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47 जगहों पर लगी आग, पेड़-पौधे जले, व जंगली जीवों को नुकसान

Updated at : 17 Mar 2025 9:02 PM (IST)
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47 जगहों पर लगी आग, पेड़-पौधे जले, व जंगली जीवों को नुकसान

गर्मी के मौसम में जंगलों में आग लगने की घटना आम हो जाती है.

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गुमला. गर्मी के मौसम में जंगलों में आग लगने की घटना आम हो जाती है. कहीं किसी के द्वारा जान बूझकर आग लगा दिया जाता है तो कहीं प्राकृतिक कारणों से तो कहीं दुर्घटनावश आग लग जाती है. इस साल फरवरी महीने के एक और मार्च महीने के 10 दिनों में जंगलों में 47 जगहों पर आग लगने की घटना घट चुकी है. जनवरी माह में जंगल में कहीं भी आग लगने की घटना नहीं हुई. फरवरी माह में जंगलों में दो जगहों पर आग लगने की घटना हुई. इसके बाद मार्च माह में सात मार्च से लेकर 16 मार्च तक जंगलों में 45 जगहों पर आग लगने की घटना हुई. सात मार्च को दो, आठ मार्च को चार, नौ मार्च को चार, 10 मार्च को एक, 11 मार्च को एक, 12 मार्च को दो, 13 मार्च को 14, 15 मार्च को दो व 16 मार्च को छह जगहों पर आग लगने की घटना घट चुकी है. हालांकि आग लगने के बाद वन विभाग की टीम द्वारा स्थानीय वन समितियों व ग्रामीणों के सहयोग से आग पर काबू पा लिया गया. लेकिन आग पर काबू पाने से पहले लाखों छोटे-बड़े पेड़-पौधे जलकर नष्ट हो गये. जंगल की मिट्टी भी जलकर बेकार हो गयी. साथ ही आग और आग से उठने वाले धुआं के कारण जंगल में रहने वाले अनेकों प्रकार के छोटे-छोटे जीव-जंतुओं व पक्षियों को भी नुकसान हुआ. वन प्रमंडल गुमला से मिली जानकारी के अनुसार जंगलों में आग लगने की अधिकांश घटनाएं महुआ चुनने के लिए हुई है. स्थानीय लोग महुआ चुनने के लिए जंगल में आग लगा देते हैं. अभी गर्मी का मौसम है. इस समय में महुआ पूरी तरह से तैयार हो गया है. जंगलों में महुआ के पेड़ भी बहुतायात में पाये जाते हैं. स्थानीय लोग महुआ चुनने के लिए महुआ पेड़ के आसपास आग लगा देते हैं. वही आग महुआ पेड़ के नीचे और आसपास के सुखे पत्तों और झाड़ियों से होते हुए जंगल में कई किमी दूर तक फैल जाती है. जिससे आग लगाने वाले को तो कोई फर्क नहीं पड़ता. उसे महज कुछ किग्रा महुआ मिल जाता है और उससे कुछ बहुत पैसे आ जाते हैं. परंतु उस आग के कारण जंगल, जंगल की मिट्टी व जंगली जीव-जंतुओं को भारी नुकसान पहुंचता है. बार-बार आग लगने के कारण प्राकृतिक पुनर्जन्म को भी नुकसान हो रहा है और जंगल में निवास करने वाले विभिन्न प्रकार के जंगली प्रजातियों की विविधता में भी कमी आ रही है.

पांच सालों में जंगल की 627.82 हेक्टेयर भूमि जली, लाखों पौधे हो गये बेकार

पिछले पांच सालों का रिकॉर्ड देखा जाये, तो जंगलों में आग लगने के कारण 627.82 हेक्टेयर भूमि प्रभावित हो चुका है. वित्तीय वर्ष 2019-20 में जंगल में आगलगी के कारण 4.88 हेक्टेयर भूमि प्रभावित हुआ. इसी प्रकार वित्तीय वर्ष 2020-21 में 105 हेक्टेयर भूमि, वित्तीय वर्ष 2021-22 में 244.44 हेक्टेयर भूमि, वित्तीय वर्ष 2022-23 में 267.5 हेक्टेयर भूमि व वित्तीय वर्ष 2024-25 में छह हेक्टेयर भूमि प्रभावित हुआ. आग लगने के कारण उक्त भूमि पर मौजूद लाखों छोटे-बड़े पेड़-पौधे भी जलकर नष्ट हो गये. इसके साथ ही वहां निवास करने वाले कई प्रकार के जंगली जीव भी मर गये. वहीं इस साल जंगलों में आग लगने की घटना जारी ही है. हर दिन जंगलों में छह से सात जगहों पर आग लगने की घटना हो रही है.

आग लगने से मिट्टी की ऊर्वरा शक्ति खत्म हो जाती है

जंगल में आग लगने के कारण वन संपदा का काफी नुकसान हुआ. सबसे ज्यादा नुकसान मिट्टी का हुआ. आग लगने के कारण मिट्टी के जलने से मिट्टी का ऑर्गेनिक कार्बन खत्म हो जाता है. मिट्टी की उर्वरता बनाये रखने, भोज्य फसलों के उत्पादन व फसल चक्र की वृद्धि के लिए ऑर्गेनिक कार्बन बहुत ही महत्वपूर्ण तत्व है. ऑर्गेनिक कार्बन में फंगस व बैक्टिरिया रहता है. इसमें भी फंगस बहुत ही महत्वपूर्ण है. जो आग से जल जाता है. आग से जलने के कारण दोनों चीजे खत्म हो जाती है. जिस कारण उपजाऊ मिट्टी की ऊर्वरता खत्म हो जाती है.

महुआ चुनने के लिए जंगल में नहीं लगाये आग : डीएफओ

डीएफओ अहमद बेलाल अनवर ने बताया कि जंगलों में आग लगने की घटना से निपटने के लिए वन विभाग द्वारा पांच स्तर पर तैयारी की गयी है. जंगल में यदि कहीं भी आग लगती है तो सेटेलाईट के माध्यम से सूचना मिल जाती है और सूचना मिलते ही आग को बुझाने का कार्य शुरू कर दिया जाता है. जिसमें स्थानीय लोगों द्वारा भी काफी सहयोग किया जाता है. डीएफओ ने बताया कि जंगल में सबसे ज्यादा आगजनी की घटना महुआ चुनने के लिए होती है. प्राय: लोग महुआ चुनने के लिए पेड़ के नीचे आग लगा देते हैं. जिससे भारी नुकसान होता है. डीएफओ ने लोगों से अपील किया कि महुआ चुनने के लिए आग नहीं लगाये. महुआ पेड़ के नीचे से सुखे पत्तों को हटाकर भी महुआ चुना जा सकता है. इसके साथ ही महुआ पेड़ के चारों ओर जाल लगाकर भी महुआ चुना जा सकता है. इससे वन संपदा को नुकसान भी नहीं होगा. डीएफओ ने कहा कि जंगल में आग लगाने वालों के विरूद्ध वन अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई की जायेगी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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