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प्रशासन की पहल पर बदला वोट बहिष्कार का निर्णय

Updated at : 02 May 2024 10:13 PM (IST)
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प्रशासन की पहल पर बदला वोट बहिष्कार का निर्णय

आप सभी की मांगें जायज, परंतु वोट बहिष्कार समस्याओं का समाधान नहीं: सीओ

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आप सभी की मांगें जायज, परंतु वोट बहिष्कार समस्याओं का समाधान नहीं: सीओ बिशुनपुर. बिशुनपुर प्रखंड के पूर्वी पठार क्षेत्र के पांच गांवों के ग्रामीणों ने वोट बहिष्कार के निर्णय को बदलते हुए लोकसभा चुनाव में वोट करने का फैसला किया है. प्रभात खबर में समाचार छपने के बाद प्रशासन की पहल पर ग्रामीणों ने अपना निर्णय बदल वोट करने को तैयार हुए. हाड़ुप, सेरेंगदाग, केचकी, जालिम व रीसापाठ गांव में सड़क नहीं बनने से लोग आक्रोशित हैं. सड़क को लेकर ग्रामीणों के वोट बहिष्कार की सूचना पर अंचलाधिकारी सह प्रभारी बीडीओ शेखर वर्मा, थाना प्रभारी उदेश्वर पाल ग्रामीणों के साथ बैठक कर मतदान के प्रति ग्रामीणों को जागरूक किया. पदाधिकारियों ने सेरका गांव से चीरोपाठ तक सड़क निर्माण के लिए प्रशासन द्वारा अब तक किये गये प्रयास व मिली स्वीकृति को साझा किया. सीओ ने कहा कि आप सभी की मांगें जायज है. परंतु वोट बहिष्कार समस्याओं का समाधान नहीं है. प्रशासन से लगातार आप लोगों को सुविधा मिलें. इसके लिए प्रयास किया जा रहा है. आपके मतदान से ही क्षेत्र का विकास संभव है. इधर, लगभग तीन घंटे पदाधिकारियों की बात सुनने के बाद बैठक में पहुंचे लगभग 1000 ग्रामीणों ने अपने वोट बहिष्कार के निर्णय को वापस लेते हुए लोकतंत्र के महापर्व में अपना मतदान करने का संकल्प लिया. इस अवसर पर मतदाता प्रतिज्ञा पत्र पढ़ा गया. मौके पर अंचल प्रभारी उपनिरीक्षक प्रकाश कच्छप, बीपीआरओ जितेंद्र भगत, पंचायत सचिव कुसुम खलखो, सुशील असुर, मुखिया दयामंती उरांव, हीरामुनी, रामलाल उरांव, शिवनाथ उरांव, बुद्धेश्वर बृजिया, मंगरू खेरवार, रवि उरांव आदि मौजूद थे. हमलोग लोकतंत्र के विरोधी नहीं : ग्रामीणों ने कहा हम लोग लोकतंत्र के विरोधी नहीं हैं, परंतु आजादी के बाद से अब तक हम अपना मतदान कर जिन्हें भी विधायक व सांसद बनाये. वे लौट कर कभी हमलोगों की समस्या जानने व देखने गांव नहीं आये. यहीं कारण है कि हमारे क्षेत्र में विद्यालय, पानी, स्वास्थ्य, सड़क की सुविधा नहीं है. इस कारण हमारे क्षेत्र की महिलाएं प्रसव पीड़ा से गुजरती है, तो उन्हें खाट पर लाद कर हमलोगों को जंगल के रास्ते सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिशुनपुर ले जाना पड़ता है. इस बीच कई लोगों का प्रसव जंगल में ही हो जाता है और बीमार से पीड़ित लोग अपना दम रास्ते में तोड़ देते हैं. हमारे गांव की सड़क बन जाती है, तो निश्चित रूप से गांव का आधा विकास हो जायेगा.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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