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अशिक्षा, नशापान व सामाजिक कुरीतियां आदिवासी समाज के विकास में बाधक : विधायक

विश्व आदिवासी दिवस. नगर भवन में हुआ जिला प्रशासन का कार्यक्रम

विश्व आदिवासी दिवस. नगर भवन में हुआ जिला प्रशासन का कार्यक्रम

गुमला.

आदिवासी समुदाय आज भी विकास से कोसों दूर है, जिसका मुख्य कारण अशिक्षा, नशापान व सामाजिक कुरीतियां हैं. यदि इन चीजों को समाज से दूर कर दिया जाये, तो हमारे आदिवासी समाज को विकसित समाज से बनने से कोई नहीं रोक सकता है. उक्त बातें गुमला विधायक भूषण तिर्की ने विश्व आदिवासी दिवस पर जिला प्रशासन के तत्वावधान में नगर भवन में आयोजित कार्यक्रम में कही. विधायक ने कहा कि आदिवासी समुदाय की विभिन्न भाषाओं का इतिहास काफी पुराना है. पर देखा जा रहा है कि धीरे-धीरे आदिवासी भाषाएं व आदिवासी समाज के कई समुदाय विलुप्त होते जा रहे हैं, जिसे संरक्षित करने की जरूरत है. कहा कि आज के समय में पूरी दुनिया में लगभग 500 मिलियन आदिवासी समुदाय के लोग निवास करते हैं और लगभग सात हजार जनजातीय भाषाएं बोली जाती हैं, जो आज भी अपने हक व अधिकार की लड़ाई लड़ रही है. कार्यक्रम को जिप अध्यक्ष किरण माला बाड़ा, उपाध्यक्ष संयुक्ता देवी व अपर समाहर्ता शशिंद्र कुमार बड़ाइक ने भी संबोधित किया. इससे पूर्व अतिथियों ने विधिवत रूप से दीप जला कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया. कार्यक्रम में लाभुकों के बीच परिसंपत्तियों का वितरण किया गया. मुख्यमंत्री रोजगार सृजन योजना के तहत लाभुकों के बीच ट्रैक्टर, टेंपो, पिकअप, छात्र-छात्राओं के बीच साइकिल व एसएचजी की महिलाओं के बीच ऋण का वितरण किया गया. वन विभाग की ओर से परंपरागत वन निवासियों के बीच वन पट्टा का वितरण किया गया. साथ ही मैट्रिक परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले आदिवासी समुदाय के 10 विद्यार्थियों को प्रशस्ति पत्र व शील्ड देकर सम्मानित किया गया. मंच का संचालन सोनाली त्रिपाठी ने किया. मौके पर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव रमेश कुमार चीनी, नप के निवर्तमान उपाध्यक्ष सह झामुमो अल्पसंख्यक मोर्चा जिलाध्यक्ष मोहम्मद कलीम अख्तर, रंजीत सिंह सरदार, मो लड्डन, आइटीडीए परियोजना के निदेशक अमरेंद्र कुमार सिन्हा, जिला कल्याण पदाधिकारी आलोक रंजन समेत अन्य मौजूद थे.

आदिवासी समाज समृद्ध व ज्ञान का भंडार : उपायुक्त

उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी ने कहा कि आदिवासी समाज समृद्ध और ज्ञान का भंडार है. कहा कि जब हम आदिवासी दिवस मनाते हैं, तो कई लोग ऐसे भी होते हैं, जिनको यह अवसर नहीं मिलता है कि वे नजदीक से आदिवासी समाज को देख और समझ सके कि आदिवासी समाज कितना समृद्ध व ज्ञान से भरा समाज है. उपायुक्त ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के आदिवासी बच्चों में जितनी प्रतिभाएं होती हैं, उतनी प्रतिभा शहरी क्षेत्र में सभी सुख-सुविधाओं के बीच रहने वाले बच्चों में नहीं होती है. उपायुक्त ने शिक्षा पर जोर देते हुए कहा कि आज के दिन सभी माता-पिता संकल्प लें कि आप अपने बच्चों की शिक्षा को पहली प्राथमिकता देंगे. जब तक बच्चे ग्रेजुएट नहीं हो जाते. तब तक बच्चों पर कोई दूसरा बोझ नहीं देंगे.

आदिवासी समुदाय अपनी भाषा पर गर्व महसूस करें : डीएफओ

डीएफओ अहमद बेलाल अनवर ने आदिवासी समाज की भाषा पर जोर देते हुए कहा कि आप अपनी भाषा पर गर्व महसूस करें. उन्होंने बंगाली व तमिल भाषा की चर्चा करते हुए कहा कि बंगाली व तमिल लोग देश या विदेश के किसी भी कोने में रहते हैं. वहां वे अपनी ही भाषा का प्रयोग करते हैं. जब वे अपनी भाषा नहीं छोड़ते हैं, तो आप क्यों. कहा कि आदिवासी समुदाय के लोग अपनी पहचान बचाये रखना चाहते हैं. परंतु यह तभी संभव है जब आप अपनी भाषा को बचायेंगे. आपकी भाषा बचेगी, तो आप बचेंगे. इसलिए कहीं भी रहें. आप अपनी भाषा को नहीं छोड़े. वन पट्टा पर चर्चा करते हुए कहा कि परंपरागत वन निवासियों का वन पट्टा अधिकार है. खुशी है कि वन विभाग इस जिम्मेवारी को पूरा करने में अपना योगदान दे रहा है.

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Prabhat Khabar News Desk
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