सरहुल पारंपरिक रीति-रिवाजों और उत्साह से मनाया गया. सरना संचालन समिति के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत झखरा कुम्भा में पहान चंदर उरांव और पुजार बादल उरांव द्वारा विधि-विधान से पूजा-अर्चना के साथ की गयी. पूजा के बाद प्रखंड के विभिन्न गांवों से आये दर्जनों खोड़हा दल झखरा कुम्भा में एकत्रित हुए, जहां से जुलूस निकला. पारंपरिक वेशभूषा में सजे श्रद्धालु मांदर की थाप पर नृत्य-गीत करते हुए चांदनी चौक और ब्लॉक चौक से गुजरते हुए करमडीपा पहुंचे, जहां जुलूस एक विशाल सभा में तब्दील हो गया. इस दौरान विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा स्टॉल लगा कर खोड़हा दलों का स्वागत किया गया और उन्हें जलपान कराया गया. सरना संचालन समिति ने सभी खोड़हा दलों को पुरस्कृत कर सम्मानित किया. सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने सरहुल को प्रकृति, संस्कृति व परंपरा का प्रतीक बताते हुए जल, जंगल और जमीन की रक्षा का संदेश दिया. साथ ही समाज में प्रेम, एकता और सद्भावना बनाए रखने तथा नयी पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़े रहने की अपील की गयी. कार्यक्रम में प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही, जिससे पूरा क्षेत्र उत्सव मय माहौल में डूबा नजर आया.

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