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हसीन वादियों के बीच बसा है केवना गांव, परंतु यहां की हालत बदतर है, कोरवा जनजाति का हक मार रहे सरकारी मुलाजिम

By Prabhat Khabar Print Desk
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कोरवा जनजाति का हक मार रहे सरकारी मुलाजिम
कोरवा जनजाति का हक मार रहे सरकारी मुलाजिम
Prabhat khabar

चैनपुर : हसीन वादियां, प्रकृति में शुद्धता और चारों ओर हरियाली है. ऊंचे पहाड़ व घने जंगल है. यह दृश्य चैनपुर प्रखंड के बारडीह पंचायत स्थित केवना गांव की है. केवना गांव कश्मीर की सुंदरता को टक्कर दे रहा है. परंतु इस गांव के हालत जानकर दुख होता है. किस प्रकार, इस गांव में रहने वाले कोरवा जनजाति को सरकारी मुलाजिम लूट-खसोट का जरिया बना लिये हैं. इसका जीता जागता उदाहरण गांव पहुंचने के बाद मिलेगा.

सरकारी मुलाजिम कोरवा जनजाति का हक मार रहे हैं. बिरसा आवास में भारी लूट हुई है. लाभुकों को योजना का आधा पैसा ही मिला. मजबूरी में लोगों ने खुद की मेहनत से जैसे तैसे मिट्टी का घर बनाकर रहे हैं. 35 परिवार रहते हैं. परंतु सभी के घर की स्थिति ठीक नहीं है. गांव में पांच लाख की सड़क पांच महीने में टूट गयी. तीन साल पहले पीसीसी सड़क बनी थी. पांच महीने सड़क चली और बारिश में बह गयी.

राशन लाने के लिए लोगों को दो किमी पैदल चलना पड़ता है. जबकि सरकारी नियम के अनुसार कोरवा जनजाति के घर तक पहुंचाकर अनाज देना है. गांव की सड़क कच्ची है. यहां आराम से चल सकते हैं. बाइक भी गांव तक पहुंच जायेगी. परंतु एक घर से दूसरे घर जाने के लिए पहाड़, मिट्टी का टीला, पगडंडी व खेत से होकर गुजरना पड़ेगा. यहां के लोग बरसात में सबसे ज्यादा कष्ट में जीते हैं.

जलमीनार का मशीन चोरी कर ले गया ठेकेदार :

केवना गांव में चापानल नहीं है. पेयजल एवं स्वच्छता विभाग गुमला से सोलर जलमीनार बनी है. 2018 में जलमीनार पूर्ण हुई, परंतु इसे चालू नहीं किया गया. ग्रामीणों ने बताया कि एक सप्ताह पानी मिला. इसके बाद जलमीनार बनानेवाले ठेकेदार मशीन चोरी कर ले गये. उसके स्थान पर बाद में पुराना मशीन लाकर लगा दिया. अब तीन साल हो गया. जलमीनार बेकार पड़ा हुआ है. लघु ग्रामीण जलापूर्ति योजना के तहत जलमीनार बनी थी, जो बेकार है. लोग कुआं का पानी पीते हैं.

पांच माह में टूट गयी सड़क

13 गुम 3 में केवना गांव में पांच लाख की सड़क पांच महीने में टूट गयी

केवना गांव में पांच लाख रुपये की लागत से पीसीसी सड़क बनी थी. परंतु पांच महीने में टूट गयी. ग्रामीण बताते हैं कि तीन साल पहले सड़क बनी थी. पांच महीने भी ठीक से नहीं चली और बरसात में सड़क बह गयी. इसके बाद मरम्मत नहीं हुई. किस योजना से सड़क बनी है. यह जानकारी ग्रामीणों को नहीं है.

ये है, केवना स्कूल, तस्वीर खुद हालत बयां कर रही

स्कूल के कमरे का हाल ऐसा है. तस्वीर खुद स्कूल की हालत बयां कर रही है. जिस कमरे में बच्चे पढ़ते हैं. उस कमरे में खिड़की नहीं है. फर्श टूटा हुआ है. बारिश का पानी पूरे कमरे में जमा होकर कीचड़ बन गया है. बोर्ड भी बेकार हो गया है. स्कूल का बरामदा भी जलजमाव होने के कारण खराब हो गया है. स्कूल के बगल में शौचालय बना है. वह भी कबाड़खाना बन गया है. दरवाजा जर्जर है. ग्रामीण बताते हैं. जब से लॉकडाउन लगा है. स्कूल बंद है. गांव के कुछ बच्चे चैनपुर प्रखंड के महेशपुर डीपा आवासीय स्कूल में पढ़ने जाते हैं. परंतु अभी लॉकडाउन के कारण स्कूल बंद है. सभी बच्चे घर में हैं. दिनभर पशुओं को जंगल में चराते हैं. गुलेल लेकर जंगल में घूमते नजर आते हैं.

तेतरडीपा की कहानी, बीमारी ठीक हुई, तब जांच करने पहुंची टीम

केवना गांव से आठ किमी की दूरी पर तेतरडीपा गांव है. यहां भी कोरवा जनजाति के लोग रहते हैं. यहां 19 परिवार है. अप्रैल माह में यहां के लोग सर्दी, बुखार, खांसी से परेशान थे. लोगों ने घरेलू इलाज किया. 15 से 20 दिन तक लोग परेशान रहे. अब सभी लोग स्वस्थ हैं. परंतु चौंकाने वाली बात यह है कि जब गांव के सभी लोग स्वस्थ हो गये. तब प्रशासन कोरोना जांच करने के लिए टीम गांव भेजी. 15 लोगों का सैंपल लिया गया था. परंतु सभी का रिपोर्ट निगेटिव आया. वहीं 45 वर्ष से अधिक उम्र के सात लोगों को कोरोना टीका दिया गया. इसी प्रकार केवना गांव की भी कहानी है. जब पूरा गांव बीमारी से जूझ रहा था. तब प्रशासन ने गांव की सुध नहीं ली. जब गांव के लोग स्वस्थ हो गये तो टीम टीका देने गांव पहुंची थी.

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