गांव में उग्रवादी का भय स्कूल में वार्डन का डर

Published at :28 Jul 2016 6:05 AM (IST)
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गांव में उग्रवादी का भय स्कूल में वार्डन का डर

मानव तस्करी की शिकार लड़कियों ने बाल संरक्षण आयोग को सुनाया दुखड़ा. लड़कियों ने कहा कि अगर स्कूल में ऐसा बरताव होगा, तो हम लड़कियां कहां पढ़ेंगी. दुर्जय पासवान गुमला : गुमला के कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय स्कूल में पढ़नेवाली छात्राओं को दिल्ली रिटायर कह कर वार्डन द्वारा पिटाई की जाती है. उग्रवादी हिंसा की […]

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मानव तस्करी की शिकार लड़कियों ने बाल संरक्षण आयोग को सुनाया दुखड़ा. लड़कियों ने कहा कि अगर स्कूल में ऐसा बरताव होगा, तो हम लड़कियां कहां पढ़ेंगी.
दुर्जय पासवान
गुमला : गुमला के कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय स्कूल में पढ़नेवाली छात्राओं को दिल्ली रिटायर कह कर वार्डन द्वारा पिटाई की जाती है.
उग्रवादी हिंसा की शिकार छात्राओं के साथ भी भेदभाव किया जाता है. वार्डन छात्राओं को धमकी देती है. कहती है कि मेरी बात नहीं सुनोगी, तो स्कूल से निकाल देंगे.
यह दुखड़ा छात्राओं ने बुधवार को गुमला दौरे में पहुंचे बाल संरक्षण आयोग झारखंड सरकार की अध्यक्ष आरती कुजूर, सदस्य भूपन साहू व डॉ मनोज कुमार को सुनाया. छात्राओं की बात सुनने के बाद आयोग ने डीएसइ गनौरी मिस्त्री को निर्देश देते हुए कहा कि वार्डन इरका आभा लकड़ा को निलंबित कर रिपोर्ट देने के लिए कहा है.
आयोग के सामने रोने लगी लड़कियां
बसिया प्रखंड के डाकिया गांव में बढ़ई परिवार के पांच पुरुषों को पीएलएफआइ के उग्रवादियों ने हत्या कर दी थी. मृतक रीतु बढ़ई की बेटी प्रभा कुमारी व जीतु बढ़ई की बेटी आरती कुमारी गुमला के कस्तूरबा स्कूल में पढ़ रही हैं. दोनों चचेरी बहन पढ़ कर अपने परिवार का सहारा बनना चाहती हैं.
इन दोनों बहनों के साथ कस्तूरबा स्कूल में भेदभाव होता है. प्रभा ने रोते हुए आयोग के समक्ष कहा कि वार्डन का बरताव ठीक नहीं है. स्कूल से निकालने की धमकी देती है. पिटाई भी करती है. उग्रवादियों के डर के कारण यहां रह कर पढ़ाई कर रहे हैं. प्रभा के अलावा कई लड़कियां आयोग के सामने रोने लगी और दुखड़ा सुनाया.
वार्डन ने रखा अपना पक्ष
आयोग के समक्ष वार्डन इरका आभा लकड़ा ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि मैंने लड़कियों की पिटाई नहीं की है. कुछ लड़कियां बदमाशी कर रही थी. उन्हें समझाया है. अनुशासन पर मेरा पूरा ध्यान रहता है. वार्डन ने लड़कियों से भेदभाव की बात से इनकार किया.
कस्तूरबा स्कूल मानव तस्करी की शिकार व ड्रॉप आउट लड़कियों के लिए है. अगर यहां किसी के साथ भेदभाव या पिटाई होती है, तो यह कानून अपराध है. दोषी के खिलाफ कार्रवाई निश्चित है.
आरती कुजूर, अध्यक्ष, बाल संरक्षण आयोग, रांची
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