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प्रभु यीशु ने लोगों को प्रेम, दया, क्षमा व सेवा करना सिखाया: फादर जेरोम

शांति, न्याय व प्रेम के राजकुमार यीशु ख्रीस्त का जन्मोत्सव मनाया गया

गुमला. शांति, न्याय, प्रेम व धार्मिकता के राजकुमार यीशु ख्रीस्त का जन्मोत्सव पर्व क्रिसमस बुधवार को हर्षोल्लास से मनाया गया. मौके पर गुमला धर्मप्रांत के सभी 39 चर्चों में पल्ली पुरोहितों की अगुवाई में पवित्र मिस्सा पूजा की गयी. गुमला के संत पात्रिक महागिरजा में दो पाली में मिस्सा पूजा हुई. पहली मिस्सा पूजा मुख्य अनुष्ठाता संत पात्रिक महागिरजा के पल्ली पुरोहित फादर जेरोम एक्का व दूसरी मिस्सा पूजा फादर प्रभु पी लकड़ा ने करायी. इसके अलावा बरिसा में फादर अरविंद व फादर मूनसन, तेलगांव में फादर कुलदीप खलखो, कुंबाटोली में फादर सीप्रियन एक्का, बोक्टा महुआटोली में फादर इम्मानुवेल कुजूर व जेल में फादर नवीन कुल्लू ने मिस्सा पूजा करायी. मिस्सा पूजा के बाद ख्रीस्तीय विश्वासियों के बीच परम प्रसाद का वितरण किया गया. विश्वासियों ने कतारबद्ध होकर परम प्रसाद ग्रहण किया. इसके बाद बालक यीशु ख्रीस्त का विश्वासियों को चुंबन कराया गया. मौके पर फादर जेरोम ने सभी को यीशु ख्रीस्त का जन्मोत्सव पर्व की बधाई देते हुए कहा कि आज के दिन अपने जीवन में नया बदलाव लाये और नये सिरे से जीवन की शुरुआत करें. क्योंकि आज के दिन ही यीशु ख्रीस्त इस धरती पर जन्म लिए और उनके जन्म लेते ही मनुष्यों का संबंध ईश्वर से जुड़ गया. यीशु ख्रीस्त ने धरती पर जन्म लेकर समाज व समाज में रहने वाले लोगों में बदलाव लाया. यीशु ख्रीस्त परमपिता परमेश्वर के इकलौते और सबसे प्रिय पुत्र हैं. यीशु ख्रीस्त स्वयं ईश्वर हैं, वे चाहते तो किसी राजमहल में जन्म ले सकते थे. परंतु उन्होंने राजमहल की जगह बेतलहेम गांव में एक छोटे गोशाला में जन्म लिए. गौशाला में जन्म लेकर उन्होंने यह संदेश दिया कि कोई भी छोटा या बड़ा नहीं है. सभी एक बराबर हैं. उन्होंने लोगों को प्रेम, दया, क्षमा व सेवा करना सिखाया. आज के समय में हमें उनके इस संदेश को अपनाने की जरूरत है. फादर प्रभु पी लकड़ा ने कहा कि ईश्वर पर आस्था रखने वाले लोग अपने जीवन में कभी हताश और निराश नहीं होते. यदि आपके जीवन में भी हताशा और निराशा है, तो ईश्वर से प्रार्थना करें. खुद को ईश्वर के चरणों में समर्पित करें, ताकि ईश्वर आपके जीवन को पार लगा सके. मिस्सा पूजा में फादर कुलदीप, फादर पीटर तिर्की, फादर मुनसन, फादर जीतन कुजूर, फादर जेफ्रेनियुस, फादर अगुस्टीन, फादर नीलम, फादर खुशमन, फादर अजय, फादर अरविंद, फादर पौल, फादर रंजीत, फादर अमृत, फादर फुलजेंस, फादर जीतन कुजूर, फादर प्रफुल्ल एक्का, फादर नवीन कुल्लू, फादर खुशमन, फादर जॉर्ज, फादर पास्कल, सिस्टर मारिया स्वर्णलता कुजूर, सिस्टर एमेल्डा सोरेंग, सिस्टर निर्मला, सिस्टर हिरमीना लकड़ा, सिस्टर अनुरंजना, सिस्टर स्वाती, सिस्टर गुलाबी, सिस्टर लवली, सिस्टर एस्टेला, सिस्टर ललिता लोलेन, सिस्टर निवेदिता, सिस्टर सुष्मिता, सिस्टर मायगी, सिस्टर शालिनी, सिस्टर शशि किंडो समेत अन्य पुरोहित एवं धर्मबहनें मौजूद थे.

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