Coronavirus In Jharkhand : 33 साल पुरोहित रहे गुमला धर्मप्रांत के बिशप पॉल अलोइस लकड़ा का कोरोना से निधन, झारखंड के ईसाई मिशनरियों में शोक की लहर

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Coronavirus In Jharkhand, गुमला न्यूज (दुर्जय पासवान) : झारखंड के गुमला धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष बिशप पॉल अलोइस लकड़ा (65 वर्ष) का निधन हो गया. वे बीमार थे. कोरोना पॉजिटिव भी थे और उनका इलाज कोस्टंट लिवन्स अस्पताल मांडर में इलाज चल रहा था. इसके बाद 17 मई को स्थिति बिगड़ने पर रांची के आर्किड अस्पताल में भर्ती कराया गया था. जहां सोमवार की देर रात को 1.30 बजे उनका निधन हो गया. मंगलवार की दोपहर में उनका शव गुमला लाया गया. जहां लोगों ने अंतिम दर्शन किया. शव को संत पात्रिक महागिरजाघर गुमला में रखा गया है. 16 जून को दिन के 10 बजे संत पात्रिक महागिरजाघर में शव का दफन क्रिया होगा.

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Coronavirus In Jharkhand, गुमला न्यूज (दुर्जय पासवान) : झारखंड के गुमला धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष बिशप पॉल अलोइस लकड़ा (65 वर्ष) का निधन हो गया. वे बीमार थे. कोरोना पॉजिटिव भी थे और उनका इलाज कोस्टंट लिवन्स अस्पताल मांडर में इलाज चल रहा था. इसके बाद 17 मई को स्थिति बिगड़ने पर रांची के आर्किड अस्पताल में भर्ती कराया गया था. जहां सोमवार की देर रात को 1.30 बजे उनका निधन हो गया. मंगलवार की दोपहर में उनका शव गुमला लाया गया. जहां लोगों ने अंतिम दर्शन किया. शव को संत पात्रिक महागिरजाघर गुमला में रखा गया है. 16 जून को दिन के 10 बजे संत पात्रिक महागिरजाघर में शव का दफन क्रिया होगा.

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स्व. पॉल लकड़ा ने 33 साल पुरोहित व 15 साल बिशप के रूप में सेवा दी है. वे गुमला धर्मप्रांत के दूसरे बिशप थे. पहले बिशप स्व माइकल मिंज थे. बिशप माइकल मिंज के निधन के बाद रोम के पोप वेनेदिक्त 16वें ने 28 जनवरी 2006 को गुमला शहर के नदीटोली निवासी पॉल अलोइस लकड़ा को गुमला धर्मप्रांत का बिशप चुना था. तब से बिशप गुमला धर्मप्रांत के एक चरवाहा बनकर सेवा दे रहे थे. बिशप पॉल के निधन से गुमला धर्मप्रांत के 39 चर्चों के इसाई मिशनरी सहित पूरे झारखंड के इसाई मिशनरी शोक में हैं. बिशप का भरा पूरा परिवार है.

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गुमला शहर के नदी टोली में बिशप के बड़े भाई, छोटी बहन परिवार के साथ रहते हैं. स्व पॉल लकड़ा का जन्म 11 जुलाई 1955 को हुआ था. उनकी प्रारंभिक शिक्षा संत पात्रिक हाई स्कूल गुमला से हुई. मैट्रिक संत इग्नासियुस हाईस्कूल गुमला से किया था. इंटर की पढ़ाई केओ कॉलेज गुमला से की थी. इसके बाद उन्होंने रांची के संत अलबर्ट एक्का कॉलेज में पढ़ाई की. डिकन के रूप में 1987-1988 को चुने गये और छह मई 1988 को 32 वर्ष की उम्र में उन्हें पुरोहित चुना गया था. उन्होंने झारखंड के कई क्षेत्रों में काम किया. इसके बाद 15 साल तक बिशप जैसे महत्वपूर्ण पद पर रहकर गुमला धर्मप्रांत की सेवा व मजबूती के लिए काम किया.

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गुमला काथलिक संघ के अध्यक्ष सेत कुमार एक्का ने बताया कि 16 जून को दिन के 10 बजे संत पात्रिक महागिरजाघर में उनका दफन क्रिया होगा. कोरोना महामारी को देखते हुए सामाजिक दूरी ��ा पालन करते हुए उनका अंतिम दर्शन कर सकते हैं. दफन क्रिया में रांची के आर्चबिशप रेव फेलिक्स टोप्पो गुमला आयेंगे. उनके द्वारा अंतिम संस्कार के रस्मों को पूरा किया जायेगा.

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Posted By : Guru Swarup Mishra

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