घर में कुरानख्वानी चल रही थी और मां और पत्नी वोट देने पहुंची बूथ

Updated at : 10 Dec 2019 1:05 AM (IST)
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घर में कुरानख्वानी चल रही थी और मां और पत्नी वोट देने पहुंची बूथ

मृतक जिलानी की पत्नी ने कहा : भैया, मेरे पति मर गये, अब कैसे जीयेंगे? गुमला : चुनावी हिंसा में मारे गये जिलानी अंसारी की मौत से पूरा परिवार गम में है. सोमवार को स्व जिलानी के घर पर गम में कुरानखानी चल रही थी, जबकि दूसरी तरफ आंखों में आंसू लिये मां सलमा खातून […]

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मृतक जिलानी की पत्नी ने कहा : भैया, मेरे पति मर गये, अब कैसे जीयेंगे?

गुमला : चुनावी हिंसा में मारे गये जिलानी अंसारी की मौत से पूरा परिवार गम में है. सोमवार को स्व जिलानी के घर पर गम में कुरानखानी चल रही थी, जबकि दूसरी तरफ आंखों में आंसू लिये मां सलमा खातून और पत्नी रोशन खातून बूथ नंबर 36 में पहुंच कर मतदान किया. बूथ में जो दृश्य था, यह दिल को छू रही थी. क्योंकि जिस बूथ के समीप सात दिसंबर को हुई हिंसा में जिलानी अंसारी की दर्दनाक मौत हो गयी, उसी बूथ में सोमवार को मां, पत्नी व बहनें वोट देने पहुंची थी.
यह बूथ सिसई प्रखंड के बघनी गांव स्थित उर्दू स्कूल में था. स्व जिलानी की मां सलमा खातून सुबह आठ बजे बूथ पहुंची. उन्होंने पहले वोट दिया. जब वह बूथ पहुंची थी, तो उनकी आंखों में आंसू थे. बेटे को खोने का गम था, फिर भी वह बूथ पर पहुंच कर वोट दें. सलमा के वोट देकर घर जाने के बाद दिन के एक बजे पत्नी रोशन खातून वोट देने बूथ पहुंची. रोशन खातून टूटी-टूटी सी नजर आ रही थी. पति के खोने का दुख था.
कुछ देर कतार में इंतजार के बाद रोशन ने वोट दिया. जब वह वोट देकर निकली, तो पत्रकारों ने उनसे चंद सवाल किये, जिसका जवाब उन्होंने दिल पर बोझ लिये दिया. यहां तक कि वोट देने के बाद उन्होंने अपनी अंगुली में लगे स्याही को भी दिखाया. यह स्याही उस बात का सबूत था कि लोकतंत्र का हम हिस्सा हैं. गम में भी हम लोकतंत्र के इस महापर्व में शामिल होकर राज्य के विकास व तरक्की के बारे में सोचते हैं.
पत्नी का सवाल : मुझे न्याय मिलेगा या नहीं?
सलमा व रोशन के वोट देने के बाद प्रभात खबर ने उनके घर जाकर हालचाल जाना. रोशन खातून ने कहा : भैया, अब किसके सहारे जीयेंगे? कमाने वाला तो चला गया. जिलानी घर से महिलाओं को निकलने नहीं देता था.
वह खुद मेहनत कर जो पैसा कमाता था, उसी पैसा से घर का चूल्हा चौका जलता था. हम सभी परिवार का पेट पल रहा था, परंतु हिंसा ने मेरे शौहर (पति) की जान ले ली. घर में कमाने वाला अब कोई नहीं है. सात दिसंबर की घटना को सभी ने देखा है. बूथ में हंगामा होने के बाद पुलिस ने फायरिंग की थी. इसके बाद मेरे पति जिलानी की मौत हुई, लेकिन अब कहा जा रहा है कि मेरे पति को किसी ने चाकू मार दिया है, जिससे उसकी मौत हो गयी. रोशन ने कहा कि सच्चाई क्या है, मैं नहीं जानती, लेकिन मुझे न्याय पर विश्वास है.
मुझे न्याय मिलेगा या नहीं. इस प्रकार के सवाल रोशन ने किया. साथ ही उन्होंने प्रशासन से मदद की गुहार भी लगायी है. रोशन ने कहा है कि उसकी सास, ननद के अलावा तीन बच्चे हैं, जिनके परवरिश की चिंता है. उन्होंने गुमला डीसी से मदद करने की अपील की है. रोशन ने बताया कि उसके परिवार को पूर्व में किसी प्रकार की सरकारी सहायता नहीं मिली है. झोपड़ी के घर में रहते हैं. पक्का घर बनवाने की मांग की.
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