विकास का काम छोड़, भोग विलास की वस्तुएं खरीदी

Published at :08 Mar 2017 8:42 AM (IST)
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विकास का काम छोड़, भोग विलास की वस्तुएं खरीदी

घाघरा : गुमला जिला के घाघरा प्रखंड में 13वें वित्त व 14वें वित्त की राशि में करीब एक करोड़ रुपये का घोटाला हुआ है. इस घोटाले के पीछे प्रखंड के अधिकारी व मुखिया का कारनामा है. पंचायतों का विकास करना छोड़, इन लोगों ने भोग विलास की वस्तुएं खरीदी है. जनता सड़क, पुल, पुलिया व […]

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घाघरा : गुमला जिला के घाघरा प्रखंड में 13वें वित्त व 14वें वित्त की राशि में करीब एक करोड़ रुपये का घोटाला हुआ है. इस घोटाले के पीछे प्रखंड के अधिकारी व मुखिया का कारनामा है. पंचायतों का विकास करना छोड़, इन लोगों ने भोग विलास की वस्तुएं खरीदी है. जनता सड़क, पुल, पुलिया व पानी के लिए तरसती रही, लेकिन गांव की सरकार जनता के पैसों से ऐश कर रहे हैं.
अगर जिला में मामला नहीं दबा और जांच हुई, तो बड़ा घोटाला सामने आयेगा. घाघरा में 18 पंचायत है. सभी पंचायत में कंप्यूटर की खरीद हुई है, लेकिन बेकार रखा हुआ है. टैंकर का भी उपयोग कुछ पंचायत में ही हो रहा है. अधिकतर पंचायत में मुखिया अपना उपयोग कर रहे हैं.
विकास तो नहीं हुआ, अपनी बल्ले-बल्ले हो गयी : सरकार ने गांवों के विकास के लिए एक विकास नक्शा तैयार कर पंचायत के खाते में राशि दी थी. लेकिन यहां विकास योजना चलाने के बजाय कमीशन खोरी के लिए ही इतनी बड़ी राशि से जेनरेटर, इनवर्टर, सोलर प्लेट व टैंकर आदि समान की खरीदारी की गयी, जिसकी कोई उपयोगिता ही नहीं हो रही है. एक पंचायत सचिवालय में पंचायत भवन को हाइटेक बनाने के नाम पर दो टैंकर, एक भीसेट, एक जेनरेटर, एक इनवर्टर, सोलर प्लेट व कंप्यूटर खरीदारी के नाम पर लगभग आठ लाख 37 हजार की राशि खर्च की गयी. उपरोक्त सामान जितने मूल्य में खरीद हुई है, अगर यह सामान बाजार से खरीदा जाता, तो खरीद मूल्य से आधे में मिल सकते हैं.
ज्ञात हो कि जब उपरोक्त सामान की खरीदारी हो रही थी, तो कोई भी पंचायत सचिव तैयार नहीं थे. लेकिन तत्कालीन बीडीओ अरुण उरांव के 17 मार्च 2015 के पत्रांक 266 के तहत आदेश जारी किया गया कि सभी पंचायत भवन में इन सामग्री को लगाना सुनिश्चित करें.
जिसके बाद दबाव में आकर पंचायत के मुखिया व सचिव ने उपरोक्त सामान की खरीदारी की. नाम नहीं छापने की शर्त पर पंचायत सचिव ने बताया कि सामान खरीदने से लेकर भुगतान तक के लिए बहुत दबाव बनाया गया था.
इन सामग्रियों को दुगुने दाम में खरीदा गया : जेनरेटर का बाजार मूल्य एक लाख 74 हजार है, जिसे दो लाख 98 हजार में खरीदा गया है. इसी तरह पानी का टैंकर का बाजार मूल्य 60 से 70 हजार है, लेकिन इसे एक लाख 45 हजार में खरीदा गया है. भीसेट बाजार में 50 से 70 हजार में अासानी से मिलता है, जिसे दो लाख दो हजार में लगाया गया है. ऐसी कई सामाग्री हैं, जिनकी दुगुने से अधिक कीमत पर खरीदारी की गयी है.
फ्रीजर, कूलर, लग्जरी कुर्सी की खरीद हुई : पंचायत समिति में आयी 13वें वित्त आयोग की राशि से पूर्व बीडीओ अरुण उरांव ने आराम की जिंदगी जीने के लिए डीप फ्रीजर, कूलर, लग्जरी कुर्सी, फ्रीज, वाटर कुलिंग सिस्टम व एलइडी की महंगी-महंगी लाइट की खरीदारी की है. जिस लाइट का बाजार मूल्य 12 हजार है, उसकी 36 हजार रुपये में खरीदारी की गयी है. इसी तरह हर सामग्री को दुगने दाम में खरीदा गया है. जिस वक्त पंचायत समिति के मद से खरीदारी की गयी थी, उस समय पंचायत समिति सदस्यों ने इसका विरोध किया था.
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