चार वर्षीय मासूम से दुष्कर्म के असली दोषी को उम्रकैद, एक लाख जुर्माना

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31 गुम 19 में गुमला न्यायालय | Prabhat Khabar Network

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गुमला की अदालत ने 9 साल पुराने पोक्सो मामले में असली दोषी अमित कुजूर को उम्रकैद और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जानें पूरी खबर।

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गुमला: लगभग नौ वर्ष पूर्व चार वर्षीय मासूम बच्ची से दुष्कर्म के एक चर्चित मामले में अदालत ने अंतिम फैसला सुनाते हुए असली दोषी अमित कुजूर को आजीवन कारावास की सजा सुनायी है. अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे-4) सह विशेष पोक्सो न्यायाधीश संजीव भाटिया की अदालत ने सिकरी जारी गांव निवासी अमित कुजूर को पोक्सो एक्ट की धारा 4 और 6 के तहत दोषी पाया.

अदालत ने दोनों धाराओं के तहत आरोपी पर 50-50 हजार रुपये, यानी कुल एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है. जुर्माना राशि नहीं देने की स्थिति में दोषी को दो-दो वर्ष की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी. इस मामले में सरकार की ओर से लोक अभियोजक सुधीर टोप्पो ने पैरवी की.

बेगुनाह दिव्यांग को काटनी पड़ी 3 साल की जेलइस मामले का सबसे दुखद पहलू यह रहा कि अपराध किसी और ने किया, लेकिन सजा एक बेगुनाह को भुगतनी पड़ी. अभियोजन पक्ष के अनुसार घटना 20 अगस्त 2017 की है.

दुष्कर्म के बाद रोती हुई मासूम बच्ची को देखकर गांव का दिव्यांग युवक लेपड़ा खड़िया उसे मदद की नीयत से घर पहुंचाने गया था. लेकिन परिजनों ने संदेह के आधार पर उसी के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज करा दी. पुलिस ने आनन-फानन में लेपड़ा खड़िया को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया, जहां वह करीब तीन वर्षों तक सलाखों के पीछे रहा.

कोलकाता भाग गया था असली आरोपी, ऐसे खुला राजघटना को अंजाम देने के बाद असली आरोपी अमित कुजूर कोलकाता फरार हो गया था. लगभग तीन साल बाद जब वह गांव लौटा, तो उसने एक अन्य बच्ची के साथ दुष्कर्म का प्रयास किया. इस दौरान ग्रामीणों ने उसे रंगेहाथ पकड़ लिया. कड़ाई से पूछताछ करने पर अमित ने 2017 में मासूम बच्ची के साथ किये गये दुष्कर्म की बात भी स्वीकार कर ली.

आरोपी के इकबालिया बयान के बाद पुलिस ने मामले की पुनार्विवेचना की. सच्चाई सामने आने के बाद अदालत ने दिव्यांग लेपड़ा खड़िया को सम्मानपूर्वक बरी कर दिया था. अब लंबी सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने वास्तविक अपराधी अमित कुजूर को कठोर सजा सुनाकर मामले में न्याय सुनिश्चित किया है.


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दुर्जय पासवान

लेखक के बारे में

By दुर्जय पासवान

दुर्जय पासवान ने वर्ष 2001 से पत्रकारिता की शुरुआत की. दैनिक जागरण में दो साल काम करने के बाद 2003 में वे प्रभात खबर से जुड़े. इसके साथ ही नयी दुनिया अखबार, प्रहार मैगजीन में भी अपनी सेवा दी. इसके बाद 2010 में वे दैनिक भास्कर गुमला का ब्यूरो इंचार्ज के रूप में काम शुरू किये. भास्कर में पांच साल सेवा देने के बाद दोबारा 2014 में प्रभात खबर में ब्यूरो इंचार्ज के रूप में वापसी की. तब से अबतक प्रभात खबर से जुड़े हुए हैं. उन्होंने नक्सलियों से जुड़ी खबरें, नक्सली घटनाएं, ग्राउंड रिपोर्ट, प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहरों की खोज से संबंधित खबरों पर अच्छा काम किया. इन्हीं खबरों ने उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में पहचान दी. दुर्जय पासवान बहुत लगन से अपना सभी काम का पूरा करते हैं.

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