गुमला: इंडियन ओवरसीज बैंक में फर्जी खाता खुलने का आरोप, KYC प्रक्रिया पर उठे सवाल

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फर्जी बैंक खाता खोलने के आरोप से केवाइसी प्रक्रिया पर उठे सवाल

गुमला के इंडियन ओवरसीज बैंक में फर्जी खाता खोलकर लोन लेने का मामला सामने आया है। बैंक की केवाईसी प्रक्रिया और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

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गुमला: इंडियन ओवरसीज बैंक की गुमला शाखा में कथित रूप से एक व्यक्ति के नाम और दस्तावेजों का दुरुपयोग कर फर्जी बैंक खाता खोले जाने का मामला सामने आया है. घटना के बाद बैंक की केवाइसी और ग्राहक सत्यापन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गये हैं.

पीड़ित मुकेश कुमार ने आरोप लगाया है कि उनके नाम पर खाता खोलकर फिनटेक कंपनियों से 56,460 रुपये का लोन लिया गया और पूरी राशि दूसरे बैंक खातों में ट्रांसफर कर दी गयी. उन्हें इसकी जानकारी तक नहीं थी.

मुकेश कुमार के अनुसार, उन्हें इस फर्जी खाते की जानकारी तब मिली, जब उन्होंने अपनी सिबिल रिपोर्ट की जांच की. रिपोर्ट में पता चला कि उनके नाम पर इंडियन ओवरसीज बैंक की गुमला शाखा में खाता संख्या 154401000029304 संचालित है. हैरानी की बात यह है कि खाते में दर्ज मोबाइल नंबर और ई-मेल आइडी उनके नहीं हैं.

मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि बैंक में खाता खोलने के लिए अनिवार्य केवाइसी, पहचान सत्यापन और ग्राहक की पुष्टि की प्रक्रिया के बावजूद किसी अन्य मोबाइल नंबर और ई-मेल आइडी के आधार पर दूसरे व्यक्ति के नाम से खाता कैसे खोल दिया गया.

यदि खाता ई-केवाइसी के माध्यम से खोला गया था, तो बायोमेट्रिक सत्यापन, फोटो मिलान और अन्य सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन क्यों नहीं किया गया. अगर खाता शाखा स्तर पर खोला गया, तो संबंधित अधिकारियों ने दस्तावेजों और आवेदक की पहचान का सत्यापन किस आधार पर किया, यह भी जांच का विषय है.

फिनटेक कंपनियों से लिया गया लोन

पीड़ित का आरोप है कि इसी फर्जी खाते का इस्तेमाल कर अवफिन और आरके बंशल जैसी फिनटेक कंपनियों से उनके नाम पर 56,460 रुपये का लोन लिया गया. इसके बाद पूरी राशि तुरंत अन्य खातों में भेज दी गयी. इससे बैंक की आंतरिक निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं.

जांच और कार्रवाई की मांग

मुकेश कुमार ने शाखा प्रबंधक को आवेदन देकर फर्जी खाते को तत्काल फ्रीज करने की मांग की है. उन्होंने खाता खोलने के दौरान इस्तेमाल किये गये ई-केवाइसी रिकॉर्ड, फोटो, आईपी एड्रेस और संबंधित बैंक कर्मचारियों की भूमिका की जांच कराने का अनुरोध किया है.

उन्होंने मामले की जानकारी साइबर क्राइम सेल को उपलब्ध कराने और लिखित रूप से यह प्रमाणित करने की मांग की है कि खाता धोखाधड़ी के माध्यम से खोला गया था, ताकि वह आरबीआई लोकपाल और सिबिल के समक्ष अपना पक्ष रख सकें.


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दुर्जय पासवान

लेखक के बारे में

By दुर्जय पासवान

दुर्जय पासवान ने वर्ष 2001 से पत्रकारिता की शुरुआत की. दैनिक जागरण में दो साल काम करने के बाद 2003 में वे प्रभात खबर से जुड़े. इसके साथ ही नयी दुनिया अखबार, प्रहार मैगजीन में भी अपनी सेवा दी. इसके बाद 2010 में वे दैनिक भास्कर गुमला का ब्यूरो इंचार्ज के रूप में काम शुरू किये. भास्कर में पांच साल सेवा देने के बाद दोबारा 2014 में प्रभात खबर में ब्यूरो इंचार्ज के रूप में वापसी की. तब से अबतक प्रभात खबर से जुड़े हुए हैं. उन्होंने नक्सलियों से जुड़ी खबरें, नक्सली घटनाएं, ग्राउंड रिपोर्ट, प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहरों की खोज से संबंधित खबरों पर अच्छा काम किया. इन्हीं खबरों ने उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में पहचान दी. दुर्जय पासवान बहुत लगन से अपना सभी काम का पूरा करते हैं.

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