'कब आओगे तुम'… गुमला में एलपीजी सिलेंडर बना विरोध का प्रतीक, युवक का अनोखा प्रदर्शन वायरल

Updated at : 11 Apr 2026 3:13 PM (IST)
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LPG Cylinder Crisis

एलपीजी सिलेंडरों की कमी पर गुमला में युवक का अनोखा प्रदर्शन. फोटो: प्रभात खबर

LPG Cylinder Crisis: गुमला में एलपीजी गैस की कमी से परेशान युवक ने अनोखे अंदाज में विरोध जताया. “कब आओगे तुम” लिखकर सिलेंडर सड़क पर रख दिया, जिसका वीडियो वायरल हो गया. गैस आपूर्ति में अनियमितता से लोग परेशान हैं, जबकि प्रशासन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

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गुमला से दुर्जय पासवान की रिपोर्ट

LPG Cylinder Crisis: एलपीजी सिलेंडर की कमी पर कभी नारे, कभी धरना-प्रदर्शन तो आम है, लेकिन झारखंड के गुमला में एलपीजी गैस सिलेंडर की कमी को लेकर एक युवक का अनोखा विरोध इन दिनों सुर्खियों में है. आमतौर पर लोग गैस की किल्लत पर नारेबाजी या धरना-प्रदर्शन करते हैं, लेकिन इस बार विरोध का अंदाज बिल्कुल अलग और रचनात्मक देखने को मिला. यही वजह है कि यह मामला अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.

“कब आओगे तुम” की तख्ती लगाकर जताई पीड़ा

गुमला शहर के लोहरदगा रोड स्थित मिशन चौक पर मंटू गुप्ता नामक युवक ने अपनी परेशानी को एक अलग अंदाज में सामने रखा. युवक ने एक तख्ती पर अपना डीएस नंबर लिखते हुए बड़ा सवाल किया, “कब आओगे तुम”. इस तख्ती को उसने गैस सिलेंडर के ऊपर रख दिया और उसे सड़क पर छोड़ दिया.

सड़क के बीच रखा सिलेंडर

यह दृश्य वहां से गुजरने वाले हर व्यक्ति का ध्यान अपनी ओर खींच रहा था. सड़क के बीच रखा सिलेंडर और उस पर लिखा यह सवाल लोगों को रुककर सोचने पर मजबूर कर रहा था. यह विरोध न केवल प्रतीकात्मक था, बल्कि आम लोगों की परेशानी को सीधे तौर पर दर्शा रहा था.

सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ वीडियो

मौके पर मौजूद किसी व्यक्ति ने इस अनोखे प्रदर्शन का फोटो और वीडियो बना लिया, जो देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. वायरल होते ही लोगों की प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई.

व्यवस्था पर करारा व्यंग्य

कई यूजर्स ने इसे आम जनता की मजबूरी का प्रतीक बताया, तो कुछ ने इसे व्यवस्था पर करारा व्यंग्य कहा. सोशल मीडिया पर लोगों का कहना है कि गैस जैसी बुनियादी जरूरत की चीज के लिए इस तरह का विरोध यह दिखाता है कि हालात कितने गंभीर हो चुके हैं.

गैस आपूर्ति में अनियमितता से बढ़ी परेशानी

स्थानीय लोगों के अनुसार, गुमला और आसपास के इलाकों में इन दिनों एलपीजी गैस की आपूर्ति नियमित नहीं हो पा रही है. कई उपभोक्ताओं को समय पर सिलेंडर नहीं मिल रहा है, जिससे उनके दैनिक जीवन पर सीधा असर पड़ रहा है.

खाना बनाने में हो रही परेशानी

खाना बनाने जैसी बुनियादी जरूरत के लिए लोग परेशान हैं और बार-बार गैस एजेंसियों के चक्कर लगाने को मजबूर हो रहे हैं. डीएस नंबर होने के बावजूद समय पर सिलेंडर नहीं मिलना उपभोक्ताओं के लिए बड़ी समस्या बन गया है.

प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल

इस पूरे मामले पर अभी तक संबंधित विभाग या प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. यही वजह है कि लोगों के बीच नाराजगी और बढ़ती जा रही है. लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर गैस आपूर्ति में इतनी अनियमितता क्यों है और इसका समाधान कब तक निकलेगा. युवक के इस अनोखे विरोध ने प्रशासन का ध्यान जरूर खींचा है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नजर नहीं आ रहा है.

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विरोध बना जनभावना की आवाज

मंटू गुप्ता का यह प्रदर्शन अब सिर्फ एक व्यक्ति का विरोध नहीं रह गया है, बल्कि यह पूरे इलाके की जनभावना का प्रतीक बन गया है. जिस सादगी और रचनात्मकता के साथ उन्होंने अपनी बात रखी, उसने लोगों के दिलों को छू लिया है. यह घटना यह भी दर्शाती है कि जब समस्याएं लंबे समय तक बनी रहती हैं, तो लोग अपने तरीके से विरोध दर्ज कराने के नए-नए रास्ते खोज लेते हैं. अब देखना होगा कि यह वायरल विरोध प्रशासन को कितनी जल्दी जगाता है और लोगों को राहत कब मिलती है.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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