हमारे दिल में हैं नेताजी
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :24 Jan 2017 8:41 AM (IST)
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नेताजी सुभाषचंद्र बोस पूरे देशवासियों के लिए प्रेरणास्रोत गुमला : नेताजी सुभाषचंद्र बोस की 120वीं जयंती पर जिला प्रशासन गुमला के तत्वावधान में समारोह आयोजित किया गया. परमवीर अलबर्ट एक्का स्टेडियम में आयोजित समारोह का उदघाटन मुख्य अतिथि उपायुक्त श्रवण साय ने नेताजी की तसवीर पर पुष्प अर्पित कर किया. समारोह में गुमला शहर के […]
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नेताजी सुभाषचंद्र बोस पूरे देशवासियों के लिए प्रेरणास्रोत
गुमला : नेताजी सुभाषचंद्र बोस की 120वीं जयंती पर जिला प्रशासन गुमला के तत्वावधान में समारोह आयोजित किया गया. परमवीर अलबर्ट एक्का स्टेडियम में आयोजित समारोह का उदघाटन मुख्य अतिथि उपायुक्त श्रवण साय ने नेताजी की तसवीर पर पुष्प अर्पित कर किया.
समारोह में गुमला शहर के संत इग्नासियुस हाइस्कूल गुमला, यूसी बालिका विद्यालय, सरस्वती शिशु मंदिर, संत पात्रिक स्कूल, राजेंद्र अभ्यास विद्यालय, लुथेरान मध्य विद्यालय राजकीय कन्या मध्य विद्यालय राजकीयकृत मध्य विद्यालय, केंद्रीय विद्यालय, राजकीयकृत मध्य विद्यालय मुख्यालय, कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय, राजकीय उर्दू मध्य विद्यालय, एसएस बालिका विद्यालय, एसएस बालक विद्यालय सहित विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राएं शामिल हुए.
उपायुक्त ने विद्यार्थियों के दिलों में देशभक्ति की भावना भरते हुए कहा कि नेताजी सुभाषचंद्र बोस हमारे दिल में रहते हैं. देश में ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ आजादी की लड़ाई लड़ी और अपनी जान दे दी. नेताजी उन्हीं वीर सपूतों में एक हैं. उनकी जीवनी पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि कटक में एक संपन्न परिवार में जन्मे नेताजी सुभाषचंद्र बोस की प्रारंभिक शिक्षा कटक में ही हुई थी. उच्च शिक्षा के लिए वो विदेश गये. शिक्षा पूरी करने के बाद वह भारत लौट आये और स्वतंत्रता संग्राम में कूद गये. राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के साथ देश को आजाद करने के लिए संघर्ष किया. नेताजी सुभाषचंद्र बोस पूरे देशवासियों के लिए प्रेरणा के स्रोत हैं.
राष्ट्रनायक कभी-कभी पैदा होते हैं : डीडीसी
उपविकास आयुक्त नागेंद्र कुमार सिन्हा ने ‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा’ का नारा लगाते हुए कहा कि यह नारा सुभाषचंद्र बोस का ही दिया हुआ है. यह कथन देश की आजादी में सार्थक सिद्ध हुआ़ 1943 में जर्मनी से सिंगापुर लौटने के बाद नेताजी ने आजाद हिंद फौज का गठन किया और अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी. इसके बाद से ही उन्हें नेताजी कहा जाने लगा और वे एक युवा नेता के रूप में उभरे. श्री सिन्हा ने कहा कि किसी देश के इतिहास में राजनेता तो बहुत आते-जाते हैं लेकिन नेताजी सुभाषचंद्र बोस जैसे राष्ट्रनायक कभी- कभी पैदा होते है.
नौकरी छोड़ आजादी में लिया हिस्सा : डीएसइ
जिला शिक्षा अधीक्षक गनौरी मिस्त्री व डीएसपी इंद्रमणि चौधरी ने विद्यार्थियों को जानकारी देते हुए कहा कि नेताजी सुभाषचंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 को ओड़िशा के कटक में एक बंगाली परिवार में हुआ था़ कोलकाता में प्रेसीडेंसी और स्कॉटिश चर्च कॉलेज से पढ़ाई के बाद इंगलैंड गये. 1920 में प्रशासनिक सेवा की परीक्षा उत्तीर्ण की.लेकिन जालियांवाला बाग कांड से व्यथित होकर 1921 में इस्तीफा दे दिये और स्वदेश लौट आये. महात्मा गांधी के साथ स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा लिया.
समारोह के बाद विद्यार्थियों ने निकाली शोभायात्रा
समारोह के बाद विद्यार्थियों ने शोभायात्रा निकाली़ शोभायात्रा में गुमला सरस्वती शिशु मंदिर के कक्षा चार के छात्र अपूर्व राज नेताजी सुभाषचंद्र की वेश में थे. इसी विद्यालय का घोष दल बैंड-बाजा ने शोभायात्रा का नेतृत्व किया. शोभायात्रा में विद्यार्थियों ने नेताजी के दिये नारे लगाये. कार्यक्रम में मंच का संचालन शिक्षक मोहम्मद जलील किया व धन्यवाद ज्ञापन बीपीओ दिलादार सिंह ने दिया.
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