इनसे सीखिए : कोरोना से बचने के लिए ग्रामीणों ने बनाये नियम, दंड का भी है प्रावधान

Updated at : 28 May 2020 11:05 PM (IST)
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इनसे सीखिए : कोरोना से बचने के लिए ग्रामीणों ने बनाये नियम, दंड का भी है प्रावधान

छत्तीसगढ़ राज्य से सटे झारखंड के गुमला जिले के बुमतेल गांव में कोरोना महामारी (Corona pandemic) से बचने के लिए ग्रामीणों ने नया नियम बनाया है. इस नियम के उल्लंघन पर दंड का भी प्रावधान है. होम कोरेंटिन किये गये लोगों को 14 दिनों तक अपने घर से नहीं निकलना है. इसके लिए खुद ग्रामीण निगरानी करते हैं.

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गुमला : छत्तीसगढ़ राज्य से सटे झारखंड के गुमला जिले के बुमतेल गांव में कोरोना महामारी (Corona pandemic) से बचने के लिए ग्रामीणों ने नया नियम बनाया है. इस नियम के उल्लंघन पर दंड का भी प्रावधान है. होम कोरेंटिन किये गये लोगों को 14 दिनों तक अपने घर से नहीं निकलना है. इसके लिए खुद ग्रामीण निगरानी करते हैं. जब तक कोरोना है. सोशल डिस्टैंसिंग में सभी को रहना है. कुआं व चापाकल में पानी भरने से लेकर तालाब में कपड़ा धोने व नहाने में भी सोशल डिस्टैंसिंग का पालन करना है. अगर ये नियम टूटते हैं, तो ग्रामीण बैठक कर दंड देने का भी प्रावधान रखे हैं. पढ़ें दुर्जय पासवान की रिपोर्ट.

गुमला जिला के अलबर्ट एक्का जारी प्रखंड में बुमतेल गांव है. ग्रामीणों का कहना है कि जिंदा रहने की जिद ने हमें जागरूक बना दिया है. होम कोरेंटिन व सोशल डिस्टैंसिंग का पालन कराने के अलावा अगर गांव का कोई व्यक्ति संकट में है, तो ग्रामीण खुद एक- दूसरे की मदद कर रहे हैं. होम कोरेंटिन व सोशल डिस्टैंसिंग को लेकर गांव में बैठक भी हुई है, जिसमें कोरोना से बचने के लिए सभी को सावधानी बरतने के लिए कहा गया है.

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बिना इलाज गांव में प्रवेश वर्जित : ग्रामीण

ग्रामीण नोवेल लकड़ा ने बताया कि हमारे गांव में जो भी प्रवासी व्यक्ति आते हैं. सभी को प्रखंड कोरेंटिन सेंटर भेज दिया जाता है. किसी को भी बिना इलाज कराये गांव में प्रवेश वर्जित है. मेंजस एक्का ने कहा कि अगर सभी गांवों के ग्रामीण इस तरह जागरूक हो जायेंगे, तो कोरोना स्वतः मर जायेगा. बीमारी खत्म हो जायेगी.

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गांव के ग्राम प्रधान रामलाल मुंडा ने बताया कि कोरोना महामारी से दुनिया त्रस्त है. लेकिन, बहुत सारे गांवों के लोग सोशल डिस्टैंसिंग और लॉकडाउन का पालन नहीं कर रहे हैं, जिसके कारण कोरोना महामारी बढ़ रही है. वार्ड सदस्य अलबिनुस कुजूर ने बताया कि कभी- कभी कोरोना महामारी को लेकर तथा प्रवासी मजदूरों के आने से गांव में एक- दूसरे के बीच कहासुनी भी हो जाती है, लेकिन हम सभी आपस में बैठकर उसका समाधान निकाल लेते हैं.

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दूसरे गांव के लोग सीखें : मुखिया

सीसीकरमटोली के मुखिया दिलीप बड़ाईक ने कहा कि इस गांव के ग्रामीण कोरोना जैसी महामारी से लड़ने के लिए काफी जागरूक हैं. इस गांव के ग्रामीणों से दूसरे गांव भी सीखें और कोरोना महामारी लड़ाई में सभी एक साथ मिलकर लड़ाई लड़ें. गांव के वीरेंद्र भगत, ओवेद तिर्की, सहिया प्रीति राशि खलखो, सेवक मिंज, हेरमन लकड़ा, अगुस्टीन लकड़ा, सुरंजन मुंडा, फूलमनी खलखो ने कहा कि किसी भी मामले पर पूरा गांव निर्णय लेता है.

Posted By : Samir ranjan.

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