मूक बधिर बेटे के इलाज में गरीबी बाधक

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गुमला : मूक बधिर बेटे के इलाज में एक पिता के सामने गरीबी बाधक बनी हुई है. डॉक्टर से इलाज कराने के लिए पैसा भी नहीं है. गरीबी के कारण देहाती दवा (जड़ी बूटी) चल रही है. आठ साल से बेटे के मुंह से मां व पिता सुनने को दंपती बेताब है. परंतु बेटे के […]

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गुमला : मूक बधिर बेटे के इलाज में एक पिता के सामने गरीबी बाधक बनी हुई है. डॉक्टर से इलाज कराने के लिए पैसा भी नहीं है. गरीबी के कारण देहाती दवा (जड़ी बूटी) चल रही है. आठ साल से बेटे के मुंह से मां व पिता सुनने को दंपती बेताब है. परंतु बेटे के मुंह से सिर्फ भूख लगने पर दे की आवाज निकलती है.

आपके शहर में

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मामला गुमला जिला अंतर्गत घाघरा प्रखंड के गोया गांव का है. गोया गांव निवासी भदरू उरांव के 10 वर्षीय पुत्र दिनेश्वर उरांव की उम्र जब दो वर्ष थी, तभी से उसने बोलना बंद कर दिया. बोलना बंद करने के बाद पिता भदरू उरांव व मां दशमी उराइन ने उसका इलाज गांव में ही कराना शुरू किया.
झाड़ फूंक करने वाले एक व्यक्ति ने जड़ी बूटी दवा बना कर दी है. आठ साल से दिनेश्वर जड़ी बूटी की दवा खा रहा है, परंतु अभी तक वह बोलना नहीं सीखा है.
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